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Health Ministry: ‘देश में शून्य खुराक वाले बच्चों की सबसे अधिक संख्या के दावे गलत’, स्वास्थ्य मंत्रालय का बयान

Thu, 18 Jul 2024 11:34 PM IST
मिथिलेश नौटियाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मिथिलेश नौटियाल Updated Thu, 18 Jul 2024 11:34 PM IST
सार

Health Ministry: हाल ही में कुछ समाचारों में यह दावा किया गया है कि भारत में 'शून्य खुराक वाले बच्चों' की संख्या अन्य देशों के मुकाबले ज्यादा है। अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन तमाम दावों को खारिज कर दिया है।

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Health Ministry trashes reports highlighting high number of ‘zero dose children’ in India
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा - फोटो : ANI

विस्तार

हाल ही में कुछ समाचारों में यह दावा किया गया है कि भारत में 'शून्य खुराक वाले बच्चों' की संख्या अन्य देशों के मुकाबले ज्यादा है। अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन तमाम दावों को खारिज कर दिया है। मंत्रालय ने तर्क दिया है कि जिन समाचारों में अन्य देशों के साथ भारत की तुलना की गई है, उनमें जनसंख्या आधार और टीकाकरण की विस्तृत जानकारी नहीं दी गई।

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स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि सरकार के टीकाकरण प्रयासों की सटीक जानकारी को मुहैया कराए गए आंकड़ों से जाना जा सकता है। मंत्रालय ने कहा कि भारत में सभी एंटीजन के विस्तृत क्षेत्र पर गौर करें, तो यह वैश्विक औसत से ज्यादा है। एंटीजन एक मानक है जो प्रतिरक्षा तंत्र के बारे में बताता है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि भारत में कई एंटीजन का कवरेज 90 फीसदी से अधिक है। इस तरह से भारत इस मामले में उच्च आय वाले देशों, न्यूजीलैंड (93 प्रतिशत), जर्मनी और फिनलैंड (91 प्रतिशत), स्वीडन (93 प्रतिशत), आयरलैंड (83 प्रतिशत) जैसे देशों के लगभग बराबर ही खड़ा है।
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स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, जिन देशों के साथ भारत की तुलना की गई है। उनमें भारत अकेला देश है जहां डीपीटी की खुराक 90 प्रतिशत से अधिक बच्चों को दी गई। वहीं उच्च आय वाले देशों की बात करें तो न्यूजीलैंड में 93 प्रतिशत, जर्मनी और फिनलैंड में 91 प्रतिशत, स्वीडन में 93 प्रतिशत और लक्जम्बर्ग में यह आंकड़ा 90 प्रतिशत रहा।
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स्वास्थ्य मंत्रालय ने तमाम दावों का खंडन करते हुए कहा कि भारत में जनसंख्या के हिसाब से ‘शून्य खुराक वाले बच्चों’ की संख्या 0.11 प्रतिशत है। मंत्रालय के मुताबिक ये आंकड़े बताते हैं कि टीकाकरण अभियानों को लेकर भारत सरकार कितनी जागरूक है। आगे बताया गया है कि भारत का टीकाकरण कार्यक्रम सबसे बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम है। इसके तहत एक वर्ष में 2.6 करोड़ बच्चों और 2.9 करोड़ गर्भवती महिलाओं को टीका लगाया जाता है। मंत्रालय ने बताया कि भारत में हर वर्ष 1.2 करोड़ टीकाकरण सत्र चलाए जाते हैं। 

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