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मेजर की शहादत के कुछ घंटे बाद घर पहुंचा पत्नी को भेजा सालगिरह का तोहफा

Fri, 17 Feb 2017 03:02 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 17 Feb 2017 03:02 PM IST
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he heart touching story of martyr major satish dahiya's
- फोटो : twitter

कुछ देर पहले ही जैसे सुजाता की पूरी दुनिया उजड़ गई थी, जम्‍मू कश्मीर से खबर आई थी कि उनके पति मेजर सतीश दहिया एक एनकाउंटर में शहीद हो गए हैं।

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पति की मौत की खबर सुनकर अभी उसे अपने कानों पर यकीन भी नहीं हो रही थी कि दरवाजे पर हुई दस्तक ने पूरे परिवार का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। लगा शायद इस गम में कोई और आंसू पोंछने आया है, लेकिन दरवाजे पर खड़े व्यक्ति ने परिवार वालों के हाथों में फूलों, चॉकलेट और ग्रिटिंग कार्ड का एक बॉक्स पकड़ाया तो हर कोई हैरत में रह गया। हालांकि कार्ड पर पड़ा नाम देखकर एक बार फिर परिवार के हर व्यक्ति की आंखों में आंसु बह आए।
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ये वो तोहफा था जिसे मेजर दहिया ने अपनी शादी की तीसरी सालगिरह पर पत्नी सुजाता को भेजा था। ग्रिटिंग कार्ड में उनका संदेश भी था। जिसमें लिखा था "मैं तुम्हे बहुत प्यार करता हूं, तुम मेरी प्रेरणा हो"।

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शादी की तीसरी सालगिरह पर पत्नी को भेजा था तोहफा

he heart touching story of martyr major satish dahiya's

आज शहीद मेजर दहिया और उनकी पत्नी सुजाता की शादी की तीसरी सालगिरह है। पत्नी के इसी दिन को खास बनाने के लिए मेजर सतीश दहिया ने बड़े प्यार से उन्हें तोहफा भेजा था, लेकिन पत्नी को क्या मालूम था कि ये उनका अंतिम तोहफा होगा।

इससे पहले की ये तोहफा पत्नी तक पहुंच पाता उनकी शहादत की खबर ने पूरे परिवार में कोहराम मचा दिया। इकलौते बेटे की मौत की खबर ने जहां बूढे़ पिता को तोड़कर रख दिया ‌तो पति की मौत से सुजाता की आंखों में आए आंसु थमने का नाम नहीं ले रहे थे।

दूसरी ओर मासूम बेटी इस सबसे बेखबर हर आने जाने वाले को हैरत भरी नजर से देख रही थी। बृहस्पतिवार को इसी मासूम बेटी ने अपने पिता की चिता को मुखाग्नि दी।

मेजर दहिया की बहादुरी के किस्से सुनाते हैं उनके दोस्त

he heart touching story of martyr major satish dahiya's

मंगलवार को जम्‍मू-कश्मीर के हंदवाड़ा में कई घंटों तक पूरी बहादुरी से आतंकवादियों से लोहा लेते रहे मेजर सतीश दहिया अंत में उन्‍हीं की गोलियों का शिकार हो गए। 

गांव में उनके दोस्त उनकी बहादुरी के खूब किस्से सुनाते हैं। आंखों में आए आंसुओं को पोंछते हुए कई दोस्त बताते हैं कि सेना में जाने के बाद से ही वो अक्सर कहा करता था कि "एक दिन ऐसा काम करूंगा क‌ि तुम मुझ पर नाज करोगे..... आज पूरा देश उस पर नाज कर रहा है।" 

उनकी पत्नी सुजाता कहती हैं कि "उन्हें अपने पति की शहादत पर गर्व है। उनके जाने का गम तो शायद ही कभी खत्म हो सके.... लेकिन बस दिल में तसल्‍ली ये ही है कि सच्चे सिपाही की तरह वो देश के काम आए।"

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