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क्या होगा हवाई युद्ध का भविष्य?: छठी पीढ़ी के फाइटर जेट की दौड़ में भारत शामिल, यूरोप के साथ जुड़ने की तैयारी
Wed, 18 Mar 2026 10:26 PM IST
Himanshu Singh Chandel
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Himanshu Singh Chandel
Updated Wed, 18 Mar 2026 10:26 PM IST
सार
भारत छठी पीढ़ी के फाइटर जेट कार्यक्रम में शामिल होने के लिए यूरोप के दो समूहों में से किसी एक के साथ जुड़ने पर विचार कर रहा है। इसका मकसद भारतीय वायुसेना को आधुनिक बनाना है। चीन की बढ़ती सैन्य ताकत को देखते हुए यह कदम अहम माना जा रहा
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असम में वायुसेना का एयरशो
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारतीय वायुसेना को और मजबूत बनाने के लिए भारत अब छठी पीढ़ी के फाइटर जेट कार्यक्रम में शामिल होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। संसद की रक्षा समिति को दी गई जानकारी के मुताबिक, भारत यूरोप के दो बड़े वैश्विक समूहों में से किसी एक के साथ जुड़ने पर विचार कर रहा है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि भारत उन्नत सैन्य तकनीक की दौड़ में पीछे न रह जाए।
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में फिलहाल दो बड़े समूह छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकसित कर रहे हैं। एक समूह में ब्रिटेन, इटली और जापान शामिल हैं, जबकि दूसरे समूह में फ्रांस और जर्मनी हैं। भारतीय वायुसेना इनमें से किसी एक के साथ साझेदारी कर इस तकनीक में शामिल होना चाहती है, ताकि भविष्य की युद्ध जरूरतों को समय रहते पूरा किया जा सके।
क्या है छठी पीढ़ी के जेट की जरूरत?
रक्षा समिति ने कहा कि आधुनिक युद्ध में तेजी से बदलाव हो रहा है और उन्नत फाइटर जेट की जरूरत बढ़ रही है। चीन भी अपने छठी पीढ़ी के विमान पर काम कर रहा है और उसने इसके कुछ विजुअल भी जारी किए हैं। इसके अलावा चीन अपने पांचवीं पीढ़ी के जेट पाकिस्तान के साथ साझा करने की तैयारी में है, जिससे भारत के लिए यह चुनौती और बढ़ जाती है।
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ये भी पढ़ें- US: 'अमेरिका के लिए पाकिस्तान सबसे बड़ा परमाणु खतरा', खुफिया एजेंसी की प्रमुख तुलसी गबार्ड का बड़ा बयान
भारत की अपनी परियोजना कहां तक पहुंची?
भारत अपने स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट एएमसीए पर भी काम कर रहा है। रक्षा समिति के अनुसार, इसका डिजाइन तैयार हो चुका है और इसके निर्माण को लेकर बातचीत जारी है। भारतीय वायुसेना की योजना 2035 तक ऐसे छह स्क्वाड्रन शामिल करने की है, जिससे देश की हवाई ताकत में बड़ा इजाफा होगा।
इंजन और तकनीक में क्या हो रही है तैयारी?
भारत ने एक फ्रांसीसी कंपनी के साथ मिलकर 110-120 केएन क्षमता का शक्तिशाली इंजन विकसित करने का फैसला किया है। यही इंजन भविष्य के स्वदेशी लड़ाकू विमानों में लगाया जाएगा। इस कदम से भारत की रक्षा तकनीक आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगी और विदेशों पर निर्भरता कम होगी।
अन्य वीडियो-
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रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में फिलहाल दो बड़े समूह छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकसित कर रहे हैं। एक समूह में ब्रिटेन, इटली और जापान शामिल हैं, जबकि दूसरे समूह में फ्रांस और जर्मनी हैं। भारतीय वायुसेना इनमें से किसी एक के साथ साझेदारी कर इस तकनीक में शामिल होना चाहती है, ताकि भविष्य की युद्ध जरूरतों को समय रहते पूरा किया जा सके।
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क्या है छठी पीढ़ी के जेट की जरूरत?
रक्षा समिति ने कहा कि आधुनिक युद्ध में तेजी से बदलाव हो रहा है और उन्नत फाइटर जेट की जरूरत बढ़ रही है। चीन भी अपने छठी पीढ़ी के विमान पर काम कर रहा है और उसने इसके कुछ विजुअल भी जारी किए हैं। इसके अलावा चीन अपने पांचवीं पीढ़ी के जेट पाकिस्तान के साथ साझा करने की तैयारी में है, जिससे भारत के लिए यह चुनौती और बढ़ जाती है।
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भारत की अपनी परियोजना कहां तक पहुंची?
भारत अपने स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट एएमसीए पर भी काम कर रहा है। रक्षा समिति के अनुसार, इसका डिजाइन तैयार हो चुका है और इसके निर्माण को लेकर बातचीत जारी है। भारतीय वायुसेना की योजना 2035 तक ऐसे छह स्क्वाड्रन शामिल करने की है, जिससे देश की हवाई ताकत में बड़ा इजाफा होगा।
इंजन और तकनीक में क्या हो रही है तैयारी?
भारत ने एक फ्रांसीसी कंपनी के साथ मिलकर 110-120 केएन क्षमता का शक्तिशाली इंजन विकसित करने का फैसला किया है। यही इंजन भविष्य के स्वदेशी लड़ाकू विमानों में लगाया जाएगा। इस कदम से भारत की रक्षा तकनीक आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगी और विदेशों पर निर्भरता कम होगी।
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