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महाराष्ट्र: बॉम्बे उच्च न्यायालय ने महाधिवक्ता से मांगी कानूनी राय, राहुल गांधी से जुड़ा है मामला

Tue, 26 Sep 2023 10:07 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आदर्श शर्मा Updated Tue, 26 Sep 2023 10:07 PM IST
सार

मानहानि मामले पर राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एसवी कोटवाल ने कहा कि यह कानून के कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न उठाता है। 

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HC says that rahul Gandhi's plea against defamation complaint raises legal issues
बॉम्बे हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को प्रधानमंत्री पर कथित टिप्पणी मामले पर राहुल गांधी के खिलाफ याचिका में शामिल कानूनी मुद्दों पर महाराष्ट्र के महाधिवक्ता से राय मांगी है। मंगलवार को राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई करते हुए, उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एसवी कोटवाल ने कहा कि यह कानून के कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न उठाता है। 
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उन्होंने कहा, इसलिए मैं महाराष्ट्र के महाधिवक्ता से इस मामले से जुड़े सभी कानूनी मुद्दों पर अदालत को संबोधित करने का अनुरोध करना जरूरी समझता हूं।

राहुल गांधी के वकील सुदीप पसबोला ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 199 (2) का हवाला दिया। जिसके तहत एक सत्र अदालत ऐसे मामले का संज्ञान ले सकती है, जहां सार्वजनिक कार्यों के निर्वहन के संबंध में एक लोक सेवक के खिलाफ अपराध का आरोप लगाया गया है। वकील ने कहा, इसलिए कोई मजिस्ट्रेट ऐसे मामले की सुनवाई नहीं कर सकता।
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याचिकाकर्ता महेश श्रीश्रीमाल ने 2018 में प्रधानमंत्री के बारे में राहुल गांधी की 'कमांडर-इन-थीफ' टिप्पणी पर मानहानि की शिकायत दर्ज की थी।

उच्च न्यायालय ने मामले को  अगली सुनवाई 17 अक्टूबर तक की। साथ ही, राहुल गांधी को मामले में दी गई अंतरिम राहत तब तक के लिए बढ़ा दी गई है।

राहुल गांधी द्वारा निचली अदालत के समन को चुनौती देने के बाद बॉम्बे उच्च न्यायालय ने नवंबर 2021 में मजिस्ट्रेट को सुनवाई स्थगित करने का निर्देश दिया था। तब से उच्च न्यायालय के समक्ष राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई समय-समय पर स्थगित की गई और उनकी अंतरिम राहत भी बढ़ा दी गई।
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गैंगस्टर अरुण गवली को 28 दिन  के लिए फरलो पर रिहा करने का दिया निर्देश
बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने मंगलवार को केंद्रीय जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे गैंगस्टर अरुण गवली को 28 दिन की फरलो दी है। न्यायमूर्ति नितिन साम्ब्रे और वाल्मिकी मेनेजेस की खंडपीठ ने गवली को 28 दिनों के लिए फरलो पर रिहा करने का निर्देश दिया। ये आदेश गैंगस्टर गवली द्वारा दाखिल की गई याचिका पर दिया।  डीआइजी जेल (नागपुर) द्वारा राहत के लिए उसके आवेदन को खारिज करने के बाद वकील मीर नगमान अली के जरिए गवली ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

बता दें कि फर्लो समय की एक निर्धारित अवधि है जब किसी कैदी को जेल छोड़ने की अनुमति दी जाती है। गवली 2007 में मुंबई के शिव सेना पार्षद कमलाकर जामसंदेकर की हत्या के मामले में यहां केंद्रीय जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है।
 
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