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Badlapur Case: 'लड़कों की मानसिकता बदलने की जरूरत', बॉम्बे हाईकोर्ट ने सरकार को कमेटी बनाने के दिए निर्देश

Tue, 27 Aug 2024 07:02 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: बशु जैन Updated Tue, 27 Aug 2024 07:02 PM IST
सार

कोर्ट ने कहा कि हम हमेशा लड़कियों के बारे में बात करते हैं। हम लड़कों को यह नहीं बताते कि क्या सही है और क्या गलत? हमें लड़कों की मानसिकता बदलने की जरूरत है। उन्हें महिलाओं का सम्मान करना सिखाएं।

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HC says Badlapur sexual assault case Male dominance persists need to change mindset of boys
बॉम्बे हाई कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

बदलापुर में बच्चियों के यौन उत्पीड़न मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि लड़कों को छोटी उम्र से ही लैंगिक समानता के बारे में शिक्षित करने और संवेदनशील बनाया जाए। साथ ही उनकी मानसिकता को बदलने की जरूरत है।

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न्यायाधीश रेवती मोहिते डेरे और न्यायाधीश पृथ्वीराज चव्हाण की खंडपीठ ने कहा कि समाज में पुरुष प्रधान की मानसिकता को बदलने के लिए लड़कों को कम उम्र से ही सही और गलत व्यवहार के बारे में सिखाया जाए। कोर्ट ने आगे ऐसी घटनाओं से बचने के लिए स्कूल में पालन करने वाले नियमों की सिफारिश करने के लिए एक कमेटी गठित करने के निर्देश दिए।
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बदलापुर पूर्व के एक नामी स्कूल में दो बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप स्कूल टॉयलेट साफ करने वाले व्यक्ति अक्षय शिंदे पर लगा है। पीड़ितों में से एक चार साल की है और दूसरी छह साल की है। इस मामले में काफी विरोध प्रदर्शन भी हुए। इसके बाद राज्य सरकार ने सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए बदलापुर पुलिस की जांच पर नाराजगी जताई।
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कोर्ट ने कहा कि पुलिस को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए थी। पुलिस ने एक पीड़ित और उसके परिवार को बयान दर्ज कराने के लिए पुलिस स्टेशन बुलाया था। पुलिस ने उनके घर पर बयान दर्ज करने का प्रयास भी नहीं किया। यहां पुलिस से जांच में बड़ी गलती हुई।

इस पर महाराष्ट्र सरकार के महाधिवक्ता (एजी) बीरेंद्र सराफ ने कहा कि बदलापुर पुलिस स्टेशन के तीन पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि राज्य शिक्षा विभाग स्कूलों में पूर्व प्राथमिक स्तर से बच्चों को लैंगिक समानता और लैंगिक संवेदनशीलता के बारे में पढ़ाने की पहल कर सकता है। कोर्ट ने कहा कि जब तक हम घर पर अपने बच्चों को समानता के बारे में नहीं सिखाएंगे, तब तक कुछ नहीं होगा। 

कोर्ट ने कहा कि हम हमेशा लड़कियों के बारे में बात करते हैं। हम लड़कों को यह नहीं बताते कि क्या सही है और क्या गलत? हमें लड़कों की मानसिकता बदलने की जरूरत है। उन्हें महिलाओं का सम्मान करना सिखाएं। कोर्ट ने बच्चों के बीच सोशल मीडिया के अधिक उपयोग पर अफसोस जताया। कोर्ट ने एक मराठी फिल्म का जिक्र करते हुए कहा कि यह केवल लड़कियों के लिए क्यों है? लड़कों के लिए क्यों नहीं?

अदालत ने कहा कि एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश, एक सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी, एक सेवानिवृत्त प्रिंसिपल, एक महिला आईपीएस अधिकारी और बाल कल्याण समिति के एक सदस्य की समिति गठित की जाए। यह समिति इस मुद्दे का अध्ययन करके भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए नियमों और दिशानिर्देशों की सिफारिश कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले की सुनवाई तीन सितंबर को करेगी, तब तक सरकार समिति का गठन करे। 

पुरुष अटेंडेट क्यों जाता था शौचालय 
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सवाल किया कि पीड़ित लड़कियों को पुरुष अटेंडेंट के साथ शौचालय में क्यों भेजा जाता था? क्या स्कूल ने आरोपी को काम पर रखने से पहले उसकी पृष्ठभूमि की जांच की थी? इस पर महाधिवक्ता ने कहा कि आरोपी के माता-पिता उसी स्कूल में कार्यरत हैं और इसलिए उसे भी काम पर रखा गया था। आरोपी ने तीन बार शादी की है और उसकी पत्नियों के बयान दर्ज किए गए हैं।


फॉरेंसिक प्रयोगशाला में अलग सेल बने
अदालत ने केवल यौन उत्पीड़न और बलात्कार के मामलों की जांच के लिए फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में एक अलग सेल का सुझाव दिया। कोर्ट ने कहा कि इससे रिपोर्ट जल्द से जल्द प्रस्तुत की जाएगी। कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि शुरुआत में एक पुरुष डॉक्टर ने पीड़ित लड़कियों की जांच की थी। कोर्ट ने मामले में नियुक्त विशेष लोक अभियोजक की सहायता के लिए एक महिला अभियोजक को नियुक्त करने का भी सुझाव दिया।

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