मुस्लिमों को एससी-एसटी का दर्जा देने की मांग पर हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप से किया इंकार
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हिंदू अनुसूचित जाति-जनजाति की तरह मुस्लिमों में वंचित तबके के लोगों को आरक्षण देने की मांग में दाखिल याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 341(3) को अवैध घोषित करते हुए रद्द करने की मांग भी की गई थी।
कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया। जनहित याचिका एसोसिएशन फॉर सिविल राइट द्वारा दाखिल की गई थी। इस पर कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति वीके शुक्ल और न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी की खंडपीठ ने सुनवाई की।
मुस्लिमों को आरक्षण दिलाने की मांग
याचिका में कहा गया कि प्रेसीडेंसी रूल्स 1950 में हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख जाति में ही अनुसूचित जाति और जनजाति का दर्जा दिया गया है। इन्हीं को आरक्षण भी दिया जा रहा है, जबकि मुस्लिम समुदाय में ऐसी तमाम जातियां हैं, जिनकी आर्थिक-सामाजिक स्थिति अनुसूचित जातियों जैसी ही है, मगर उनको आरक्षण का लाभ नहीं मिलता है।
मांग की गई कि ऐसी जातियों को चिह्नित कर उनको अनुसूचित जाति-जनजाति का दर्जा दिया जाए। संविधान में धर्म के आधार पर भेदभाव करना मना है। ऐसा करने से संविधान के समता के अधिकार, समान अवसर पाने के अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकारों का हनन होता है। अदालत का मानना था कि याचिका निरर्थक और बलहीन है।