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Maharashtra: बॉम्बे हाईकोर्ट ने नारायण राणे को जारी किया समन, विनायक राउत ने की सांसदी रद्द करने की मांग
Fri, 16 Aug 2024 01:47 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: श्वेता महतो
Updated Fri, 16 Aug 2024 01:47 PM IST
सार
राउत ने अपनी याचिका में रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग निर्वाचन क्षेत्र में नये सिरे से या दोबारा चुनाव कराने के लिए भारत के चुनाव आयोग को निर्देश देने की भी मांग की। शिवसेना नेता ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें राणे के समर्थक मतदाताओं को पैसे बांटते हुए उन्हें भाजपा नेता के पक्ष में वोट डालने की अपील करते हुए दिखे।
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नारायण राणे
- फोटो : ANI
विस्तार
महाराष्ट्र में बॉम्बे हाई कोर्ट ने शिवसेना (यूबीटी) के रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग निर्वाचन क्षेत्र के उम्मीदवार विनायक राउत द्वारा दायर एक चुनाव याचिका पर भाजपा सांसद नारायण राणे को समन जारी किया है। अपनी याचिका में विनायक ने नारायण राणे के सांसदी को रद्द करने की मांग की। बता दें कि लोकसभा चुनाव में राणे ने दो बार के सांसद रह चुके राउत को 47,858 वोटों के अंतर से हराया था। राणे ने 4,48,514 वोट, जबकि राउत ने 4,00,656 वोट हासिल की।
पिछले महीने हाईकोर्ट में दायर की याचिका
विनायक राउत ने पिछले महीने याचिका दायर की थी। उन्होंने दावा किया था कि राणे ने धोखाधड़ी से चुनाव जीता था। उन्होंने राणे की सांसदी को खत्म करने की भी मांग की। राउत ने कहा कि राणे पर पांच साल के लिए चुनाव लड़ने और मतदान करने पर भी प्रतिबंध लगाया जाए। जस्टिस एसवी कोटवाल की एकल पीठ ने राणे को समन जारी किया और उनसे याचिका पर प्रतिक्रिया मांगी। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 12 सितंबर को तय की है।
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रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग निर्वाचन क्षेत्र दोबारा चुनाव कराने की मांग
राउत ने अपनी याचिका में रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग निर्वाचन क्षेत्र में नये सिरे से या दोबारा चुनाव कराने के लिए भारत के चुनाव आयोग को निर्देश देने की भी मांग की। शिवसेना नेता ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें राणे के समर्थक मतदाताओं को पैसे बांटते हुए उन्हें भाजपा नेता के पक्ष में वोट डालने की अपील करते हुए दिखे।
राउत ने कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के अनुसार, मतदान से 48 घंटे पहले प्रचार गतिविधियों को रोक दिया जाना चाहिए। हालांकि, राणे और उनके समर्थकों की यह गतिविधियां ‘‘वैधानिक प्रावधान का स्पष्ट उल्लंघन’’ है। उन्होंने अदालत से इस वीडियो की जांच के लिए स्वतंत्र समिति गठित करने का निर्देश देने की भी मांग की। बता दें कि राउत ने इस साल मई में महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष याचिका दायर की थी, लेकिन जब उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई, तब उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया।
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पिछले महीने हाईकोर्ट में दायर की याचिका
विनायक राउत ने पिछले महीने याचिका दायर की थी। उन्होंने दावा किया था कि राणे ने धोखाधड़ी से चुनाव जीता था। उन्होंने राणे की सांसदी को खत्म करने की भी मांग की। राउत ने कहा कि राणे पर पांच साल के लिए चुनाव लड़ने और मतदान करने पर भी प्रतिबंध लगाया जाए। जस्टिस एसवी कोटवाल की एकल पीठ ने राणे को समन जारी किया और उनसे याचिका पर प्रतिक्रिया मांगी। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 12 सितंबर को तय की है।
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रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग निर्वाचन क्षेत्र दोबारा चुनाव कराने की मांग
राउत ने अपनी याचिका में रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग निर्वाचन क्षेत्र में नये सिरे से या दोबारा चुनाव कराने के लिए भारत के चुनाव आयोग को निर्देश देने की भी मांग की। शिवसेना नेता ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें राणे के समर्थक मतदाताओं को पैसे बांटते हुए उन्हें भाजपा नेता के पक्ष में वोट डालने की अपील करते हुए दिखे।
राउत ने कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के अनुसार, मतदान से 48 घंटे पहले प्रचार गतिविधियों को रोक दिया जाना चाहिए। हालांकि, राणे और उनके समर्थकों की यह गतिविधियां ‘‘वैधानिक प्रावधान का स्पष्ट उल्लंघन’’ है। उन्होंने अदालत से इस वीडियो की जांच के लिए स्वतंत्र समिति गठित करने का निर्देश देने की भी मांग की। बता दें कि राउत ने इस साल मई में महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष याचिका दायर की थी, लेकिन जब उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई, तब उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया।