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Supreme Court: हेट स्पीच मामले में सुनवाई टली; वृंदा करात ने की थी अनुराग ठाकुर-प्रवेश वर्मा पर FIR की मांग

Mon, 15 May 2023 07:11 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Mon, 15 May 2023 07:11 PM IST
सार

आरोप है कि 27 जनवरी 2020 को दिल्ली के रिठाला में एक रैली के दौरान अनुराग ठाकुर ने रैली में मौजूद लोगों को कथित तौर पर आपत्तिजनक नारे लगाने के लिए उकसाया था। यह नारे कथित तौर पर सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लगाए गए थे।  

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Hate speeches: Supreme Court defers hearing to Aug 14 on plea for FIRs against Anurag Thakur and Parvesh Verma
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को माकपा नेता वृंदा करात की नफरती भाषण से संबंधित याचिका पर सोमवार को सुनवाई टाल दी है। अब इस याचिका पर सुनवाई 14 अगस्त को होगी। दरअसल, दोनों नेताओं के खिलाफ हेट स्पीच के मामले में एफआईआर की मांग को ट्रायल कोर्ट ने खारिज कर दिया था। जिसके खिलाफ सीपीआई (एम) नेता वृंदा करात और केएम तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर एफआईआर कराने की मांग की थी।

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अपनी याचिका में माकपा नेता ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है। दरअसल, दिल्ली हाई कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा दोनों भाजपा नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश से इनकार करने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया था। जिसके बाद माकपा नेता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। 
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सोमवार को इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति केएम जोसेफ और न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। पीठ ने दिल्ली पुलिस आयुक्त की ओर से पेश अधिवक्ता रजत नायर द्वारा याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगे जाने के बाद मामले को अगस्त में आगे की सुनवाई के लिए स्थगित कर दिया।
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इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने 17 अप्रैल को नोटिस जारी कर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा था। तब शीर्ष अदालत ने इस पर विचार किया था कि प्रथम दृष्टया मजिस्ट्रेट का यह कहना कि दोनों भाजपा नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 196 के तहत प्रतिबंध आवश्यक है, सही नहीं था।

आरोप है कि 27 जनवरी 2020 को दिल्ली के रिठाला में एक रैली के दौरान अनुराग ठाकुर ने रैली में मौजूद लोगों को कथित तौर पर आपत्तिजनक नारे लगाने के लिए उकसाया था। यह नारे कथित तौर पर सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लगाए गए थे। वहीं सांसद प्रवेश वर्मा ने शाहीन बाग में सीएए विरोधी प्रदर्शन पर आपत्तिजनक बयान दिया था। 

इसके बाद कोर्ट में याचिका दाखिल कर कार्रवाई की मांग की गई। जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने मामलों की जांच की थी और ट्रायल कोर्ट को बताया था कि प्रथम दृष्टया कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता है। इस पर कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी। ट्रायल कोर्ट के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी। हालांकि हाईकोर्ट ने भी ट्रायल कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया और एफआईआर के लिए सक्षम अधिकारी के पास जाने के निर्देश दिए। 


13 जून 2022 को सीपीआई (एम) नेता वृंदा करात ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। जहां से अब यह मामला जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच को भेज दिया गया है। याचिका में वृंदा करात और केएम तिवारी ने मांग की है कि दोनों भाजपा नेताओं के खिलाफ आईपीसी की धारा 153-ए, 153-बी, 295-ए के तहत एफआईआर दर्ज की जाए। 

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