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हरियाणा में खसरा-रूबेला से निपटने के लिए शुरू हुआ टीकाकरण अभियान, मेवात के मदरसों में लगाए गए टीके

Fri, 27 Apr 2018 05:54 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 27 Apr 2018 05:54 PM IST
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haryana starts massive campaign to eradicate measles rubella, madrassas too help in immunization

खसरा-रूबेला जैसी दो जानलेवा बीमारियों से निपटने के लिए हरियाणा में वृहद टीकाकरण अभियान की शुरुआत के पहले चरण में मेवात जिले में स्थित मदरसों में पढ़ने वाली बच्चियों को टीका लगाया गया। 25 अप्रैल से शुरू हुए इस अभियान में राज्य के सभी स्कूल-कालेज में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को मुफ्त में टीका लगाया जाएगा। 


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खसरा-रूबेला जैसी दो जानलेवा बीमारियों से निपटने के लिए हरियाणा में वृहद टीकाकरण अभियान की शुरुआत के पहले चरण में मेवात जिले में स्थित मदरसों में पढ़ने वाली बच्चियों को टीका लगाया गया। 25 अप्रैल से शुरू हुए इस अभियान में राज्य के सभी स्कूल-कालेज में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को मुफ्त में टीका लगाया जाएगा। 

मौलवियों ने जुमे की नमाज के बाद किया आह्वान
मेवात जिले में टीकाकरण अभियान की शुरुआत खानपुरघाटी मे स्थित मेवात मॉडल गर्ल्स स्कूल से की गई। अभियान के दौरान सभी छात्राओं को टीका लगाने से पहले एक पोस्टर और निबंध प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया।

इसके अलावा जिले में स्थित मस्जिदों के मौलवियों ने भी नमाज के बाद लोगों से यह टीका अपने बच्चों को लगवाने के लिए आह्वान किया। मौलवियों ने लोगों से कहा कि वे यह टीका अपने बच्चों को जरूर लगवाएं और किसी के भी बहकावे में न आएं। इस अभियान में राज्य के वक्फ बोर्ड को भी शामिल किया गया है, जो अन्य जिलों में भी अपने समाज के बीच जागरूकता अभियान चला रहा है। 

हरियाणा सबसे पीछे
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, हरियाणा के मिशन निदेशक अमनीत पी कुमार ने बताया किखसरा-रूबेला के टीकाकरण के मामले में राज्य का मेवात जिला काफी पीछे है। इसी लिए पूरे राज्य में इस जिले सेे इसके टीकाकरण के लिए अभियान शुरू किया गया है। इस एक टीके के लगने के बाद दो बीमारियों से बच्चों को सुरक्षा मिलेगी। 

टीका नहीं लगने से हो सकती हैं यह बीमारियां

अमनीत पी कुमार ने कहा कि यह टीका नहीं लगने से बच्चों को गंभीर बीमारियों को खतरा लगातार बना रहता है। बच्चियों को यह टीका लगवाना जरूरी है क्योंकि व्यस्क होने के बाद गर्भवती होने पर नवजात बच्चों में भी यह जन्म से हो सकती है।

खसरा-रूबेला घातक रोगों में शामिल है और इसका टीका 9 महीने के शिशु से लेकर के 15 साल के बच्चों को लगाना अनिवार्य है। अगर यह टीका नहीं लगाया गया तो फिर कान का बहरापन, दिमागी बीमारी, ल्यूकेमा और लड़कियों में गर्भावस्था के दौरान परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 

2020 तक खसरा-रूबेला से मुक्त करना है देश
केंद्र सरकार ने 2020 तक खसरा-रूबेला को खत्म करने का टारगेट लिया है। राज्य में यह अभियान 6 हफ्ते चलेगा, जिसमें से पहले 2 हफ्ते स्कूल-कॉलेज में टीका लगाया जाएगा। इसके बाद प्रदेश के तमाम आंगनवाड़ी और प्राथमिक व अन्य स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पताल में यह टीकाकरण किया जाएगा। यह टीका 10वीं कक्षा तक में पढ़ने वाले छात्रों को लगाया जाएगा। 
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