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मोबाइल टॉवर के रेडिएशन से लोग होते हैं बीमार, मंत्री हैं कि मानते नहीं

Fri, 08 Apr 2016 06:32 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 08 Apr 2016 06:32 PM IST
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harmful effect of mobile tower radiation

मोबाइल टावर से निकलने वाले रे‌डिएशन बेशक देश-दुनिया में बहस और शोध का विषय बने हुए हैं लेकिन उनसे होने वाले नुकसान की आशंका से कोई इनकार नहीं कर सकता। देश में ही कई विश्वविद्यालय और आईआईटी मोबाइल और उसके टॉवरों से निकलने वाले रेडिएशन से मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों पर शोध कर चुके हैं। 

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इनमें से अधिकतर इसी निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि मोबाइल टॉवर से होने वाला रेडिएशन इंसानों के लिए ही नहीं जीव जंतुओं के लिए भी काफी हानिकारक है। लेकिन हैरतअंगेज रूप से देश के नीति नियंता इस बात को मानने के लिए तैयार ही नहीं हैं, देश के दूरसंचार मंत्री तो इस बात से ही इंकार करते हैं कि मोबाइल टॉवरों से इंसानी जीवन को किसी प्रकार का कोई खतरा है। 
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हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने दावा किया कि अभी तक हुए शोधों के अनुसार मोबाइल टॉवर से इंसानी जीवन को किसी प्रकार के खतरे के संकेत नहीं मिले हैं। इसके लिए वह डब्लूएचओ के शोध का हवाला भी देते हैं। 
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लेकिन इससे इतर कई महत्वपूर्ण शोधों में पुख्ता तरीके से इस बात को पेश किया गया कि किस तरह मोबाइल और उसके टॉवरों से निकलने वाले रेडिएशन मानव जाति के लिए खतरनाक होते जा रहे है, इसके चलते लोगों को कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का सामना भी करना पड़ रहा है। जानते हैं कितना सही है दूरसंचार मंत्री का दावा।

कई आईआईटी और यूनिवर्सिटी ने किया प्रभावों पर शोध

harmful effect of mobile tower radiation

मोबाइल टॉवरों से निकलने वाले रेडिएशन पर आईआईटी दिल्‍ली के प्रोफेशर गिरीश कुमार ने काफी पहले एक शोध किया था। उनके अनुसार मोबाइल से ज्यादा परेशानी उसके टॉवरों से है। क्योंकि मोबाइल का इस्तेमाल हम लगातार नहीं करते, लेकिन टावर लगातार चौबीसों घंटे रेडिएशन फैलाते हैं। 

मोबाइल पर अगर हम घंटा भर बात करते हैं तो उससे हुए नुकसान की भरपाई के लिए हमें 23 घंटे मिल जाते हैं, जबकि टावर के पास रहनेवाले उससे लगातार निकलने वाली तरंगों की जद में रहते हैं। वो दावा करते हैं कि अगर घर के समाने टावर लगा है तो उसमें रहनेवाले लोगों को 2-3 साल के अंदर सेहत से जुड़ी समस्याएं शुरू हो सकती हैं। 

वो बताते हैं कि मोबाइल टावर के 300 मीटर एरिया में सबसे ज्यादा रेडिएशन होता है। एंटिना के सामने वाले हिस्से में सबसे ज्यादा तरंगें निकलती हैं। जाहिर है, सामने की ओर ही नुकसान भी ज्यादा होता है, पीछे और नीचे के मुकाबले। इसी तरह दूरी भी बहुत अहम है। टावर के एक मीटर के एरिया में 100 गुना ज्यादा रेडिएशन होता है। टावर पर जितने ज्यादा ऐंटेना लगे होंगे, रेडिएशन भी उतना ज्यादा होगा।

टॉवरों की रेडिएशन से पक्षियों पर भी पड़ रहा प्रभाव

harmful effect of mobile tower radiation

जर्मनी में हुए एक रिसर्च के मुताबिक जो लोग ट्रांसमिटर ऐंटेना के 400 मीटर एरिया में रहते थे उनमें कैंसर होने की आशंका तीन गुना बढ़ गई। 400 मीटर के एरिया में ट्रांसमिशन बाकी एरिया से 100 गुना ज्यादा होता है। 

वहीं केरल में हुई रिसर्च के अनुसार सेल फोन टॉवरों से होने वाले रेडिएशन से मधुमक्खियों की प्रजनन क्षमता 60 फीसदी तक गिर गई। कभी हमें हर समय घर के आसपास दिखाई देने वाली गौरया ढूंढे नहीं मिलती। इसी तरह कौवों और अन्य पक्षियों की संख्या भी तेजी से घटी है। 

वैज्ञानिक इसका कारण भी मोबाइल टॉवरों से निकलने वाली रेडिएशन को मानते हैं। केरल में हुई जांच के अनुसार सेल फोन टावरों के पास जिन गौरेयों ने अंडे दिए, 30 दिन के बाद भी उनमें से बच्चे नहीं निकले, जबकि आमतौर पर इस काम में 10-14 दिन लगते हैं। गौरतलब है कि टावर्स से काफी हल्की फ्रीक्वेंसी (900 से 1800 मेगाहर्ट्ज) की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्ज निकलती हैं, लेकिन ये भी छोटे चूजों को काफी नुकसान पहुंचा सकती हैं।

बढ़ रहा है कैंसर, बहरापन, बांझपन और याद्दाश्त में कमी की समस्या

harmful effect of mobile tower radiation
mobile radiation - फोटो : mobile radiation

कुछ टाइम पहले राजस्‍थान के जयपुर में रे‌‌डिएशन पर आयोजित सेमिनार में भाग लेने आई नोबल पुरस्कार विजेता डा. डेवेरा डेविस ने जोर देकर कहा था कि रेडियेशन के कारण ब्रेन कैंसर, याददाशत में कमी, बहरापन और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। 

डा. डेविस ने मोबाइल फोन और टावर से निकलने वाले रेडियेशन के खतरों पर लंबे समय तक शोध किया है, उनकी इन्हीं शोध के लिए उन्हें नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। शोध के आधार पर ही उन्होंने दावा किया मोबाइल फोन को सीने से चिपकाकर रखने वाली महिलाओं में ब्रेंस्ट कैंसर तथा पेंट की जेब में मोबाइल रखने वालों में नपुंसकता, शुक्राणुओं में कमी और कैंसर जैसे रोग पनप रहे हैं। 

उन्होंने बताया कि मोबाइल टावर के निकट रहने वाले लोगों में कैंसर का खतरा अन्य के मुकाबले अधिक होता है। गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए तो यह ज्यादा खतरनाक है। उन्होंने शोध के बारे में बताया था कि रेडिएशन से चूहों के प्रजनन तंत्र पर विपरीत प्रभाव पड़ा, इसके कारण पशु-पक्षी तक मोबाइल टावर के पास नहीं जाते।

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