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Supreme Court: 'इस्कॉन सोसाइटी बंगलूरू का है हरे कृष्ण मंदिर', सुप्रीम कोर्ट ने पलटा कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला

Fri, 16 May 2025 11:13 AM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Fri, 16 May 2025 11:13 AM IST
सार

दो सोसाइटी जो एक जैसा नाम और आध्यात्मिक मिशन रखती हैं, पिछले डेढ़ दशक से कानूनी दांव पेंच की लड़ाई अदालतों में लड़ रही थीं। हालांकि, इस्कॉन बैंगलोर और इस्कॉन मुंबई के बीच बंगलूरू में हरे कृष्ण मंदिर और शैक्षणिक परिसर पर नियंत्रण का मुद्दा अब सुलझ गया है।

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Hare Krishna temple in Bengaluru belongs to ISKCON Society Bengaluru: SC
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को माना कि बंगलूरू में हरे कृष्ण मंदिर शहर में इस्कॉन सोसाइटी का है। शीर्ष अदालत ने इस्कॉन बंगलूरू की याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें बंगलूरू में प्रतिष्ठित हरे कृष्ण मंदिर और शैक्षणिक परिसर पर नियंत्रण के लिए इस्कॉन मुंबई के पक्ष में फैसला सुनाया गया था। ये फैसला न्यायमूर्ति एएस ओका और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने सुनाया।
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करीब डेढ़ दशक तक कानूनी दांव पेंच
बता दें कि, इस्कॉन बैंगलोर ने 23 मई, 2011 के उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए 2 जून, 2011 को शीर्ष अदालत का रुख किया था। इस याचिका में, इस्कॉन बैंगलोर, जिसका प्रतिनिधित्व इसके पदाधिकारी कोडंडाराम दास ने किया, ने उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी, जिसने बंगलूरू की एक स्थानीय अदालत के 2009 के आदेश को पलट दिया था।
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पहले बैंगलोर फिर मुंबई के पक्ष में आया फैसला
इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने इस्कॉन बैंगलोर के पक्ष में फैसला सुनाया था, जिसमें इसके कानूनी शीर्षक को मान्यता दी गई थी और इस्कॉन मुंबई के खिलाफ स्थायी निषेधाज्ञा दी गई थी। हालांकि, उच्च न्यायालय ने इस फैसले को पलट दिया और इस्कॉन मुंबई के प्रतिवाद को बरकरार रखा, जिससे उन्हें प्रभावी रूप से मंदिर पर नियंत्रण मिल गया।

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क्या है दोनों सोसाइटियों का दावा? 
कानूनी झगड़े ने समान नाम और आध्यात्मिक मिशन वाली दो सोसाइटियों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा कर दिया है। कर्नाटक में पंजीकृत इस्कॉन बैंगलोर का तर्क है कि वह दशकों से स्वतंत्र रूप से काम कर रही है और बंगलूरू दिर का प्रबंधन कर रही है। राष्ट्रीय सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 और बॉम्बे पब्लिक ट्रस्ट अधिनियम, 1950 के तहत पंजीकृत इस्कॉन मुंबई का दावा है कि इस्कॉन बैंगलोर केवल उसकी शाखा है और संबंधित संपत्ति सही मायने में उसके अधिकार क्षेत्र में है।

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