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वैवाहिक विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने दंपती को फटकारा; कहा- महाराजा की तरह व्यवहार न करें, देश में लोकतंत्र

Fri, 16 May 2025 07:13 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Fri, 16 May 2025 07:13 AM IST
सार

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने दंपती के वकील से कहा कि वह दिन में उनसे बात करें और उनके इरादों के बारे में अदालत को सूचित करें। पीठ ने कहा, इस तरह के बयान दिए जा रहे हैं कि मध्यस्थता के प्रयास विफल हो गई है? महाराजा या राजा की तरह व्यवहार न करें। लोकतंत्र के 75 साल बीत चुके हैं।

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Supreme Court reprimanded couple embroiled in marital dispute and says not to behave like Maharaja
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवाद में उलझे दंपती को फटकार लगाते हुए कहा कि वे ‘महाराजा’ की तरह व्यवहार न करें, देश में 75 साल से अधिक समय से लोकतंत्र कायम है। शीर्ष अदालत ने इस मामले को अहंकार का टकराव बताया। शीर्ष अदालत ने खासकर इस संदर्भ में यह टिप्पणी कि है कि पति-पत्नी में से एक पक्ष कथित तौर पर एक शाही परिवार से ताल्लुक रखता है।

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महिला ने आरोप लगाया है कि अलग रह रहे उसके पति और उसके परिवार ने दहेज में रोल्स रॉयस कार और मुंबई में फ्लैट की मांग को लेकर उसे परेशान किया। जबकि पति ने इससे इन्कार किया। पति ने अलग रह रही पत्नी, उसके माता-पिता और रिश्तेदारों के खिलाफ विवाह प्रमाण पत्र तैयार करने में धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज कराया। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने दंपती के वकील से कहा कि वह दिन में उनसे बात करें और उनके इरादों के बारे में अदालत को सूचित करें। पीठ ने कहा, इस तरह के बयान दिए जा रहे हैं कि मध्यस्थता के प्रयास विफल हो गई है? महाराजा या राजा की तरह व्यवहार न करें। लोकतंत्र के 75 साल बीत चुके हैं।
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पीठ ने चेतावनी दी कि यदि मध्यस्थता के माध्यम से कोई समाधान नहीं निकला तो वह तीन दिनों के भीतर ‘कठोर’ आदेश पारित करने से नहीं हिचकिचाएगी। ग्वालियर में रहने वाली महिला ने दावा किया कि वह एक उच्च प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखती है, जिसके पूर्वज छत्रपति शिवाजी महाराज की नौसेना में एडमिरल थे और उन्हें कोंकण क्षेत्र का शासक घोषित किया गया था। दूसरी ओर, पति सेना के अधिकारियों के परिवार से ताल्लुक रखता है और मध्य प्रदेश में एक शैक्षणिक संस्थान चलाता है।

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विवाद केवल अहंकार के कारण
दोनों पक्षों की ओर से पेश हुए वकील ने अदालत को बताया कि विवाद मुख्य रूप से पैसे को लेकर है। जस्टिस कांत ने कहा, हम जानते हैं, यह केवल अहंकार के कारण है। यदि विवाद पैसे को लेकर है, तो अदालत इसका समाधान कर सकती है, लेकिन इसके लिए पक्षों को आम सहमति पर पहुंचना होगा। पीठ ने सुनवाई अगले सप्ताह तय की। 22 अप्रैल को, वरिष्ठ अधिवक्ता आर. बसंत, जिन्हें दंपती के विवाद में मध्यस्थता के लिए नियुक्त किया गया था, ने पीठ को सौहार्दपूर्ण समाधान तक पहुंचने में विफल रहने के बारे में सूचित किया। उन्होंने पीठ से दोनों पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण समाधान की संभावना तलाशने के लिए एक अंतिम प्रयास करने का अनुरोध किया।

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