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आधी सजा काट चुके विचाराधीन कैदी क्यों नहीं हो रहे रिहाः सुप्रीम कोर्ट
राजीव सिन्हा, नई दिल्ली
Updated Wed, 11 Oct 2017 04:42 AM IST
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कैदी
- फोटो : FILE PHOTO
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सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सहित तीन राज्यों से पूछा है कि जिला विधिक सेवा अथॉरिटी के सदस्य सचिव की सिफारिशों को क्यों नहीं स्वीकार किया गया। शीर्ष अदालत ने कहा कि आखिर जेल में बंद विचाराधीन कैदियों की रिहाई क्यों नहीं हुई जबकि उन्हें रिहा करने की सिफारिश की गई थी। ये सभी वे विचाराधीन कैदी हैं जो आधी सजा काट चुके हैं।
न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश सरकार को 10 दिनों के भीतर हलफनामा दायर कर यह बताने के लिए कहा कि आखिरकार जिला विधिक सेवा अथॉरिटी के सदस्य सचिव और अंडरट्रायल रिव्यू कमेटी की सिफारिशों के बाद भी कैदियों को क्यों नहीं रिहा किया गया।
मालूम कि रिव्यू कमेटी में जिला जज, पुलिस अधीक्षक और जिला अधिकारी भी हैं। पीठ ने इस बात पर नाराजगी जताई कि जेल में क्षमता से अधिक कैदी हैं। लेकिन सिफारिशों के बावजूद आधी सजा काट चुके विचाराधीन कैदियों को रिहा नहीं किया जा रहा है।
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पीठ ने इन तीनों राज्यों को 25 अक्टूबर तक हलफनामा दायर करने के लिए कहा है। पीठ ने कहा कि किसी भी स्थिति में हलफनामा दायर करने की सीमा नहीं बढ़ाई जाएगी। साथ ही पीठ ने यह भी साफ किया कि राज्य सरकारों द्वारा संतोषजनक जवाब न मिलने की स्थिति में राज्यों के मुख्य सचिवों को भी समन किया जा सकता है।
पीठ ने कहा कि हम इसलिए यह आदेश पारित कर रहे हैं कि राष्ट्रीय विधिक सेवा अथॉरिटी (नालसा) के हलफनामे में जो आंकड़े पेश किए गए है वह हैरत करने वाला है।
पीठ ने पाया कि कई मौके पर जिला विधिक सेवा अथॉरिटी के सदस्य सचिव और अंडरट्रायल रिव्यू कमेटी की सिफारिशों से कैदी रिहा किए गए। पीठ ने राज्य सरकारों से हलफनामे में इसका कारण भी बताने के लिए कहा है। अगली सुनवाई 31 अक्टूबर को होगी।
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न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश सरकार को 10 दिनों के भीतर हलफनामा दायर कर यह बताने के लिए कहा कि आखिरकार जिला विधिक सेवा अथॉरिटी के सदस्य सचिव और अंडरट्रायल रिव्यू कमेटी की सिफारिशों के बाद भी कैदियों को क्यों नहीं रिहा किया गया।
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मालूम कि रिव्यू कमेटी में जिला जज, पुलिस अधीक्षक और जिला अधिकारी भी हैं। पीठ ने इस बात पर नाराजगी जताई कि जेल में क्षमता से अधिक कैदी हैं। लेकिन सिफारिशों के बावजूद आधी सजा काट चुके विचाराधीन कैदियों को रिहा नहीं किया जा रहा है।
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पीठ ने इन तीनों राज्यों को 25 अक्टूबर तक हलफनामा दायर करने के लिए कहा है। पीठ ने कहा कि किसी भी स्थिति में हलफनामा दायर करने की सीमा नहीं बढ़ाई जाएगी। साथ ही पीठ ने यह भी साफ किया कि राज्य सरकारों द्वारा संतोषजनक जवाब न मिलने की स्थिति में राज्यों के मुख्य सचिवों को भी समन किया जा सकता है।
पीठ ने कहा कि हम इसलिए यह आदेश पारित कर रहे हैं कि राष्ट्रीय विधिक सेवा अथॉरिटी (नालसा) के हलफनामे में जो आंकड़े पेश किए गए है वह हैरत करने वाला है।
पीठ ने पाया कि कई मौके पर जिला विधिक सेवा अथॉरिटी के सदस्य सचिव और अंडरट्रायल रिव्यू कमेटी की सिफारिशों से कैदी रिहा किए गए। पीठ ने राज्य सरकारों से हलफनामे में इसका कारण भी बताने के लिए कहा है। अगली सुनवाई 31 अक्टूबर को होगी।