फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Gujarat ›   Gujarat: thousands of people reach to the Morbi bridge in search of their loved ones

Gujarat: आज भी अपनों को खोजने हजारों आंखें पहुंचती हैं मोरबी पुल पर, लेकिन मिलती हैं तो सिसकियां और यादें

Thu, 17 Nov 2022 12:56 PM IST
Harendra Chaudhary मोरबी, गुजरात से आशीष तिवारी की रिपोर्ट
मोरबी, गुजरात से आशीष तिवारी की रिपोर्ट Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 17 Nov 2022 12:56 PM IST
सार

Gujarat: मोरबी पुल पर मौजूद सुरक्षाकर्मी अनुमोद पटेल कहते हैं कि यहां पर जो मलबा पड़ा है उसे देखकर लोगों की आंखों में आंसू आ जाते हैं। वह बताते हैं कि पिछले इतवार को ही यहां इतनी भीड़ थी कि अतिरिक्त सुरक्षा बल बुलाना पड़ा था। उनका कहना है कि भीड़ बेकाबू नहीं थी, लेकिन लोग बेहद भावुक थे, जो उस पुल के मलबे के पास आकर रो रहे थे...

विज्ञापन
Gujarat: thousands of people reach to the Morbi bridge in search of their loved ones
Gujarat: Morbi - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

गुजरात के मोरबी में हुई घटना को हुए 20 दिन से ज्यादा हो गए हैं, लेकिन आज भी घटनास्थल पर न जाने कितने लोग अपनों को ढूंढते हुए पहुंच रहे हैं। कोई अपनी छोटी बेटी को ढूंढते हुए पुल के मलबे के पास पहुंच रहा है, तो कोई अपनी पत्नी और कोई पति और बच्चे के गम में अभी भी उस जगह पहुंच रहे हैं। अमर उजाला डॉट कॉम जब मोरबी में घटनास्थल पर पहुंचा तो वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों और झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले लोगों ने बताया कि हर रविवार सैकड़ों लोग अपनों की याद में अभी यहां पहुंच रहे हैं।

विज्ञापन

मोरबी पुल पर मौजूद सुरक्षाकर्मी अनुमोद पटेल कहते हैं कि यहां पर जो मलबा पड़ा है उसे देखकर लोगों की आंखों में आंसू आ जाते हैं। वह बताते हैं कि पिछले इतवार को ही यहां इतनी भीड़ थी कि अतिरिक्त सुरक्षा बल बुलाना पड़ा था। उनका कहना है कि भीड़ बेकाबू नहीं थी, लेकिन लोग बेहद भावुक थे, जो उस पुल के मलबे के पास आकर रो रहे थे। उन्होंने बताया कि मोरबी के पास स्थित जगाधा गांव के शंभू गुप्ता की सात साल की बेटी और उनकी पत्नी की डूबने से मौत हो गई। वह कहते हैं कि शंभू की मानसिक दशा का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि वह बीते कई दिनों से लगातार यहां पर आते हैं और मलबे को देखकर फूट-फूट कर रोते हैं।

विज्ञापन

इस पुल के नीचे ही बनी झोपड़पट्टी में रहने वाले सुनील बताते हैं कि उन्होंने स्थानीय नगरपालिका से गुजारिश की है कि इस मलबे को कहीं दूसरी जगह पर स्थानांतरित करा दिया जाए या इसे नष्ट कर दिया जाए। ताकि लोग पुल के टूटे मलबे को देखकर विचलित ना हों। सुनील बताते हैं कि यहां आने वाले ज्यादातर लोग वही होते हैं, जिनके अपने इस पुल के टूटने के बाद इस दुनिया में नहीं रहे। उनका कहना है कि यहां पर सुरक्षा के लिए तो सिक्योरिटी गार्ड तो बैठे हुए हैं, लेकिन ध्वस्त हो चुके पुल के मलबे को देखकर अभी भी लोग अपने आंसू नहीं रोक पा रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

मच्छू नदी के दूसरी ओर यहां के राजघराने का शाही महल है। मोरबी का यह हैंगिंग ब्रिज शाही महल और यहां के इंजीनियरिंग कॉलेज को जोड़ता था। शाही परिवार से ताल्लुक रखने वाले अमृतलाल कहते हैं कि पुल उसी दिन खुला था। उनके परिवार के कुछ बच्चे भी पुल पर पहुंचे थे। लेकिन भीड़ देखकर वो तो वापिस आ गए, लेकिन उनके कुछ दोस्त वहीं रह गए। वह कहते हैं कि उनके परिवार के बच्चे अभी भी रात भर रोते हैं कि वह अपने दो दोस्तों को क्यों नहीं वापिस लाए थे।

इलाके के रहने वाले स्थानीय पत्रकार प्रवीण कहते हैं कि जो पुल का मलबा पड़ा हुआ है, उसे हटाया जाना चाहिए। क्योंकि लोग अभी अभी पुल के उस रैंप को देखने जाते हैं, जो टूट कर गिर गया था। स्थानीय मानवाधिकार संगठन से जुड़े हसमुख मेहता कहते हैं कि मोरबी में ऐसा कोई भी घर नहीं है, जो इस वक्त दुखी ना हो। मेहता का कहना है कि आज भी लोग अपनों की याद में मच्छु नदी के इस पुल की ओर आते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed