{"_id":"65c4186a214f7a5d3e06ae44","slug":"gujarat-salt-desert-brightens-kutch-fortunes-employment-increases-2024-02-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"गुजरात: नमक के रेगिस्तान ने चमकाई कच्छ की किस्मत, रोजगार बढ़ा, चार माह में आ चुके हैं करीब सात लाख सैलानी","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
गुजरात: नमक के रेगिस्तान ने चमकाई कच्छ की किस्मत, रोजगार बढ़ा, चार माह में आ चुके हैं करीब सात लाख सैलानी
Thu, 08 Feb 2024 05:25 AM IST
यशोधन शर्मा
संतोष सिंह, भुज
संतोष सिंह, भुज
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Thu, 08 Feb 2024 05:25 AM IST
सार
धोरडो गांव के आगे नमक की चादर बिछी है, जो पाकिस्तान सीमा तक रहती है। इससे धोरडो सहित आसपास के लोगों का जीवन कठिन रहता है। ग्रामीण कहते हैं कि पाकिस्तान सीमा के पास जब समुद्र में ऊंची लहरें उठती हैं, तब पानी धोरडो गांव के पास तक आ जाता है।
विज्ञापन
पाकिस्तान सीमा का अंतिम गांव धोरडो
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पाकिस्तान सीमा के अंतिम गांव धोरडो और कच्छ जिले के लिए नमक यानी मीठू (गुजराती भाषा में) अब मिठाई बन गया है। करीब चार महीने (नवंबर, दिसंबर, जनवरी और फरवरी में अब तक) में ही करीब सात लाख देसी-विदेशी सैलानी नमक का रेगिस्तान देखने आ चुके हैं। इससे रोजगार बढ़ा है। धोरडो सहित आसपास के लोगों की किस्मत चमक गई है। सबकी आमदनी बढ़ी है। वीरान क्षेत्र में रण उत्सव मन रहा है। इसके लिए टेंट सिटी बनाई गई है।
विज्ञापन
रिजॉर्ट बने हैं। नमक का रेगिस्तान देखने आने वाले सैलानियों को लाइट एंड साउंड शो दिखाया जा रहा है। धोरडो ग्राम पंचायत है। इससे तीन मजरे पटगार, उडो, सीढ़ियाडो जुड़े हैं। ग्राम पंचायत की आबादी 1500 है। धोरडो के सरपंच मियां हुसैन के मुताबिक, पीएम नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तभी से रण उत्सव मनाया जा रहा है।
विज्ञापन
100 किमी के दायरे में नमक की सफेद चादर
धोरडो गांव के आगे नमक की चादर बिछी है, जो पाकिस्तान सीमा तक रहती है। इससे धोरडो सहित आसपास के लोगों का जीवन कठिन रहता है। ग्रामीण कहते हैं कि पाकिस्तान सीमा के पास जब समुद्र में ऊंची लहरें उठती हैं, तब पानी धोरडो गांव के पास तक आ जाता है। इस गांव से समुद्र की दूरी करीब 150 किलोमीटर है। इसके बावजूद पानी पहुंचता है। बाद में बारिश होती है। खूब पानी लगता है।
विज्ञापन
अक्तूबर से पहले पानी नीचे चला जाता है। पानी के उतरते ही 100 किलोमीटर के दायरे में नमक की सफेद चादर दिखने लगती है, जो समुद्र के खारे पानी की वजह से बनता है। इस क्षेत्र में खेती-किसानी नहीं होती है। आय का जरिया पशुपालन और पर्यटन ही है।