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गुजरात: हिंसा और पलायन के बीच, इस 'सीक्रेट कैंप' में रह रहे हैं उत्तर भारतीय

Tue, 09 Oct 2018 12:21 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर Updated Tue, 09 Oct 2018 12:21 PM IST
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Gujarat Migration: as tension continues workers are residing in ‘secret’ camp located in Ahmedabad

गुजरात में मासूम के साथ हुए बलात्कार की घटना के बाद उत्तर भारतीयों के खिलाफ गुस्सा और नफरत फैलती जा रही है। इसी बीच अहमदाबाद जिले में, जहां ठाकोर समुदाय का दबदबा है वहां स्थित फार्म हाउस में 25 युवा प्रसावियों का एक समूह रविवार शाम से शरण लिए हुए हैं। यह सभी उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। यह दो मंजिला फार्म हाउस, खेतों से घिरा हुआ है। जिसकी वजह से यह मुख्य सड़क से आसानी से दिखाई नहीं देता है। 

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इस गुप्त कैंप को अहमदाबाद जिले में उत्तर भारतीय विकास परिषद ने बनाया हुआ है। यहां उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्यप्रदेश के प्रवासी मजदूरों को शरण दी जा रही है क्योंकि उनपर राज्यभर में हमले हो रहे हैं। परिषद के मुखिया श्याम सिंह ठाकोर का कहना है, 'परिस्थितियां नियंत्रण में आने तक प्रवासियों के रहने के लिए यहां अस्थायी इंतजाम कर दिए गए हैं। हम इन स्थानों का खुलासा नहीं करना चाहते हैं। इन क्षेत्रों को शॉर्टलिस्ट करने से पहले बहुत ध्यान से रेकी की गई थी।' 
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सोमवार को यूपी के आदमी जो 18-28 उम्र के थे वह फार्म हाउस की छत पर बैठे हुए दिखाई दिए। परिषद के सदस्य दीपक दुबे ने कहा, 'यह उनके लिए सबसे सुरक्षित स्थान है। यह गांव गृह राज्यमंत्री प्रदीप सिन्ह जडेजा के वत्वा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आता है। इसलिए यहां कानून व्यवस्था का उल्लंघन नहीं होगा। साथ ही यहां की जनता पढ़ी-लिखी है और यहां नागरिकों, पुलिस और संस्था के सदस्यों के साथ नियमित बैठकें होती रहती हैं।'
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इस परिषद की स्थापना 2016 में अहमदाबाद में हुई थी। इसे यूपी, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड, एमपी और हरियाणा के ट्रस्टी चलाते हैं। ठाकुर के अनुसार इसमें विभिन्न राजनीतिक पार्टियों जैसे कि भाजपा, कांग्रेस और सपा के 32,000 सदस्य हैं। जिन मजदूरों ने फार्म हाउस में शरण ली है वह गांधीनगर के देहगाम की स्नैक्स फैक्ट्री में काम करते हैं। शनिवार शाम को जब भीड़ ने उनकी फैक्ट्री पर हमला किया तो वह दो या चार लोगों के समूह में बंट गए। उन्हें गुजरात छोड़ने के लिए कहा गया है।  

कानपुर के रहने वाले 18 साल के सुमित गौतम ने कहा, 'हमें इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि हम यूपी से हैं। पास की फैकट्रियों से जैसे ही लोग जाने लगे हम भी शनिवार शाम को अहमदाबाद रेलवे स्टेशन के लिए निकल गए थे।' सुमित पिछले 9 महीनों से फैक्ट्री में 6,000 रुपये की तनख्वाह पर काम कर रहे थे। फार्म हाउस पहुंचने पर एक दूसरे सदस्य सलमान खान ने कहा, 'निजी जीप में चार लोगों के समूह में यात्रा करने के बावजूद बाइक पर सवार लोग हमें ताने दे रहे थे और हमारा पीछा कर रहे थे। हम बहुत डर गए थे। जब हम नरोल पहुंचे तो किसी ने हमें परिषद का नंबर दिया और उनसे संपर्क करने के लिए कहा। इस तरह हम यहां पहुंचे।'


फार्म हाउस में मौजूद लोग वर्तमान परिस्थितियों के बारे में पता लगाने के लिए मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं। यूपी के औरेया के रहने वाले 20 साल के भोला प्रजापति ने कहा, 'हमें समझ नहीं आ रहा है कि बेकसूर प्रवासियों को निशाना क्यों बनाया जा रहा है। जिसने घटना को अंजाम दिया उसे कठोर से कठोर सजा दी जानी चाहिए लेकिन बेकसूर लोगों को नहीं। यदि कोई गुजराती अपराध करेगा तो क्या वह उसे भी बाहर निकाल देंगे?' भोला की 6 महीने पहली ही शादी हुई है।

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