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गुजरात हाईकोर्ट: शादी के लिए होने वाले धर्मांतरण के खिलाफ बने नए कानून की कुछ धाराओं पर लगाई रोक 

Fri, 20 Aug 2021 06:08 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, अहमदाबाद
एजेंसी, अहमदाबाद Published by: Kuldeep Singh Updated Fri, 20 Aug 2021 06:08 AM IST
सार

  • पीठ ने कहा, अंतर धार्मिक विवाह मामले में केवल शादी के आधार पर एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती 
  • केवल अंतर धार्मिक विवाह के आधार पर किसी के खिलाफ एफआईआर अब दर्ज नहीं हो सकेगी

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Gujarat High Court ban on some sections of the new law made against conversion for marriage
Gujarat High Court

विस्तार

गुजरात हाईकोर्ट ने शादी के लिए होने वाले धर्मांतरण के खिलाफ बने नए कानून की कुछ धाराओं को लागू करने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि केवल शादी के आधार पर अंतर धार्मिक विवाह मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती है। बगैर यह साबित हुए कि शादी जबरन हुई या लालच देकर हुई है, पुलिस में मामला दर्ज नहीं किया जा सकता है। 

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पीठ ने कहा, अंतर धार्मिक विवाह मामले में केवल शादी के आधार पर एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती 
चीफ जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस बीरेन वैष्णव की डिवीजन पीठ ने कहा कि यह अंतरिम आदेश अनावश्यक उत्पीड़न से लोगों की रक्षा के दिया गया है। चीफ जस्टिस नाथ ने कहा कि हमारा मत है कि अगली सुनवाई तक, गुजरात धार्मिक स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम, 2021 की धारा 3, 4, 4ए से 4सी, 5 और 6 व 6ए के अमल पर रोक रहेगी, क्योंकि विवाह एक व्यक्ति द्वारा किया जाता है।
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विवाह अगर एक धर्म के व्यक्ति या लड़की द्वारा दूसरे धर्म की लड़की या पुरुष से बिना किसी बल या प्रलोभन से किया जाता है तो इसे गैरकानूनी धर्मांतरण उद्देश्य से किया गया विवाह नहीं कहा जा सकता है। 
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इन धाराओं पर रोक का मतलब है कि केवल अंतर धार्मिक विवाह के आधार पर किसी के खिलाफ एफआईआर अब दर्ज नहीं हो सकेगी। नए कानून के तहत राज्य में दूसरे धर्म में विवाह के लिए धर्मांतरण पर प्रतिबंध है और इसके तहत जुर्माने तथा सजा का प्रावधान है। इस नए कानून के खिलाफ पिछले महीने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के गुजरात चैप्टर ने एक याचिका दायर की थी और दावा किया था कि इस कानून के कुछ संशोधन असांविधानिक हैं।


साथ ही कहा कि संशोधित कानून में अस्पष्ट शर्तें हैं, जो विवाह के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हैं और संविधान के अनुच्छेद 25 में निहित धर्म के प्रचार, आस्था और अभ्यास के अधिकार के खिलाफ हैं। इस कानून को 15 जून को अधिसूचित किया गया था।

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