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गुजरात: 18 साल तक के हर बच्चे का बनेगा हेल्थ पासपोर्ट, जन्म से किशोरावस्था तक का रहेगा पूरा स्वास्थ्य रिकॉर्ड

Wed, 01 Jul 2026 10:09 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: राहुल कुमार Updated Wed, 01 Jul 2026 10:09 PM IST
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Gujarat: Health Passport to be created for every child up to 18 years of age
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल - फोटो : आईएएनएस

गुजरात सरकार ने बच्चों और किशोर-किशोरियों की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक व्यवस्थित और सुलभ बनाने के उद्देश्य से 'हेल्थ पासपोर्ट' की शुरुआत की है। स्कूल हेल्थ-राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (एसएच-आरबीएसके) के तहत राज्य में जन्म से 18 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे का हेल्थ पासपोर्ट तैयार किया जाएगा। इसमें बच्चे के जन्म से लेकर किशोरावस्था तक के स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड एक ही दस्तावेज में उपलब्ध होंगे। इस राज्यव्यापी कार्यक्रम की शुरुआत 27 जून 2026 को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की मौजूदगी में की।

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हर साल 1.89 करोड़ बच्चों का होगा स्वास्थ्य परीक्षण
सरकार के अनुसार,  एसएच-आरबीएसकेके तहत राज्य में हर वर्ष करीब 1.89 करोड़ बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण 992 मोबाइल हेल्थ टीमों द्वारा किया जाता है। अभी तक इन जांचों का रिकॉर्ड डिजिटल पोर्टल पर उपलब्ध रहता है, लेकिन अभिभावकों के पास ऐसा कोई दस्तावेज नहीं होता जिसे नियमित जांच, उपचार या फॉलो-अप के दौरान आसानी से उपयोग किया जा सके। हेल्थ पासपोर्ट इसी आवश्यकता को पूरा करेगा।
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स्क्रीनिंग स्थल पर ही मिलेगा हेल्थ पासपोर्ट
हेल्थ पासपोर्ट बनवाने के लिए अभिभावकों को कोई अतिरिक्त दस्तावेज जमा नहीं करना होगा। एसएच-आरबीएसके की मोबाइल हेल्थ टीमें आंगनवाड़ी, स्कूल, मदरसा, गुरुकुल और स्पेशल स्कूलों में बच्चों की स्वास्थ्य जांच करेंगी। स्क्रीनिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डेटा दर्ज होने के बाद बच्चों को वहीं हेल्थ पासपोर्ट उपलब्ध कराया जाएगा।
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पांच वर्ष तक के बच्चों और स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों के हेल्थ पासपोर्ट का नवीनीकरण हर वर्ष प्राथमिक स्वास्थ्य कें के मेडिकल ऑफिसर करेंगे। वहीं, स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों के हेल्थ पासपोर्ट का नवीनीकरण संबंधित स्कूल के प्राचार्य करेंगे।

जन्म से 18 साल तक का रहेगा पूरा स्वास्थ्य रिकॉर्ड
हेल्थ पासपोर्ट बच्चे की व्यक्तिगत मेडिकल हिस्ट्री का एक समेकित दस्तावेज होगा। इसमें बच्चे की सामान्य जानकारी के साथ जन्म से 18 वर्ष तक उम्रवार स्वास्थ्य परीक्षण का पूरा रिकॉर्ड दर्ज रहेगा।

इसके अलावा स्कूल हेल्थ-राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (एसएच-आरबीएसके) के तहत चिन्हित चार प्रमुख श्रेणियों (4डी) यानी जन्मजात दोष, बीमारियां, पोषण की कमी तथा विकास में देरी या दिव्यांगता से जुड़ी जानकारी भी इसमें शामिल होगी। पासपोर्ट में शारीरिक एवं मानसिक विकास, पोषण स्तर, रेफरल सेवाएं, स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी सुझाव, लाइफस्टाइल एडवाइस और इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर भी दर्ज रहेंगे।

डिजिटल पोर्टल से रहेगा पूरी तरह जुड़ा
हेल्थ पासपोर्ट की भौतिक प्रति अभिभावकों के पास रहेगी, जबकि इसे एसएच-आरबीएसके के डिजिटल पोर्टल से भी जोड़ा जाएगा। इससे रिकॉर्ड का प्रबंधन आसान होगा। यदि किसी कारणवश हेल्थ पासपोर्ट खो जाता है या क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो मोबाइल हेल्थ टीम के माध्यम से नया हेल्थ पासपोर्ट प्राप्त किया जा सकेगा।


राज्य सरकार के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य केवल बच्चों के मेडिकल रिकॉर्ड तैयार करना नहीं, बल्कि अभिभावकों को बच्चों के स्वास्थ्य प्रबंधन में सक्रिय भागीदार बनाना भी है, ताकि बच्चों, अभिभावकों और स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।

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