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PM Degree: मेट्रोपॉलिटन कोर्ट के समन के खिलाफ याचिका पर 10 दिनों में फैसला करे सत्र अदालत; हाईकोर्ट का निर्देश

Tue, 29 Aug 2023 07:21 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Tue, 29 Aug 2023 07:21 PM IST
सार

न्यायमूर्ति समीर दवे की अदालत ने कहा कि जिस न्यायाधीश के पास मामला स्थानांतरित किया जाएगा उन्हें मामले की सुनवाई की तारीख से 10 दिनों के भीतर उस पर फैसला करना होगा। गौरतलब है कि मेट्रोपोलिटन अदालत द्वारा जारी समन के खिलाफ दोनों नेताओं ने पुनरीक्षण आवेदन दाखिल किया था।  

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Gujarat HC tells session court to decide in 10 days Kejriwal pleas against summons by metropolitan court
गुजरात हाईकोर्ट - फोटो : social media

विस्तार

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षिक योग्यता को लेकर अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह की टिप्पणी मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने सत्र अदालत को कड़ा निर्देश दिया है। हाई कोर्ट ने अहमदाबाद के प्रधान सत्र न्यायाधीश से कहा है कि वह प्रधानमंत्री पर उनकी टिप्पणियों को लेकर आपराधिक मानहानि मामले में तलब करने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली आप नेता अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह की याचिकाओं को किसी अन्य न्यायाधीश के पास स्थानांतरित कर दे। 

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साथ ही न्यायमूर्ति समीर दवे की अदालत ने कहा कि जिस न्यायाधीश के पास मामला स्थानांतरित किया जाएगा उन्हें मामले की सुनवाई की तारीख से 10 दिनों के भीतर उस पर फैसला करना होगा। गौरतलब है कि मेट्रोपोलिटन अदालत द्वारा जारी समन के खिलाफ दोनों नेताओं ने पुनरीक्षण आवेदन दाखिल किया था।  
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मंगलवार को इस मामले में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति समीर दवे ने ये निर्देश तब दिए जब उन्हें बताया गया कि मामले की सुनवाई कर रहे प्रभारी न्यायाधीश छुट्टी पर हैं और उन्होंने इसे 16 सितंबर के लिए टाल दिया है। बावजूद इसके कि मेट्रोपोलिटन अदालत में 31 अगस्त को मामले की सुनवाई होनी है। इसके बाद हाईकोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) नेताओं की याचिका का निपटारा कर दिया।
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 मामले में शिकायतकर्ता गुजरात विश्वविद्यालय की ओर से पेश वकील नानावती ने कहा कि कोई भी उन्हें आवेदन (स्थगन के लिए) प्रस्तुत करने से नहीं रोक सकता है। विद्वान मजिस्ट्रेट उस आवेदन पर विचार कर सकते हैं। इस बीच, पुनरीक्षण आवेदन को अंतिम सुनवाई के लिए तय किया जा सकता है। हमें कोई आपत्ति नहीं हो सकती है। 

मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रधान सत्र न्यायाधीश, सिटी सिविल कोर्ट अहमदाबाद को अदालत संख्या 16 के मामले को किसी अन्य अदालत में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया जाता है। और संबंधित पीठासीन अधिकारी मामले के अपने कार्यभार से दस दिनों की अवधि के भीतर आपराधिक पुनरीक्षण आवेदन पर फैसला करेगा। अदालत ने यह भी कहा कि यदि मूल आरोपी द्वारा कोई आवेदन किया जाएगा, तो मूल शिकायतकर्ता आपराधिक मामले के स्थगन के लिए कोई आपत्ति नहीं देगा।

गौरतलब है कि गुजरात उच्च न्यायालय ने 11 अगस्त को केजरीवाल और संजय सिंह की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ आपराधिक मानहानि की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की थी। गुजरात की एक मेट्रोपॉलिटन अदालत ने पहले पीएम मोदी की डिग्री के संबंध में उनके "व्यंग्यात्मक" और "अपमानजनक" बयानों पर मानहानि मामले में केजरीवाल और सिंह को तलब किया था। मामले को 31 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। बाद में आप के दोनों नेताओं ने मामले में मेट्रोपॉलिटन अदालत के समन को चुनौती देते हुए सत्र अदालत में एक पुनरीक्षण आवेदन दायर किया।

हालांकि, सत्र अदालत ने सात अगस्त को मुकदमे पर अंतरिम रोक लगाने की उनकी याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद उन्होंने गुजरात उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। सत्र अदालत में रिवीजन अर्जी पर अब 16 सितंबर को सुनवाई होगी। केवल केजरीवाल ने 11 अगस्त के उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का रुख भी किया है। 


31 मार्च को, गुजरात उच्च न्यायालय ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के 2016 के आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें गुजरात विश्वविद्यालय को केजरीवाल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री के बारे में जानकारी प्रदान करने का निर्देश दिया गया था। गुजरात उच्च न्यायालय ने कहा था कि आप प्रमुख की आरटीआई याचिका को देखने से यह "सुखद सार्वजनिक हित विचारों" पर आधारित होने के बजाय "राजनीतिक रूप से परेशान करने वाली और प्रेरित" प्रतीत होती है।
 

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