फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Gujarat ›   Gujarat Election 2022: arvind kejriwal chants jai shri ram in gujarat, is he trapped by bjp

Gujarat Election 2022: क्या इस बार भाजपा के जाल में फंस गए केजरीवाल? क्यों लगाने पड़ रहे जय श्री राम के नारे

Tue, 11 Oct 2022 11:14 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Tue, 11 Oct 2022 11:14 PM IST
विज्ञापन
सार
Gujarat Election 2022: वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक सुनील पांडेय ने कहा कि गुजरात के मामले में केजरीवाल बैक फुट पर दिखाई पड़ रहे हैं। राजेंद्र पाल गौतम से इस्तीफ़ा लेना भी यही साबित करता है कि उन्हें इस नुकसान का अंदाजा है...
loader
Gujarat Election 2022: arvind kejriwal chants jai shri ram in gujarat, is he trapped by bjp
Gujarat Election 2022- Arvind Kejriwal - फोटो : Agency

विस्तार

अरविंद केजरीवाल का दावा रहा है कि वे जाति-धर्म की राजनीति नहीं करते हैं। वे बेहतर स्कूल और अच्छी स्वास्थ्य सुविधायें देने की राजनीति करते हैं। हर चुनावी राज्य में वे यही दावा दोहराते देखे गए हैं और गुजरात में भी उन्होंने इसी तीर के सहारे भाजपा को चुनौती देने की कोशिश की है। लेकिन चुनावों से ठीक दो महीने पहले केजरीवाल रंग बदलते हुए दिखाई पड़ रहे हैं। गुजरात में वे अब भाजपा नेताओं से ज्यादा जोर से ‘जय श्री राम’, ‘जय श्री कृष्ण’ के नारे लगाते हुए देखे जा रहे हैं। धार्मिक रंग की यह चुनावी पिच भाजपा के लिए ज्यादा अनुकूल है। क्या ऐसे में वे भाजपा को मजबूत चुनौती देने में कामयाब हो सकेंगे? केजरीवाल की रणनीति में यह बदलाव क्यों आया?

दरअसल, अरविंद केजरीवाल सरकार के एक कैबिनेट मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने पांच अक्तूबर को दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हिंदू देवी-दवताओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां कर दीं। भाजपा ने इस मुद्दे को लपक लिया और उसने अरविंद केजरीवाल को ‘हिंदू विरोधी’ करार देना शुरू कर दिया। गुजरात के हर गली-चौराहे पर अरविंद केजरीवाल की तस्वीरें लगाकर उसने दिल्ली की घटना का जिक्र किया और यह बताने की कोशिश की कि केजरीवाल और उनके कार्यकर्ताओं का हिंदू विरोधी रुख है। 11 अक्तूबर को भी भाजपा नेताओं ने अरविंद केजरीवाल के एक पुराने वीडियो को वायरल कराने की कोशिश की है। इसमें वे दिल्ली के बाटला हाउस एनकाउंटर के बाद कथित तौर पर मुस्लिम समुदाय के आतंकियों को बचाने और हिंदू समुदाय के लोगों पर कुछ आपत्तिजनक टिप्पणी करते दिख रहे हैं। इसी क्रम में आम आदमी पार्टी की गुजरात इकाई के अध्यक्ष के एक बयान को भी बार-बार उछाला जा रहा है। सोशल मीडिया में वायरल एक विडियो में वे कथित तौर पर हिंदू महिलाओं को मंदिरों में जाने से रोकने की अपील करते हुए दिखाई पड़ रहे हैं। भाजपा नेता यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि केजरीवाल और उनके साथी लंबे समय से हिंदू विरोधी रुख अपनाते रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इससे जुड़े मुद्दे ट्रेंड कराए जा रहे हैं।    

अर्बन नक्सल की एंट्री! 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को एक रैली में ‘अर्बन नक्सल’ लोगों को गुजरात से दूर रखने की सलाह दी है। उन्होंने बताने की कोशिश की कि आदिवासी इलाकों के युवकों को नक्सलियों द्वारा भटकाकर गलत रास्ते पर धकेला गया। इस हमले में पीएम ने किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया, लेकिन माना जा रहा है कि उनके निशाने पर अरविंद केजरीवाल ही थे। वे 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान भी रामलीला मैदान से उन्हें ‘अर्बन नक्सल’ करार दे चुके हैं।

डैमेज कंट्रोल में लिया इस्तीफ़ा

जनता की नब्ज के बेहतर पारखी अरविंद केजरीवाल को यह भांपते देर नहीं लगी कि मूलरूप से व्यापारिक, लेकिन धार्मिक सोच के गुजरात के मतदाताओं के बीच यह बात बैक फायर कर सकती है और इससे उनकी पार्टी की चुनावी संभावनाओं को चोट लग सकती है। यही कारण है कि वरिष्ठ पार्टी नेताओं की सलाह पर केजरीवाल ने अपने मंत्री राजेंद्र पाल गौतम का इस्तीफ़ा मांग लिया। मीडिया में यह बात खूब प्रचारित भी की गई कि मंत्री के इस बयान से वे बहुत नाराज हैं। गौतम ने अपने इस्तीफे में भी यही संकेत दिया कि उनके कारण पार्टी और केजरीवाल को नुकसान न हो, इसी कारण वे इस्तीफ़ा दे रहे हैं। इसी प्रयास को एक कदम आगे बढ़ाते हुए अरविंद केजरीवाल ने गुजरात की एक रैली में जोरशोर से ‘जय श्री राम, जय श्री कृष्ण’ का जयकारा लगाया। उन्होंने लोगों से कहा कि उनका जन्म जन्माष्टमी को हुआ है और वे लोगों के साथ मिलकर विनाशकारी शक्तियों का नाश करेंगे। इस तरह उन्होंने गुजरात की धर्मपरायण जनता को अपने साथ जोड़ने की कोशिश की। पर क्या उनकी ये कोशिश गौतम के द्वारा किए गए नुकसान की भरपाई कर सकेगी?

क्या होगी भरपाई?

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक सुनील पांडेय ने अमर उजाला से कहा कि भाजपा की लाख कोशिशों के बाद भी वह अब तक अरविंद केजरीवाल को एंटी हिंदू करार नहीं दे पाई। भाजपा ने इसके पहले भी उन्हें एंटी हनुमान के रूप में स्थापित करने की कोशिश की, लेकिन आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में जगह-जगह सुंदरकांड का पाठ कर भाजपा के इस दावे को हवा कर दिया। केजरीवाल सरकार के द्वारा होली-दीवाली को बेहतर ढंग से मनाना और इसका मीडिया में खूब प्रचार करना और हिंदू श्रद्धालुओं को अयोध्या और अन्य धार्मिक स्थलों की यात्रा कराने जैसे उनके कार्यों ने उन्हें कभी एंटी हिंदू के रूप में स्थापित नहीं होने दिया। जबकि राहुल गांधी यही काम बखूबी नहीं कर पाए, जिसका उन्हें नुकसान उठाना पड़ा। सुनील पांडेय ने कहा कि लेकिन गुजरात के मामले में केजरीवाल बैक फुट पर दिखाई पड़ रहे हैं। राजेंद्र पाल गौतम से इस्तीफ़ा लेना भी यही साबित करता है कि उन्हें इस नुकसान का अंदाजा है। गुजरात की धार्मिक जनता के बीच भाजपा यदि उन्हें हिंदू विरोधी के रूप में प्रचारित करने में सफल रहती है तो इससे केजरीवाल की उम्मीदों को बड़ा झटका लग सकता है।

हिंदू धार्मिक भावनाओं का खेल भाजपा की कोर चुनावी पिच है। वह इस ट्रैक पर ज्यादा बेहतर और आक्रामक खेल खेलती है। अयोध्या में राम मंदिर, काशी में विश्वनाथ मंदिर और उज्जैन में महाकाल के मंदिरों के निर्माण में अहम भूमिका निभाकर उसने हिंदू जनमानस के बीच अपनी बेहद मजबूत छवि बनाई है। यदि केजरीवाल इस पिच पर खेलने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें इसका नुकसान हो सकता है क्योंकि हिंदू वोटरों के ज्यादा बड़े दावेदार के रूप में भाजपा पहले ही वहां मौजूद है।

केजरीवाल चलें यह ट्रंप कार्ड

राजनितिक विश्लेषकों के मुताबिक़, केजरीवाल ने स्कूल-स्वास्थ्य सेवाओं के बल पर भाजपा को घेरने में अच्छी सफलता हासिल की थी। उनके दबाव का ही परिणाम हुआ कि अमित शाह जैसे नेताओं को चंद सकूलों के लोकार्पण कार्यक्रम के लिए गुजरात जाना पड़ा और इसका बखूबी प्रचार कर दिखाना पड़ा। यह मुद्दा अभी भी गुजरात के लोगों को सोचने पर मजबूर कर सकता है। यदि केजरीवाल अपने इस मूल विषय को पकड़ते हैं तो उन्हें ज्यादा लाभ हो सकता है।      

केजरीवाल की खुली पोल

भाजपा नेता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि कोई व्यक्ति अपना मूल स्वभाव ज्यादा लंबे समय तक छिपा कर नहीं रख सकता। देर-सबेर उसकी असलियत सामने आ ही जाती है। यही बात केजरीवाल के साथ लागू होती है, वे अपने आंदोलन के दिनों से ही हिंदू विरोधी रुख अपनाने और एक वर्ग विशेष के तुष्टिकरण के लिए जाने जाते रहे हैं। उनके साथी नेता मनीष सिसोदिया, अमानतुल्लाह खान और आतिशी मार्लेना भी बार-बार हिंदुओं के विरुद्ध टिप्पणी करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी का हिंदू विरोधी चेहरा दिल्ली दंगों और हनुमान शोभा यात्राओं पर जहांगीरपुरी में हुए पथराव के दौरान भी बार-बार सामने आया है। यही कारण है कि उनकी कलई खुल गयी है और जनता को अब उन पर विश्वास नहीं रहा। भाजपा नेता ने कहा कि हिंदू जनसमुदाय उनके मंत्री के द्वारा किये गये अपराध को माफ़ करने के लिए तैयार नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed