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Gujarat: कोर्ट ने पूर्व DGP श्रीकुमार की याचिका खारिज की, गोधरा के बाद हुए दंगे के झूठे सबूत से जुड़ा है मामला

Tue, 20 Jun 2023 08:44 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, अहमदाबाद।
पीटीआई, अहमदाबाद। Published by: देव कश्यप Updated Tue, 20 Jun 2023 08:44 PM IST
सार

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एआर पटेल की अदालत ने सोमवार को अपने आदेश में कहा, कोर्ट का मानना है कि प्रथम दृष्टया में आरोपी पर अभियोग लगाने (Indict) के लिए पर्याप्त सबूत हैं और अभियोजन पक्ष (Prosecution) को उनके खिलाफ सबूत पेश करने का अवसर दिया जाना चाहिए।

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Gujarat court rejects discharge plea of ex-DGP Sreekumar in 2002 post Godhra riots evidence fabrication case
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

अहमदाबाद की एक सत्र अदालत ने पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) आरबी श्रीकुमार की आरोपमुक्त करने की याचिका खारिज कर दी। श्रीकुमार पर 2002 के गोधरा कांड के बाद हुए दंगों के संबंध में "निर्दोष लोगों" को फंसाने और गुजरात को बदनाम करने के लिए मनगढ़ंत सबूतों का इस्तेमाल करने का आरोप है।

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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एआर पटेल की अदालत ने सोमवार को अपने आदेश में कहा कि कोर्ट का मानना है कि प्रथम दृष्टया आरोपी पर अभियोग चलाने (Indict) के लिए पर्याप्त सबूत हैं और अभियोजन पक्ष (Prosecution) को उनके खिलाफ सबूत पेश करने का अवसर दिया जाना चाहिए।
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अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि आरोपी तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य के खिलाफ आठ जून, 2006 को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या) और 120 (बी) (षड्यंत्र) जैसी धाराओं के तहत मारे गए कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी की पत्नी जकिया जाफरी द्वारा दायर शिकायत तैयार करने में शामिल थे।
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श्रीकुमार ने कथित तौर पर अन्य लोगों के साथ साजिश रची और इस उद्देश्य के लिए विभिन्न राज्यों में उनसे मुलाकात की। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सबूत के तौर पर पेश की गई एक ऑडियो क्लिप को फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) ने साबित कर दिया है कि यह आरोपी का है। इस तथ्य को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि आरोपी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं।

श्रीकुमार के साथ-साथ सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ (Teesta Setalvad) और पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट मामले में आरोपी हैं। अभियोजन पक्ष के अनुसार, उन्होंने गोधरा कांड के बाद के दंगों के मामलों में निर्दोष लोगों को मौत की सजा दिलाने के लिए झूठे सबूत गढ़ने की आपराधिक साजिश रची थी। 1971 बैच के आईपीएस अधिकारी और पूर्व डीजीपी (इंटेलिजेंस) श्रीकुमार 2002 के गोधरा कांड के दौरान सशस्त्र इकाई के अतिरिक्त डीजीपी प्रभारी थे। उन्होंने आरोपमुक्त याचिका दायर करते हुए दावा किया था कि उनके खिलाफ कोई मामला नहीं बनता है।

अहमदाबाद शहर पुलिस की अपराध शाखा ने जून 2022 में तीनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था और मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था। चार्जशीट पिछले साल 21 सितंबर को दाखिल की गई थी। जून 2022 में गिरफ्तार किए गए मुंबई के तीस्ता सीतलवाड और श्रीकुमार वर्तमान में अंतरिम जमानत पर बाहर हैं, जबकि संजीव भट्ट हिरासत में मौत के मामले में गुजरात के बनासकांठा जिले के पालनपुर की एक जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं।


गोधरा के बाद हुए सांप्रदायिक दंगों से संबंधित मामलों में तत्कालीन एसआईटी द्वारा गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य को दी गई क्लीन चिट को चुनौती देने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल खारिज कर दिया था, जिसके बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।

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