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GST: जनवरी के पहले कर ले शादी की शॉपिंग, नहीं तो देना होगा ज्यादा जीएसटी, 1 लाख रु के बिल पर लगेगा इतना टैक्स
Tue, 24 Dec 2024 05:56 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Tue, 24 Dec 2024 05:56 PM IST
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जीएसटी
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अमर उजाला
विस्तार
जीएसटी काउंसिल की शनिवार को हुई बैठक में रेडीमेड गारमेंट सेक्टर को तगड़ा झटका लगा है। सरकार टैक्स के दो स्लैब में टैक्स बढ़ाकर 3 स्लैब कर दिया है। फिलहाल एक हजार तक के सिंगल रेडीमेड पीस खरीदने पर 5 प्रतिशत टैक्स लगता है। जबकि एक हजार से ऊपर के कपड़ों की खरीदारी पर 12 प्रतिशत टैक्स देना होता था। लेकिन अब सरकार ने इन पर टैक्स में बढ़ोतरी कर दी है। इसका सीधा असर शादियों के सीजन पर दिखाई दे सकता है। जो लोग शादी के लिए कपड़ों की खरीदारी कर रहे है उन्हें अब ज्यादा रुपए खर्च करने पड़ेंगे।दरअसल, अब 1500 रुपए तक के रेडीमेड कपड़ों पर 5 प्रतिशत, 1500 से 10 हजार तक कपड़ों पर 18 प्रतिशत और 10 हजार के ऊपर के कपड़ों पर 28 प्रतिशत टैक्स देना होगा। इसमें 28 प्रतिशत की कैटेगरी नई है। इसका पहले सीधा असर शादी के सीजन पर दिखाई देगा। अगर कोई दूल्हा या दुल्हन 10 हजार से ज्यादा का सिंगल पीस खरीदता है और बिल 1 लाख रुपए तक होता है तो इस पर टैक्स 12 हजार से बढ़कर अब 28 हजार तक हो जाएगा। 15 जनवरी को मलमास खत्म हो रहा है। ऐसे में जब तक नया नोटिफिकेशन भी आ जाएगा। जिससे नए साल में जो शादी की खरीदारी करने की सोच रहे है उन्हें कपड़ों की खरीदारी महंगी पड़ सकती है।
इस मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी शनिवार को केंद्र सरकार की टैक्स नीति को लेकर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि था कि जीएसटी से लगातार बढ़ती वसूली के बीच सरकार एक नया टैक्स स्लैब पेश करने जा रही है। जनता की जरूरत की चीजों पर जीएसटी बढ़ाने की योजना है। पूंजीपतियों को छूट दी जा रही है, जबकि आम लोगों को लूटा जा रहा है। अभी शादियों का सीजन चल रहा है। लोग कब से पाई-पाई जोड़कर पैसे इकट्ठा कर रहे होंगे, लेकिन सरकार 1500 रुपए से ऊपर के कपड़ों पर जीएसटी 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत करने जा रही है। यह घोर अन्याय है। राहुल ने जीएसटी को गब्बर सिंह टैक्स बताया है। उन्होंने कहा कि अरबपतियों के कर्ज को माफ करने के लिए गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की मेहनत की कमाई को लूटा जा रहा है। हमारी लड़ाई इसी अन्याय के खिलाफ है। टैक्स की मार के खिलाफ हम मजबूती से आवाज उठाएंगे और इस लूट को रोकने के लिए सरकार पर दबाव बनाएंगे।
इस तरह से तैयार होगा बिल
रेडीमेड के कारोबारियों का कहना है कि, अगर कोई 1500 रुपए तक का रेडीमेड कपड़ा खरीदते है तो 5 प्रतिशत टैक्स देना होता है। उदाहरण के लिए एक पैंट अगर 1000 हजार रुपए का है तो 5 प्रतिशत की दर से 50 रुपए जीएसटी देना होता है। 10 हजार रुपए से ज्यादा की खरीदारी करें और मान ले एक कपड़ा 10 हजार का खरीदते है तो सिंगल पीस पर 1800 रुपए का टैक्स देना होगा। अगर 1 लाख से ऊपर का लहंगा खरीदते है तो 28 हजार रुपए तक टैक्स देना होगा।
बच्चों की स्कूल की ड्रेस भी महंगी होगी!
कपड़े से जुड़े व्यापारी इसका विरोध भी कर रहे है। व्यापारी कहते है कि आमतौर पर मध्यवर्गीय वर्ग का एक व्यक्ति एक जोड़ा कपड़ा दो हजार रुपए का खरीदता है। यानी इसमें एक पैंट या शर्ट दोनों 2000 रुपए के अंदर के होते है। इसलिए 5 पांच प्रतिशत टैक्स 1500 रुपए पर नहीं बल्कि दो हजार पर होना चाहिए। लेकिन सरकार मध्यमवर्गीय परिवार पर टैक्स का भार छह प्रतिशत तक बढ़ गया है। जो चीजें पहले 12 प्रतिशत में थी वह अब 18 प्रतिशत पर पहुंच गई है। ऐसे में बच्चों के की स्कूल ड्रेस लेकर बड़ों के भी कपड़े महंगे होंगे।
2017 में लागू हुआ था जीएसटी
सरकार ने 1 जुलाई 2017 को देशभर में जीएसटी लागू किया था। इसके बाद केंद्र और राज्य सरकारों के 17 करों और 13 उपकरों को हटा दिया गया था। जीएसटी एक इनडायरेक्ट टैक्स है। इसे वैराइटी ऑफ प्रीवियस इनडायरेक्ट टैक्स, सर्विस टैक्स, परचेज टैक्स, एक्साइज ड्यूटी और कई इनडायरेक्ट टैक्स को रिप्लेस करने के लिए 2017 में लागू किया गया था। जीएसटी में 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत के चार स्लैब हैं।
सरकार ने नवंबर में जीएसटी से ₹1.82 लाख करोड़ जुटाए सरकार ने नवंबर 2024 में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स, यानी जीएसटी से 1.82 लाख करोड़ रुपए जुटाए हैं। सालाना आधार पर इसमें 8.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। एक साल पहले यानी नवंबर 2023 में सरकार ने 1.68 लाख करोड़ रुपए जीएसटी कलेक्ट किया था। वहीं, इस वित्त वर्ष यानी 2024-25 में अब तक 14.56 लाख करोड़ रुपए जीएसटी से आए हैं।