नेताजी की गोपनीय फाइलों में कई ऐसे दस्तावेज जिनका नेताजी से कोई संबंध नहीं
- फाइल संख्या 142 में चीन के भारत विरोधी बयान को भी मिली है जगह
- शिक्षा विभाग से संबंधित एक विज्ञप्ति को चार बार किया गया है शामिल
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नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी गोपनीय फाइलों को उजागर करने की जल्दबाजी में इन फाइलों में कई ऐसे दस्तावेज भी शामिल कर लिए गए हैं जिनका नेताजी से कोई संबंध नहीं है। इतना ही नहीं हड़बड़ी में चीन के भारत विरोधी बयान को भी इन फाइलों में शामिल कर लिया गया जिसमें भारत को विस्तारवादी मानसिकता वाला देश बताया गया है।
शिक्षा विभाग की एक विज्ञप्ति को फाइल में चार-चार बार स्थान मिला है। इसमें कहा गया है कि चौथी योजना में सामान्य और शिल्पिक शिक्षा के विकास के लिए अभी से कार्रवाई की जा रही है। तीसरी योजना की शेष अवधि में सामान्य शिक्षा के विकास में नौ करोड़ और शिल्पिक शिक्षा और दस्तकारी के प्रशिक्षण के लिए दो-तीन करोड़ रुपये अतिरिक्त दिए गए हैं।
नेताजी से जुड़े गोपनीय फाइलों की दूसरी किस्त को पर्यटन और संस्कृति राज्य मंत्री डॉ महेश शर्मा ने मंगलवार को जारी किया। इसमें 50 फाइलें हैं। इसमें दस फाइल प्रधानमंत्री कार्यालय, दस गृह मंत्रालय और तीस विदेश मंत्रालय से जुड़ी हैं। इसी क्रम में अंतिम पेज 15 पर फाइल संख्या 142 को शामिल किया गया है। इसका शीर्षक है- नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु से जुड़ा विवाद।
इस फाइल में चीन सरकार द्वारा 16 अक्टूबर 1964 को जारी बयान के कई पेज शामिल हैं। इसमें कहा गया है कि कच्छ के रण क्षेत्र की सीमा को कभी परिसीमित नहीं किया गया। इस पर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद है। भारत और पाकिस्तान के बीच इस पर 11 जनवरी 1960 को समझौता हुआ था लेकिन बाद में भारत ने अपनी सेना भेज दी।
फाइल के दस्तावेज में चीन की आपत्तिजनक बातें
चीन के बयान में आपत्तिजनक बातें हैं जिसमें भारत की नीति को विस्तारवादी बताया गया है। फाइल में शामिल दस्तावेज के अनुसार भारत की नीति है कि - मेरा इलाका मेरा है, जो तुम्हारा है वह भी मेरा है, जिस पर कब्जा है वह मेरा है, जो कब्जा करना चाहते हैं वह भी मेरा है।
दस्तावेज के दूसरे पृष्ठ में भारत पर आरोप लगाया गया है कि भारत ने पाकिस्तान को उकसाया है। तनाव बढ़ाने के लिए ऐसा किया गया है। चीन इसकी निंदा करता है। बयान में भारत को सलाह दी गई है कि वह शांतिपूर्ण वार्ता के जरिए समस्या का समाधान निकाले।
चीन सीमा के बारे में चीन सरकार के बयान में कहा गया है कि अमेरिका से भारत के प्रतिक्रियावादी ताकतों को धन और हथियार मिलते हैं। एशिया की शांति को प्रभावित करने के लिए अमेरिका ही भारत का इस्तेमाल कर रहा है। बयान में पाकिस्तान का कई बार समर्थन किया गया है।