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Food Stock: सरकार ने कहा- देश में पर्याप्त खाद्यान्न भंडार, नियंत्रण में हैं गेहूं-आटा और चावल की कीमतें

Sun, 02 Oct 2022 11:11 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 02 Oct 2022 11:11 PM IST
सार

उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने कहा कि सरकार नियमित रूप से आवश्यक वस्तुओं कीमतों की निगरानी कर रही है और जब भी आवश्यक हो, सुधारात्मक उपाय भी कर रही है।

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Govt said sufficient food grains stock in country prices of wheat flour and rice are under control
wheat flour - फोटो : iStock

विस्तार

रूस और यूक्रेन के बीच 24 फरवरी को शुरू हुआ युद्ध अब भी थमा नहीं है। ये दोनों देश बड़ी मात्रा में गेहूं समेत जरूरी खाद्यान्न को दुनियाभर को निर्यात करते हैं। युद्ध लंबा चलने के कारण दुनिया के सामने खाद्यान्न की चुनौती खड़ी हो गई है। इस बीच बीच रविवार को केंद्र सरकार ने लोगों की आशंकाओं को दूर करते हुए कहा कि देश में पर्याप्त खाद्यान्न भंडार उपलब्ध है और गेहूं, आटा व चावल की कीमतें नियंत्रण में हैं। 

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रिपोर्ट के मुताबिक, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने कहा कि सरकार नियमित रूप से आवश्यक वस्तुओं कीमतों की निगरानी कर रही है और जब भी आवश्यक हो, सुधारात्मक उपाय भी कर रही है। मंत्रालय ने कहा कि युद्ध और महामारी के समय भी भारत ने पड़ोसी श्रीलंका, अफगानिस्तान, म्यांमार, यमन और कई अन्य देशों को खाद्यान्न की आपूर्ति की है। 
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मंत्रालय ने कहा कि सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को तीन महीने के लिए दिसंबर 2022 तक बढ़ा दिया है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि त्योहारों के मौसम में गरीबों और जरूरतमंदों को किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
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सरकार ने कहा, गेहूं और चावल की खुदरा व थोक कीमों कमी दर्ज हुई है और बीते सप्ताह आटे की कीमतें स्थिर रही हैं। कीमतों में और बढ़ोत्तरी से बचने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। गेहूं और चावल के मामले में निर्यात के लिए नए नियम लागू किए गए हैं। 


उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने आगे कहा कि बीते दो-तीन वर्षों के दौरान एमएसपी में वृद्धि के अनुरूप गेहूं और चावल की कीमतें कमोबेश बढ़ी हैं। 2021-22 के वित्त वर्ष में कीमतें तुलनात्मक रूप से इसलिए कम थीं क्योंकि कीमतों को नियंत्रित करने के लिए खुले बाजार बिक्री योजना के जरिए करीब 80 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न खुले बाजार में उतार दिया गया था। 

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