Turmeric Board: तेलंगाना में खुला हल्दी बोर्ड मुख्यालय; अमित शाह बोले- भारत से एक अरब USD के निर्यात का लक्ष्य
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तेलंगाना के निजामाबाद में हल्दी बोर्ड के राष्ट्रीय मुख्यालय का उद्घाटन किया। उन्होंने घोषणा की कि भारत सरकार ने हल्दी का निर्यात एक अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। यह कदम हल्दी किसानों की आय बढ़ाने और वैश्विक बाजार में भारत की पकड़ मजबूत करने के लिए उठाया गया है।
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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रविवा को निजामाबाद में हल्दी बोर्ड के राष्ट्रीय मुख्यालय का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने 2030 तक हल्दी का निर्यात एक अरब डॉलर तक करने का लक्ष्य रखा है। बोर्ड हल्दी की पैकिंग, ब्रांडिंग, विपणन व निर्यात पर ध्यान केंद्रित करेगा। शाह ने कहा, हल्दी बोर्ड किसानों के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने, उनकी उपज के निर्यात के अलावा अनुसंधान व विकास की दिशा में काम करेगा।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हल्दी-केंद्रित बोर्ड के गठन की घोषणा के लगभग 21 महीने बाद इसका उद्घाटन किया गया। किसानों की ओर से हल्दी बोर्ड की मांग लंबे समय से की जा रही थी। हमने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में एक अरब डॉलर के निर्यात के लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। जो (हल्दी) बोर्ड बनेगा, वह यह सुनिश्चित करने के लिए काम करेगा कि हल्दी का उच्चतम मूल्य किसानों तक पहुंचे। शाह ने कहा कि 2023 के विधानसभा चुनावों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेलंगाना में हल्दी बोर्ड स्थापित करने का वादा किया था और बाद में इस संबंध में आदेश जारी किए गए। इससे पूर्व केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी किशन रेड्डी व अन्य नेताओं ने हैदराबाद के बेगमपेट हवाईअड्डे पर शाह की अगवानी की। भाजपा की तेलंगाना इकाई ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने हल्दी बोर्ड की स्थापना की घोषणा की थी और अब उन्होंने किसानों से किए गए वादे के अनुसार यह सपना पूरा किया है।
हल्दी की गुणवत्ता सुधारने, शोध के लिए मोदी सरकार ने 200 करोड़ आवंटित किए
पीएम मोदी ने हल्दी की फसल की गुणवत्ता सुधारने, शोध करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए 200 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। निजामाबाद में हल्दी किसानों की एक प्रमुख मांग हल्दी बोर्ड की स्थापना रही है और यह एक प्रमुख चुनावी मुद्दा भी था। निजामाबाद से भाजपा के लोकसभा सदस्य डी अरविंद, जिन्होंने हल्दी बोर्ड स्थापित करने का वादा किया था, ने 2019 के लोकसभा चुनावों में बीआरएस एमएलसी और तत्कालीन सीएम के चंद्रशेखर राव की बेटी के कविता को हराया था। वे 2024 में फिर से चुने गए।
भारत दुनिया में हल्दी का सबसे बड़ा निर्यातक
भारत दुनिया में हल्दी का सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता और निर्यातक है। भारत का विश्व व्यापार में 62 फीसदी से अधिक हिस्सा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2023-24 के दौरान 1.62 लाख टन हल्दी और हल्दी उत्पादों का निर्यात किया गया, जिसकी कीमत 22.65 करोड़ अमेरिकी डॉलर थी। भारत में हल्दी की 30 से ज़्यादा किस्में उगाई जाती हैं और इसे देश के 20 से ज़्यादा राज्यों में उगाया जाता है। हल्दी के सबसे बड़े उत्पादक राज्य महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु हैं।
- गुणकारी हल्दी से दमकेगा भविष्य : शाह ने हल्दी के स्वास्थ्य लाभों के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा, हर कोई जानता है कि हल्दी कितनी गुणकारी है। यह एंटी-वायरल, एंटी-कैंसर व एंटी-इंफ्लेमेटरी है।
- शाह ने कहा, भारत में उच्च करक्यूसिम स्तर वाली हल्दी पाई जाती है जो अन्यत्र नहीं मिलती। हमने जैविक हल्दी को बढ़ावा देना भी शुरू कर दिया है। हल्दी के गुणों से देश का भविष्य दमकेगा।
माओवादियों से बातचीत नहीं...हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटें
गृह मंत्री अमित शाह ने माओवादियों से किसी भी तरह की बातचीत की संभावना से इन्कार किया। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधित संगठन के कार्यकर्ताओं को हथियार छोड़ देना चाहिए। पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर देना चाहिए और मुख्यधारा में शामिल हो जाना चाहिए। तेलंगाना के निजामाबाद में हल्दी बोर्ड के राष्ट्रीय मुख्यालय का उद्घाटन करने के बाद एक रैली को संबोधित करते हुए शाह ने यह भी कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी, जो अभी भी ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें ऑपरेशन की प्रभावशीलता को समझने के लिए पाकिस्तान की कमजोर छवि को देखना चाहिए। शाह ने कहा, कांग्रेस (केंद्र) से इन लोगों (माओवादियों) से बातचीत करने को कहती है। हमारी सरकार की नीति है कि हथियार रखने वालों से बात न करें। हथियार छोड़ो, आत्मसमर्पण करो और मुख्यधारा में शामिल हो जाओ। शाह ने कहा कि पूर्वोत्तर में करीब 10,000 लोगों ने हथियार छोड़ दिए और समाज की मुख्यधारा में शामिल हो गए। उन्होंने ताल्लुका स्तर से लेकर राज्य विधानसभाओं तक के पदों के लिए चुनाव भी लड़ा। इसी तरह, पिछले डेढ़ साल में 2,000 से अधिक माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है।
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