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MHA: केंद्र सरकार ने एनएससीएन-के पर प्रतिबंध 5 साल के लिए बढ़ाया, भारत विरोधी गतिविधियों में संलिप्त है ये संग

Mon, 22 Sep 2025 04:35 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Mon, 22 Sep 2025 04:35 PM IST
सार

केंद्र ने सोमवार को नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड-खापलांग (एनएससीएन-के) और उसके सभी गुटों, शाखाओं और प्रमुख संगठनों पर लगाए गए प्रतिबंध को 5 साल के लिए और बढ़ाने का फैसला किया। गृह मंत्रालय की एक अधिसूचना में कहा गया है कि यह प्रतिबंध 28 सितंबर से 5 साल की अवधि के लिए प्रभावी होगा।

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Govt extends ban imposed on National Socialist Council of Nagaland K along with all its factions for 5 years
केंद्रीय गृह मंत्रालय - फोटो : ANI

विस्तार

केंद्र सरकार ने उग्रवादी संगठन नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड-खापलांग (एनएससीएन-के) और उसके सभी गुटों, शाखाओं और अग्रिम संगठनों पर लगे प्रतिबंध को और पांच साल के लिए बढ़ा दिया। यह कदम इन संगठनों और गुटों के भारत की संप्रभुता और अखंडता को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों में संलिप्तता के चलते उठाया गया है।

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गृह मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया कि प्रतिबंध 28 सितंबर से पांच साल की अवधि के लिए प्रभावी होगा। केंद्र सरकार का मानना है कि एनएससीएन-के भारत की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ गतिविधियों में शामिल रहा है। इसकी साजिश भारतीय संघ से अलग होकर इंडो-म्यांमार क्षेत्र के नगा बहुल इलाकों को मिलाकर एक स्वतंत्र नगालैंड बनाने की है और इसके लिए इसने यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (स्वतंत्र) यानी उल्फा (आई), पीपुल्स रिवोल्यूशनरी पार्टी ऑफ कंगलेईपाक (प्रेपाक) और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) जैसे अन्य गैरकानूनी संगठनों से संबंध स्थापित किए हैं।
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भारत विरोधी ताकतों से हासिल कर रहा हथियार और अन्य मदद
अधिसूचना में कहा गया कि यह संगठन लोगों को अगवा कर फिरौती मांगने, व्यापारियों, सरकारी अधिकारियों और आम नागरिकों से जबरन पैसे वसूलने, अवैध हथियार और गोला-बारूद रखने और दूसरे देशों की भारत विरोधी ताकतों से हथियार और अन्य सहायता प्राप्त करने में भी शामिल है।
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गैरकानूनी संगठन घोषित
सरकार ने कहा कि गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम, 1967 की धारा 3(1) के तहत एनएससीएन-के और इसके सभी गुटों व सहयोगी संगठनों को गैरकानूनी संगठन घोषित किया जाता है। नगालैंड, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश की राज्य सरकारों ने भी गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत एनएससीएन-के को गैरकानूनी संगठन घोषित करने की सिफारिश की थी।

पिछले पांच साल में 13 अंडरग्राउंड सदस्य मारे गए
गृह मंत्रालय ने कहा कि 28 सितंबर 2020 से 30 अप्रैल 2025 के बीच एनएससीएन-के के सदस्यों की कई गतिविधियों की जानकारी मिली। इनमें 71 मामले दर्ज किए गए, 56 आरोपपत्र दायर किए और 35 सदस्यों पर मुकदमा चलाया गया। इसके अलावा, इसके सदस्य 51 अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल थे, 85 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया, 69 सदस्य आत्मसमर्पण कर चुके हैं। साथ ही 69 हथियार, 52 मैगज़ीन, 931 कारतूस, 10 ग्रेनेड, 150 डेटोनेटर, तीन विस्फोटक जेल ट्यूब, 200 ग्राम ट्राइनाइट्रोटीलुईन, डेढ़ किलोग्राम का आईईडी और 800 ग्राम अन्य विस्फोटक सामग्री बरामद की गई। इस दौरान पुलिस या सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में 13 अंडरग्राउंड सदस्य मारे गए।
 
दशकों से प्रतिबंधित, बढ़ती रही है पाबंदी
एनएससीएन-के दशकों से प्रतिबंधित संगठन है और इसे हर पांच साल में आगे बढ़ाया जाता है। इसके नेता म्यांमार के नगा एसएस खपलांग ने दशकों तक संगठन का नेतृत्व किया और 2017 में उनकी मृत्यु हो गई। अब संगठन का नेतृत्व उनके दो डिप्टी कर रहे हैं।

 
प्रतिद्वंद्वी गुट सरकार से कर रहा बातचीत
एनएससीएन-के का प्रतिद्वंद्वी गुट एनएससीएन-आईएम मौजूदा समय में केंद्र सरकार के साथ शांति वार्ता कर रहा है ताकि नगालैंड की सात दशकों पुरानी उग्रवाद समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सके।

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