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HC जजों के ट्रांसफर में हितों के टकराव से जुड़े क्लॉज में अहम बदलाव

Sun, 31 Jul 2016 02:26 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 31 Jul 2016 02:26 PM IST
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Govt dilutes clause on transfer of High Court judges over conflict of interest
जजों के ट्रांसफर का अधिकार चीफ जस्टिस ने अपने पास ही रखा है। - फोटो : Getty Images
हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर जारी संशोधित प्रक्रिया ज्ञापन (मेमोरेंडम ऑफ प्रोसिजर) पर केंद्र सरकार और न्याय पालिका के बीच संघर्ष बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में सरकार ने हितों के टकराव को लेकर हाईकोर्ट के जजों के ट्रांसफर पर महत्वपूर्ण खंड दिया है।  
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कानून मंत्रालय ने 21 जून को एक नया ड्राफ्ट बनाया है। इसमें कहा गया है कि सरकार ने हाईकोर्ट के जजों के ट्रांसफर पर कॉलेजियम के विचार को एक शर्त के साथ स्वीकार किया है। इसके मुताबिक यदि कोर्ट में जजों के रिश्तेदार भी प्रैक्टिस करते हैं तो ट्रांसफर अनिवार्य होगा। 
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मुख्य न्यायाधीश को मिलाकर हाईकोर्ट के जजों की ट्रांसफर प्रक्रिया संविधान की धारा 222 के तहत है। ट्रांसफर का प्रस्ताव देश के मुख्य न्यायाधीश द्वारा की जाती है। 
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इससे पहले लाए गए प्रक्रिया ज्ञापन (मेमोरेंडम ऑफ प्रोसिजर) के मुताबिक 'हर ट्रांसफर जनता के हित में हो यानी न्याय के जरिए देश में बेहतर प्रशासन को बढ़ाया दिया जाए।'

हालांकि सरकार ने इसमें एक महत्वपूर्ण बदलाव की मांग की गई। मई में सरकार की ओर तैयार किए गए ड्राफ्ट में कहा गया कि एक हाईकोर्ट से दूसरे हाईकोर्ट में जजों का ट्रांसफर प्रशासनिक जरूरतों, कोर्ट में रिश्तेदारों के प्रैक्टिस के चलते हितों के टकराव और उक्त जज के अनुरोध को ध्यान में रखते हुए हो। 

कॉलेजियम के इस पर सवाल उठाया और कहा कि 'कोर्ट में रिश्तेदारों की प्रैक्टिस को लेकर हितों के टकराव' को स्वीकार नहीं किया जा सकता। कॉलेजियम चाहती थी कि इन शब्दों को 'हितों के टकराव के आधार पर यदि परिस्थिति की मांग हो' 

प्रस्तावित बदलाव दो चीजों की ओर संकेत करता है। पहला कि इसमें हितों के टकराव को लेकर जजों का ट्रांसफर अनिवार्य नहीं होगा यदि उनके रिश्तेदार उसी कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे हो। दूसरा यह कि देश के मुख्य न्यायाधीश ने जजों के ट्रांसफर पर अधिकार अपने पास रखा है। चाहे जजों के रिश्तेदार वकील उसी कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे हो। 

समझा जा सकता है कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर की मुलाकात के बाद कॉलेजियम की मांगों को सरकार ने माना है। गौरतलब है कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज प्रक्रिया ज्ञापन पर अंतरमंत्रालयी समूह का प्रतिनिधित्व करती हैं।


पिछले महीने मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात के दौरान ही सुषमा स्वराज और तत्कालीन कानून मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने कॉलेजियम को सूचित कर दिया था कि सरकार अनिवार्य ट्रांसफर के खंड को बदलने पर सहमत है।
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