घुसपैठियों को बर्दाश्त नहीं करेगी सरकार, प्रवासियों के राहत और पुनर्वास बजट में कटौती
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घुसपैठियों को लेकर मोदी सरकार ने जो सख्त रवैया अपनाने की बात कही थी, शुक्रवार को पेश हुए आम बजट में उसका प्रभाव देखने को मिला है। मोदी सरकार ने प्रवासियों के राहत एवं पुनर्वास बजट में कटौती कर यह संकेत दिया है कि अब घुसपैठियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्हें अपने वतन वापस लौटना होगा।
प्रवासियों को राहत, पुनर्वास और अवैध रूप से भारत में रह रहे लोगों को वापस उनके देश में भेजना, आदि कार्यों के लिए साल 2018-19 में 1048 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था। इस बार के बजट में यह राशि घटाकर 848 करोड़ रुपये कर दी गई है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस राशि में कटौती से यह संकेत भी मिलता है कि आने वाले समय में मोदी सरकार दूसरे राज्यों में भी एनआरसी को लागू कर सकती है।
सीआरपीएफ के पूर्व आईजी वीपीएस पंवार जो कि उत्तर-पूर्व और जम्मू-कश्मीर में लंबे समय तक तैनात रहे हैं, का कहना है कि प्रवासियों के पुनर्वास पर केंद्र सरकार भारी धनराशि खर्च करती रही है। इसके अलावा इन प्रवासियों को वापस इनके देश भेजने की प्रक्रिया में भी अच्छा खासा सरकारी बजट लग जाता है। उत्तर पूर्व और दूसरे राज्यों में कथित तौर पर लाखों घुसपैठिये रह रहे हैं।
इन्होंने कई तरह के सरकारी दस्तावेज भी तैयार करा लिए हैं। जो राशि स्थानीय लोगों के विकास पर खर्च होनी चाहिए, उसका बड़ा हिस्सा ये लोग हजम कर जाते हैं। पंवार बताते हैं कि उत्तर-पूर्व के राज्यों में घुसपैठियों की बड़ी तादाद है। पश्चिम बंगाल में भी यही हालत है। यहां बांग्लादेश से अवैध तौर पर आए लोगों को स्थानीय लोगों की तरह सभी तरह की सुविधाएं मिल रही हैं। केंद्र सरकार ने प्रवासियों के पुनर्वास बजट में कटौती कर सराहनीय कार्य किया है।
लोकसभा चुनाव के दौरान ही मोदी-शाह की जोड़ी ने दे दिए थे ऐसे संकेत
बता दें कि लोकसभा चुनाव में ही भाजपा ने एनआरसी को लेकर अपनी नीयत साफ कर दी थी। पीएम मोदी के अलावा पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने अपनी रैलियों में अवैध रूप से रह रहे घुसपैठियों का मुद्दा जोर-शोर से उठाया था। नतीजा, भाजपा को पश्चिम बंगाल में कुल 42 सीटों में से 18 पर जीत मिली।
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, जिन्होंने चुनाव के दौरान ममता बनर्जी पर घुसपैठियों को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए दावा किया था कि मोदी सरकार के दोबारा आने पर चुन-चुनकर घुसपैठियों को बंगाल से बाहर निकाला जाएगा, अब देश के गृहमंत्री बन गए हैं। उन्होंने मंत्रालय का कार्यभार संभालने के बाद अपने इरादे जाहिर कर दिए थे कि घुसपैठियों को बाहर करने के लिए राष्ट्रीय नागरिकता पंजीकरण (एनआरसी) को सख्ती से लागू किया जाएगा।
गृह मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि असम में एनआरसी प्रक्रिया पूरी होते ही उसे दूसरे राज्यों की ओर बढ़ाया जाएगा। इसमें सबसे पहला नंबर पश्चिम बंगाल का है। बताया जा रहा है कि यहां बांग्लादेश से आए बड़ी संख्या में घुसपैठिये स्थायी तौर पर बस गए हैं। उन्हें राज्य सरकार का संरक्षण प्राप्त है।
पीएम मोदी ने अपनी जनसभाओं में कहा था कि बंगाल में गोरखा समुदाय को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर से नुकसान नहीं होगा, लेकिन घुसपैठियों को किसी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा। इसी तरह हिंदू और बौद्ध शरणार्थी जो बाहर से आए हैं, भाजपा द्वारा उन्हें भी सम्मान देने की बात कही जा रही है।