कश्मीर में नई व्यवस्था के समर्थकों की सुरक्षा पर देना होगा सरकार को ध्यान

जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली  Published by: Nilesh Kumar Updated Fri, 16 Aug 2019 11:56 PM IST
श्रीनगर के हालात (File Photo)
श्रीनगर के हालात (File Photo) - फोटो : अमर उजाला
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जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटे हुए लगभग दो सप्ताह हो गए हैं। 19 अगस्त से राज्य में स्कूल खोलने की घोषणा कर दी गई है। इंटरनेट और टेलीफोन लाइनें भी सप्ताहांत में चालू कर दी जाएंगी। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि घाटी में हालात अब सामान्य हो रहे हैं। लेकिन यह स्थिति कब तक सामान्य रहेगी, इसको लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं।
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ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के वरिष्ठ फेलो खालिद शाह ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि मौजूदा हालातों को देखते हुए सरकार को बेहद संभलकर चलना होगा। उन्होंने आशंका जताई कि जो लोग अनुच्छेद 370 और 35ए के हटने से नाराज हैं वो सूबे के उन नेताओं पर अपना गुस्सा निकाल सकते हैं, जो इसके पक्ष में हैं। कश्मीर का इतिहास भी ऐसी घटनाओं से भरा पड़ा है।


बकौल खालिद, सरकार को हालात सामान्य बनाने बनाने के लिए दीर्घकालिक योजना बनानी होगी और जनता को इसके लिए तैयार भी करना होगा। पूर्व में भी जब कभी कश्मीर में ऐसे हालत बने तो इसके परिणाम लंबे समय तक देखे गए हैं।

राज्य में राजनीतिक बातचीत और चर्चाएं बंद हैं और अलगाववादी नेता नजरबंद है। सूबे में शांति को स्थायी बनाने के लिए सरकार को अब स्थानीय नेताओं को भरोसे में लेना होगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि ये स्थानीय नेता जनता के बीच अनुच्छेद 370 और 35ए को हटने से होने वाले फायदे की सही जानकारी पहुंचाएं।

पाकिस्तान की हर हरकत पर रखें नजर

कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाने पर सबसे ज्यादा शोर पाकिस्तान मचा रहा है। उसकी पूरी कोशिश है कि किसी भी तरह से राज्य के लोगों को भड़काया जाए। अंतरराष्ट्रीय पटल पर भी इस विषय में उठाने में उसने कोई कसर नहीं छोड़ी। हालांकि हर जगह उसे मुंह की ही खानी पड़ी है। फिर भी वो अंतरराष्ट्रीय समुदाय का समर्थन जुटाने की कोशिश में लगा हुआ है।


पिछले दो सप्ताह से राज्य में आतंकी घटनाएं नहीं हुई हैं। लेकिन शांति स्थापना के लिए राज्य में आतंकवादियों और उनसे समर्थकों को खत्म भी करना होगा। अनुच्छेद 370 और 35ए के हटने को सही मानने वाले नेताओं की सुरक्षा पर भी सरकार को ध्यान देना होगा।

सख्त कदम का दूरगामी असर

हालांकि घाटी के आंकड़े और जमीनी माहौल पर पैनी नजर रखने वालों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ समय में हालात बेहतर हुए हैं। हालांकि यह स्थिति अनुच्छेद 370 हटाए जाने से पहले की थी। राज्य में आतंकवाद की घटनाओं में भी गिरावट देखी गई है।

गृह राज्यमंत्री ने संसद में दावा किया कि वर्ष 2019 के पहले छह महीनों में 2018 के मुकाबले सीमा पार से घुसपैठ में 43 प्रतिशत की कमी आई है। पुलवामा के बाद सुरक्षा बलों ने जिस तरह घाटी में आतंकियों के खिलाफ अभियान शुरु किया, उससे आतंकी घटनाएं कम हो गई हैं। पत्थरबाजों पर भी नकेल कस दी गई।

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