किसानों को मिलेंगे 27 लाख सोलर पंप, मिलेंगे ये फायदे
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ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने कहा कि कुसुम योजना के तहत 27.50 लाख सोलर पंप किसानों को मुहैया कराए जाएंगे। आगामी जुलाई से कुसुम योजना की शुरुआत होगी। उन्होंने कहा कि किसानों को सस्ती बिजली की जरूरत है, डीजल से पंप चलाना किसानों के लिए तर्कसंगत नहीं है।
उन्होंने बताया कि सरकार एक अप्रैल 2019 से सातों दिन 24 घंटे बिजली आपूर्ति करने को लेकर प्रतिबद्ध है और उसके लिये रूपरेखा तैयार की जा चुकी है। इसके अलावा, सभी गांवों को बिजली सुविधा उपलब्ध कराने के बाद अब इस साल दिसंबर तक बिजली से वंचित सभी परिवारों को बिजली कनेक्शन उपलब्ध करा दिया जाएगा।
मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार अभी करीब 3.13 करोड़ परिवार बिजली से वंचित हैं। सिंह ने बताया कि बीते चार साल में कुल विद्युत उत्पादन क्षमता में रिकार्ड एक लाख मेगावाट से अधिक की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों की 48 साल की तुलना में मौजूदा सरकार ने 48 महीने में जो उपलब्धियां हासिल की हैं, वह आंखें खोलने वाली है।
सिंह ने कहा कि पूर्व सरकारों में जहां क्षमता में सालाना औसतन 4,800 मेगावाट का इजाफा हुआ। वहीं हमने हर वर्ष 24,000 मेगावाट क्षमता जोड़े। पारेषण क्षमता में हमने हर साल 25,000 सर्किट किलोमीटर (सीकेएम) क्षमता सृजित की जबकि पिछली सरकारों में यह 3,400 सीकेएम थी।
2,630 से बढ़कर 22,000 मेगावाट हुआ सौर ऊर्जा उत्पादन
उन्होंने कहा कि पिछले चार साल में एक लाख मेगावाट बिजली क्षमता जोड़ी गयी और एक लाख सर्किट किलोमीटर अंतर-राज्यीय पारेषण क्षमता सृजित हुई। मार्च 2018 में कुल उत्पादन क्षमता 3,44,000 मेगावाट पहुंच गयी जो मार्च 2014 में 2,43,029 मेगावाट थी। पिछले साल सितंबर के अंतिम में सौभाग्य योजना शुरू किये जाने के बाद से अब तक लगभग 67.34 लाख घरों को बिजली पहुंचायी गयी है।
मंत्री ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले कोयला आपूर्ति में 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे सिंह ने कहा कि अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में भी हमारी क्षमता पिछले चार साल में दोगुनी होकर 70,000 मेगावाट पहुंच गयी है।
सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता 2013-14 के 2,630 मेगावाट से बढ़कर मार्च 2018 में 22,000 मेगावाट तथा पवन ऊर्जा इसी अवधि में 21,000 मेगावाट से बढ़कर 34,000 मेगावाट पहुंच गयी है। सरकार ने 2022 तक अक्षय ऊर्जा स्रोतों से 1,75,000 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता का लक्ष्य रखा है।