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Cyber Crime: साइबर अपराध रोकने के लिए सरकार का बड़ा कदम, मुखौटा खातों की पहचान के लिए एआई का होगा इस्तेमाल

Tue, 11 Feb 2025 03:37 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Tue, 11 Feb 2025 03:37 PM IST
सार

अमित शाह ने बताया कि 399 बैंक और वित्तीय मध्यस्थों के साथ छह लाख से अधिक संदिग्ध डेटा पॉइंट साझा किए गए हैं। साथ ही 19 लाख से अधिक मुखौटा खाते या म्यूल खाते पकड़े गए हैं और 2,038 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन को रोका गया है।

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Government swift action against cyber crime planning to use AI for identifying mule accounts says amit shah
अमित शाह, केंद्रीय गृहमंत्री - फोटो : X / @AmitShah

विस्तार

साइबर अपराध रोकने के लिए केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। दरअसल सरकार साइबर धोखाधड़ी में इस्तेमाल होने वाले मुखौटा खातों की पहचान के लिए एआई तकनीक का इस्तेमाल करने पर विचार कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यह जानकारी दी। गृह मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की सोमवार को 'साइबर सुरक्षा और साइबर अपराध' विषय पर बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता अमित शाह ने की। इस दौरान शाह ने बताया कि भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) की सिफारिशों के आधार पर 805 ऐप और 3,266 वेबसाइट लिंक ब्लॉक किए गए हैं।
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साइबर अपराध के खिलाफ सरकार की कार्रवाई
अमित शाह ने बताया कि 399 बैंक और वित्तीय मध्यस्थों के साथ छह लाख से अधिक संदिग्ध डेटा पॉइंट साझा किए गए हैं। साथ ही 19 लाख से अधिक मुखौटा खाते या म्यूल खाते पकड़े गए हैं और 2,038 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन को रोका गया है। शाह ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और सभी बैंकों के साथ समन्वय में मुखौटा खातों की पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग करने की कोशिश हो रही है।  
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गृह मंत्री ने कहा कि 'सरकार ये सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि मुखौटा खाते चालू होने से पहले ही बंद हो जाएं।' मुखौटा खाता, वो बैंक खाता होता है, जिसका इस्तेमाल अपराधी साइबर अपराध से हासिल किए पैसों को स्थानांतरित करने में करते हैं। साथ ही सरकार लोगों को साइबर अपराध के प्रति जागरुक भी कर रही है। शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में गृह मंत्रालय ने भारत को साइबर-सुरक्षित राष्ट्र बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि 'आज देश के 95 प्रतिशत गांव डिजिटल रूप से जुड़े हुए हैं, जबकि एक लाख ग्राम पंचायतें वाई-फाई हॉटस्पॉट से लैस हैं।'
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डिजिटल अर्थव्यवस्था में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश
अमित शाह ने कहा कि 'पिछले 10 वर्षों में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या में 4.5 गुना वृद्धि हुई है और 2024 में यूपीआई के माध्यम से 17.221 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन किए गए। शाह ने कहा कि 2024 में वैश्विक डिजिटल लेनदेन का 48 प्रतिशत भारत में हुआ और स्टार्टअप इकोसिस्टम के मामले में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है।' उन्होंने कहा '2023 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में डिजिटल अर्थव्यवस्था का योगदान लगभग 32 लाख करोड़ रुपये था, जो 12 प्रतिशत है, जबकि इस अवधि में लगभग 1.5 करोड़ नौकरियां पैदा हुईं। शाह ने यह भी कहा कि आज भारत डिजिटल परिदृश्य के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है और डिजिटल अर्थव्यवस्था देश की कुल अर्थव्यवस्था में 20 प्रतिशत का योगदान देती है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय का लक्ष्य है कि देश में साइबर अपराध का कोई भी मामला न हो।'

एआई की मदद से म्यूल अकाउंट्स की करेंगे पहचान
शाह ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल और रिजर्व बैंक व अन्य बैंकों के साथ समन्वय से म्यूल अकाउंट्स की पहचान की व्यवस्था बनाने के लिए प्रयास जारी है। म्यूल अकाउंट को ऑपरेट होने से पहले ही बंद करने की व्यवस्था भी की जाएगी। हमने यह भी सुनिश्चित किया है कि लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘रुकें, सोचें और फिर कार्रवाई करें’ के मंत्र के बारे में जानकारी देकर उन्हे साइबर अपराधों के प्रति सतर्क किया जा सके।

अई4सी पोर्टल पर 1.43 लाख एफआईआर दर्ज 2,038 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन रोके गए
शाह ने कहा, आई4सी पोर्टल पर 1.43 लाख एफआर्आर दर्ज हुईं और 19 करोड़ से अधिक लोगों ने इस पोर्टल का उपयोग किया है। राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से 805 ‘एप’ और 3,266 वेबसाइट-लिंक को आई4सी की सिफारिश पर ब्लॉक किया गया है। 399 बैंक और वित्तीय मध्यस्थ ऑनबोर्ड हो चुके हैं। साथ ही 6 लाख से अधिक संदिग्ध डाटा साझा किया गया, 19 लाख से अधिक म्यूल खाते पकड़े गए और 2,038 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन रोके गए।


देश के 95 फीसदी गांव डिजिटली कनेक्ट
गृह मंत्री ने कहा, देश में आज 95 फीसदी गांव डिजिटली कनेक्ट हो चुके हैं और एक लाख ग्राम पंचायत वाई-फाई हॉटस्पॉट से युक्त हैं। पिछले दस वर्षों में इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की संख्या साढ़े चार गुना बढ़ी है। 2024 में यूपीआई के जरिये कुल 17, 221 लाख करोड़ रुपये कीमत के 246 लाख करोड़ लेन-देन हुए हैं। शाह ने कहा, 2024 में पूरी दुनिया में हुए डिजिटल लेन-देन में 48 फीसदी लेन-देन भारत में हुए।
 
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