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वैक्सीनेशन: बच्चों के टीकाकरण के लिए आयु वर्ग बना सकती है सरकार, टीके की कमी न हो इसलिए उठाया ये कदम

Thu, 21 Oct 2021 05:17 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Thu, 21 Oct 2021 05:17 PM IST
सार

विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, बच्चों की वैक्सीन को मंजूरी मिलने के बाद इसकी शुरुआत चरणबद्ध तरीके से होने के आसार हैं। 2 से 17 वर्ष के उम्र के बच्चों को एक साथ टीका लगना शुरू होगा। इसमें भी वही कदम उठाए जाएंगे जो 18 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों के वैक्सीन प्रोग्राम को शुरू करने के दौरान उठाए गए। पहले चरण में 12 साल और उससे अधिक उम्र के बच्चों के लिए टीकाकरण शुरू किया जा सकता है...

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Government may make age group for coronavirus virus vaccination of children
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

विस्तार

कोरोना टीकाकरण के मामले में भारत ने बड़ा कीर्तिमान स्थापित कर लिया है। बुधवार को भारत ने 100 करोड़ कोविड वैक्सीन लगाने का रिकॉर्ड बना लिया। इस बीच देश में बच्चों के टीकाकरण को शुरू करने लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि दो साल से कम उम्र के बच्चों में इस्तेमाल में कोवॉक्सिन को मंजूरी मिलने में अभी कुछ वक्त लग सकता है। क्योंकि भारत में छोटे बच्चों के ये टीका चरणबद्ध तरीके से लगाए जाने के आसार हैं।

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अमर उजाला को विश्वस्त सूत्र ने बताया कि भारतीय दवा नियामक डीसीजीआई की विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों की सावधानी से जांच कर रहा है और कई पहलुओं का आकलन कर रहा है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) द्वारा फिलहाल कई कारकों पर विचार किया जा रहा है। इसमें 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों पर टीके का प्रभाव और प्रदर्शन शामिल है। इसके अलावा टीके की उपलब्धता भी एक बड़ा मसला बना हुआ है, जिसका आकलन भी हर स्तर पर किया जा रहा है। दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए दुनियाभर में यह पहला कोविड-19 टीका होगा। इसलिए इसकी मंजूरी मिलने से पहले आंकड़ों की सावधानीपूर्वक समीक्षा आवश्यक है। वहीं, भारत बायोटेक अपने टीके की आपूर्ति बढ़ाने में जोर दे रही है। अब देश में अब तक हुए कुल टीकाकरण में इसका योगदान केवल 11-12 फीसदी है।

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बढ़ सकती है वैक्सीन की मांग

विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, बच्चों की वैक्सीन को मंजूरी मिलने के बाद इसकी शुरुआत चरणबद्ध तरीके से होने के आसार हैं। 2 से 17 वर्ष के उम्र के बच्चों को एक साथ टीका लगना शुरू होगा। इसमें भी वही कदम उठाए जाएंगे जो 18 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों के वैक्सीन प्रोग्राम को शुरू करने के दौरान उठाए गए। पहले चरण में 12 साल और उससे अधिक उम्र के बच्चों के लिए टीकाकरण शुरू किया जा सकता है। इसमें कमजोर बच्चे या जिन बच्चों को दूसरी बीमारी है, उनके लिए किसी भी उम्र वर्ग में होने के बावजूद प्राथमिकता दी जा सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, केंद्र सरकार अगर दो वर्ष से 17 वर्ष के उम्र के बच्चों को कोवॉक्सिन लगाने की मंजूरी देती है तो इस टीके की मांग में अचानक से वृद्धि देखी जा सकती है। जिससे बुजुर्गों और अन्य लोगों के लिए टीके का संकट हो सकता है। हालिया सीरो सर्वेक्षण के मुताबिक, देश में करीब 40 करोड़ बच्चों में से करीब 24 करोड़ में पहले ही एंटीबॉडी तैयार हो चुके हैं। सरकार को 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को पर्याप्त टीका लगाए जाने के बाद ही दूसरे आयु वर्ग के लिए टीके की शुरुआत करनी चाहिए। पहले 12-18 आयु वर्ग और उसके बाद 5-11 आयु वर्ग समूह का टीकाकरण करना चाहिए। इसके बाद धीरे-धीरे दो से पांच वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों को टीका लगाना चाहिए, जिससे टीका भी हमारे पास पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहे।

सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी (एसईसी) ने कोवॉक्सिन को दो से 18 वर्ष के बच्चों के लिए इमरजेंसी के तौर पर इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी है। एसईसी ने इसकी मंजूरी भारत बायोटेक द्वारा किए गए दूसरे व तीसरे चरण के ट्रायल का डाटा के आधार पर दी है। हालांकि इसको अभी डीसीजीआई (ड्रग कंटोलर जनरल आफ इंडिया) की स्वीकृति मिलना बाकी है। इसके बाद ही इसको राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान में शामिल किया जा सकेगा।

बेहतर विकल्प है कोवैक्सीन

हाल ही में भारत में 12 से 18 साल के बच्चों के लिए जायडस कैडिला की स्वदेशी वैक्सीन जायकोव-डी को मंजूरी दी जा चुकी है। हालांकि जायडस कैडिला के जायकोव-डी की उत्पादन क्षमता फिलहाल 10 करोड़ डोज सालाना है। इस वजह से माना जा रहा है कि बच्चों के टीकाकरण में इससे गति नहीं मिल सकेगी। एक वजह ये भी है कि इसकी तीन डोज देनी होंगी। ऐसे में देश के करीब 14 करोड़ बच्चों के टीकाकरण में समय काफी लग जाएगा।

इसी कारण कोवॉक्सिन को ज्यादा बेहतर विकल्प माना जा रहा है। यदि इसे अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो इससे टीकाकरण को गति मिल सकेगी। इसकी एक बड़ी वजह ये भी है कि कोवॉक्सिन का उत्पादन इस माह साढ़े सात करोड़ डोज से अधिक होने का अनुमान है। वहीं राज्यों के पास अभी इसका स्टॉक भी है। ऐसे में इसे बच्चों के लिए रिजर्व कर पाना संभव होगा। भारत बायोटेक को उम्मीद है कि इसको जल्द ही मंजूरी मिल जाएगी। मंजूरी के साथ ही बच्चों का टीकाकरण व्यापक पैमाने पर शुरू हो सकेगा।

इसके अलावा भारत में बच्चों के लिए जिन दो और वैक्सीन का ट्रायल चल रहा है, उनमें एक सीरम इंस्टीट्यूट की कोवावैक्स और दूसरी बायोलाजिकल ई की कोरबेवैक्स है। कोवावैक्स को डीसीजीआई से 7-11 वर्ष के बच्चों पर ट्रायल की अनुमति मिल चुकी है। वहीं कोरबेवैक्स को पांच साल से अधिक उम्र के बच्चों के लिए ट्रायल की अनुमति भी पहले ही दी जा चुकी है।

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