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लोकपाल गठित होने के 11 महीने बाद सरकार ने जारी किया शिकायत करने का प्रारूप

Wed, 04 Mar 2020 04:52 AM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 04 Mar 2020 04:52 AM IST
सार

इसमें कहा गया है कि झूठी या फंसाने वाली शिकायत देना दंडनीय अपराध माना जाएगा और इसके लिए एक साल तक की जेल की सजा और एक लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। 

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Government issued a complaint format after 11 months of Lokpal constitution
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

प्रधानमंत्री सहित सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार मामलों की शिकायत के लिए लोकपाल के गठन के 11 महीने बाद सरकार ने शिकायत दर्ज कराने वाला प्रारूप जारी किया। कार्मिक मंत्रालय के आदेश में इस आशय की जानकारी दी गई है। आदेश के मुताबिक, भ्रष्टाचार की सभी शिकायतें अनिवार्य रूप से हलफनामे के साथ गैर ज्यूडीशियल स्टांप पेपर पर देना होगा। 

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इसके साथ प्रारूप के अनुसार अन्य जानकारी देनी होगी। इसमें कहा गया है कि झूठी या फंसाने वाली शिकायत देना दंडनीय अपराध माना जाएगा और इसके लिए एक साल तक की जेल की सजा और एक लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। शिकायत आमतौर पर अंग्रेजी में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दर्ज कराई जा सकती है। 
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यदि ई-शिकायत दी गई है, तो उसकी हार्ड कॉपी शिकायत के 15 दिनों के अंदर लोकपाल के पास जमा करानी होगी। यदि कायदे से शिकायत नहीं दी गई, तो इलेक्ट्रॉनिक तरीके से प्राप्त शिकायत को लोकपाल नहीं मानेगा। इसके अलावा हिंदी, गुजराती, मराठी, मैथिली, असमिया सहित आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं में भी लोकपाल शिकायत पर स्वीकार करेगा।

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भ्रष्टाचार की जांच करने वाला सर्वोच्च निकाय

लोकपाल राष्ट्रीय स्तर पर भ्रष्टाचार की जांच करने वाला सर्वोच्च संस्थान है, जिसमें केंद्र सरकार के किसी भी कर्मचारी या अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की समयबद्ध जांच करेगा। लोकपाल 30 दिन के अंदर शिकायत का निपटारा कर देगा। आठ सदस्यीय लोकपाल के चेयरपर्सन पिनाकी चंद्र घोष को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 23 मार्च, 2019 को शपथ दिलाई थी। नियम के मुताबिक इसमें चेयरपर्सन के अलावा अधिकतम आठ सदस्य हो सकते हैं, जिनमें चार न्यायिक सदस्य होंगे।

अब तक एक हजार शिकायतों का निपटारा

आंकड़ों के मुताबिक 30 सितंबर, 2019 तक कुल 1065 शिकायतें मिलीं, जिनमें से लोकपाल ने एक हजार का निपटारा कर दिया। शिकायत के प्रारूप तय होने से पहले मिली सभी शिकायतों का लोकपाल ने निपटारा करने का फैसला लिया था।

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