महाराष्ट्र संकट: पवार की 'पावर पॉलिटिक्स' में कहीं उलझ तो नहीं गई भावी सरकार?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महाराष्ट्र में फिलहाल राष्ट्रपति शासन है। एनसीपी प्रमुख शरद पवार दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से चर्चा कर चुके हैं। भावी सरकार बनाने की रस्साकसी चल रही है। लेकिन सत्ता के गलियारे में अब यह चर्चा भी तेज है कि महाराष्ट्र की भावी सरकार शरद पवार की पॉवर पालिटिक्स में उलझ गई है।
राज्यसभा के 250वें सत्र में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पवार की पार्टी एनसीपी और बीजू जनता दल की तारीफ की है। पीएम मोदी की इस प्रशंसा को पवार की पावर पॉलिटिक्स से जोड़कर देखा जा रहा है।
पीएम मोदी द्वारा एनसीपी की तारीफ किए जाने के बाद भाजपा के कई सदस्यों के चेहरे पर रहस्यमय मुस्कान तैरती देखी गई। हालांकि कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता बीके हरिप्रसाद को अभी भी काफी उम्मीदें हैं। लेकिन भाजपा में मामलों पर गहरी पकड़ रखने वाले सूत्र का कहना है कि भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जरूरत से ज्यादा शांत हैं। बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र में गैर भजपा सरकार बनना उन्हें बहुत अच्छा नहीं लगेगा।
चंद्रकांत पाटिल बनाम संजय राउत
महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल का दावा है कि वहां भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार बनेगी। सरकार का मुख्यमंत्री भाजपा का होगा। शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत यहां भाजपा को आईना दिखा देते हैं। वह लगातार दावा कर रहे हैं कि जल्द ही शिवसेना का मुख्यमंत्री बनेगा और शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस के गठबंधन वाली सरकार बनेगी।
दावे दोनों तरफ से हैं, लेकिन अभी कोई सरकार बनती नहीं दिखाई दे रही है। इस बीच इतना जरूर हुआ है कि संजय राउत मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती होकर एंजियोप्लास्टिक सर्जरी से गुजर चुके हैं। शरद पवार कभी दो कदम आगे और कभी ढाई कदम पीछे चलते दिख रहे हैं। किसी को भी फिलहाल पवार का पॉवर गेम समझ नहीं आ रहा है।
कहीं भारी दबाव में तो नहीं है शरद पवार?
राजनीति के पुराने खिलाड़ी शरद पवार को भांपना इतना आसान नहीं है, लेकिन एक चर्चा यह भी तेज है कि शरद पवार पीएम मोदी से करीब का रिश्ता रखते हैं। पवार और पार्टी के बड़े नेता प्रफुल्ल पटेल पर प्रवर्तन निदेशालय का दबाव बढ़ रहा है। प्रफुल्ल पटेल तेजी से जांच एजेंसियों के रडार पर आ रहे हैं। इसलिए शरद पवार दो कदम आगे और ढाई कदम पीछे चल रहे हैं।
एक दूसरी भी चर्चा है। यह चर्चा कांग्रेस के धर्म निरपेक्ष चेहरे को लेकर है। कहा जा रहा है कि शिवसेना कट्टर हिंदुत्व की विचारधारा पर यकीन रखती है। कांग्रेस-एनसीपी के करीब आने पर शिवसेना का 'धार्मिक निरपेक्षता का छुआछूत' जहां खत्म हो जाएगा, वहीं कांग्रेस को अपनी राजनीतिक विचारधारा के मद्देनजर जवाब देना भारी पड़ेगा।
बताया जा रहा है कि इसके बाबत कुछ जरूरी पहल पर तीनों दलों में सहमति नहीं बन पा रही है। इसके सामानांतर एक चर्चा और है कि सरकार गठन और सत्ता के बंटवारे में तीनों दल आपसी सहमित के धरातल पर नहीं आ पा रहे हैं। कुल मिलाकर महाराष्ट्र की सरकार गठन संभावना पर एक बार फिर संशय के बादल छा गए हैं।