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पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में देरी से सरकार में चिंता, चुकानी पड़ेगी राजनीतिक कीमत
Fri, 22 Feb 2019 12:35 AM IST
गौरव द्विवेदी
शरद गुप्ता, नई दिल्ली
शरद गुप्ता, नई दिल्ली
Published by: गौरव द्विवेदी
Updated Fri, 22 Feb 2019 12:35 AM IST
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पुलवामा आतंकी हमले के बाद मौके पर तैनात सुरक्षाबल
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पुलवामा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश कांग्रेस ने भले ही बृहस्पतिवार को की हो लेकिन सत्ताधारी दल और उसके सहयोगियों में इसकी आशंका पहले से ही थी। मंगलवार को आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में भी प्रधानमंत्री की मौजूदगी में कुछ मंत्रियों ने चिंता जताई कि यदि पाकिस्तान से जल्द ही बदला नहीं लिया गया तो आगामी चुनाव में उन्हें इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।
भाजपा नेताओं का मानना है कि पूरे देश में पाकिस्तान के खिलाफ आक्रोश की लहर है। खुद प्रधानमंत्री ने अपने भाषणों में अपने अंदर वैसी ही गुस्से की आग का जिक्र किया जैसी लोगों के दिल में है। साथ ही उन्होंने कहा कि शहीदों के लिए बहाए जा रहे ‘हर एक आंसू का बदला लिया जाएगा’। लेकिन कुछ वरिष्ठ मंत्रियों ने मंत्रिमंडल की बैठक में आशंका जताई कि यदि जल्द ही पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो यह गुस्सा बताशा में भी बदल सकता है।
भाजपाई मंत्रियों ने भी माना कि फिलहाल कांग्रेस सहित सभी विपक्षी पार्टियां फिलहाल चुप हैं लेकिन चुनाव करीब आते ही वे सरकार पर हमला बोलेंगी। वे पूछेंगी कि क्या यह सरकार के इंटेलीजेंस नेटवर्क की विफलता का नतीजा है? इतनी ज्यादा मात्रा में आरडीएक्स जैसा घातक विस्फोटक आतंकवादियों के पास कैसे पहुंचा? और साल भर में इतनी बड़ी तादाद में आतंकवादियों को कश्मीर घाटी में मार गिराने जाने के बाद भी आतंकवाद पर लगाम क्यों नहीं लगाई जा पा रही है?
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उनका कहना था कि पाकिस्तान पर हमला कर देना या पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड मौलाना मसूद अजहर को उसके बिल में ही मार गिराना आसान नहीं है। पाकिस्तान पहले से ही हाई अलर्ट पर है और वह परमाणु हथियारों से लैस भी है। वहां प्रशासन में चुनी हुई सरकार से ज्यादा दबदबा सेना का है। इसीलिए सरकार को हर कदम संभल कर उठाना होगा। लेकिन चुनाव सर पर होने की वजह से समय सबसे बड़ा महत्वपूर्ण कारक है।
भरोसा मोदी पर
कैबिनेट की बैठक में सभी मंत्रियों ने एक स्वर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भरोसा जताते हुए पाकिस्तान के खिलाफ कोई भी फैसला उन पर छोड़ दिया। सभी का कहना था कि वे मौजूदा समय में मोदी सबसे भरोसेमंद नेता हैं और उनकी वाकपटुता का तो विरोधी भी लोहा मानते हैं।
ममता का विरोध
दो दिन पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुलवामा हमले का राजनीतिकरण करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की आलोचना की थी। उनका कहना था कि विरोधी दलों के नेता इस मामले पर सरकार का साथ देने के लिए चुप्पी साधे हैं जबकि मोदी और शाह हर दिन पुलवामा पर लोगों की भावनाएं भड़का रहे हैं।
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भाजपा नेताओं का मानना है कि पूरे देश में पाकिस्तान के खिलाफ आक्रोश की लहर है। खुद प्रधानमंत्री ने अपने भाषणों में अपने अंदर वैसी ही गुस्से की आग का जिक्र किया जैसी लोगों के दिल में है। साथ ही उन्होंने कहा कि शहीदों के लिए बहाए जा रहे ‘हर एक आंसू का बदला लिया जाएगा’। लेकिन कुछ वरिष्ठ मंत्रियों ने मंत्रिमंडल की बैठक में आशंका जताई कि यदि जल्द ही पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो यह गुस्सा बताशा में भी बदल सकता है।
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भाजपाई मंत्रियों ने भी माना कि फिलहाल कांग्रेस सहित सभी विपक्षी पार्टियां फिलहाल चुप हैं लेकिन चुनाव करीब आते ही वे सरकार पर हमला बोलेंगी। वे पूछेंगी कि क्या यह सरकार के इंटेलीजेंस नेटवर्क की विफलता का नतीजा है? इतनी ज्यादा मात्रा में आरडीएक्स जैसा घातक विस्फोटक आतंकवादियों के पास कैसे पहुंचा? और साल भर में इतनी बड़ी तादाद में आतंकवादियों को कश्मीर घाटी में मार गिराने जाने के बाद भी आतंकवाद पर लगाम क्यों नहीं लगाई जा पा रही है?
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उनका कहना था कि पाकिस्तान पर हमला कर देना या पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड मौलाना मसूद अजहर को उसके बिल में ही मार गिराना आसान नहीं है। पाकिस्तान पहले से ही हाई अलर्ट पर है और वह परमाणु हथियारों से लैस भी है। वहां प्रशासन में चुनी हुई सरकार से ज्यादा दबदबा सेना का है। इसीलिए सरकार को हर कदम संभल कर उठाना होगा। लेकिन चुनाव सर पर होने की वजह से समय सबसे बड़ा महत्वपूर्ण कारक है।
भरोसा मोदी पर
कैबिनेट की बैठक में सभी मंत्रियों ने एक स्वर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भरोसा जताते हुए पाकिस्तान के खिलाफ कोई भी फैसला उन पर छोड़ दिया। सभी का कहना था कि वे मौजूदा समय में मोदी सबसे भरोसेमंद नेता हैं और उनकी वाकपटुता का तो विरोधी भी लोहा मानते हैं।
ममता का विरोध
दो दिन पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुलवामा हमले का राजनीतिकरण करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की आलोचना की थी। उनका कहना था कि विरोधी दलों के नेता इस मामले पर सरकार का साथ देने के लिए चुप्पी साधे हैं जबकि मोदी और शाह हर दिन पुलवामा पर लोगों की भावनाएं भड़का रहे हैं।