लोकसभा चुनाव से पहले आयकर छूट की सीमा बढ़ा सकती है सरकार
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संसदीय चुनाव से पहले आम जनता को राहत देने की सुगबुगाहट है। बजट में सरकार व्यक्तिगत आयकर छूट की सीमा बढ़ाने पर विचार कर रही है। इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर प्रधानमंत्री कार्यालय लगा सकता है। दरअसल सामान्य वर्ग के गरीबों के लिए सालाना आमदनी की सीमा आठ लाख रुपये तय करने के बाद यह मांग उठ रही है कि जब साल में इतने कमाने वाले गरीब, तो फिर ढाई लाख से ज्यादा कमाने पर आयकर का बोझ क्यों?
वैसे 1 फरवरी को पूर्ण बजट के बदले लेखानुदान पेश होना है, लेकिन इस बार इसके लीक से हट कर पेश होने का अनुमान है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि आयकर छूट की सीमा बढ़ाने से मध्यम एवं निम्न मध्यम वर्ग खुश होगा। आयकर छूट सीमा बढ़ाने पर सरकार को मिलने वाले राजस्व के प्रभावित होने को लेकर सीबीडीटी के अधिकारियों ने होमवर्क पूरा कर लिया है।
छूट की सीमा बढ़ाने के तीन प्रस्ताव तैयार
एक अधिकारी ने बताया कि कर अनुसंधान इकाई ने तीन प्रस्ताव तैयार किए हैं। इनमें से किस पर मुहर लगेगी, इसका खुलासा 1 फरवरी को होगा। इन प्रस्तावों में आयकर में छूट की सीमा मौजूदा 2.5 लाख रुपये से बढ़ा कर 3.5 लाख रुपये करने की बात है। दूसरे प्रस्ताव में चार लाख और तीसरे में पांच लाख रुपये करने की बात है।
2014 में भाजपा ने छूट की सीमा तीन लाख करने का किया था वादा
वर्ष 2014 आम चुनाव में भाजपा ने आयकर छूट की सीमा बढ़ा कर तीन लाख रुपये करने का वादा किया था। यूपीए सरकार के समय वरिष्ठ भाजपा नेता यशवंत सिन्हा की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने आयकर छूट की सीमा 1.8 लाख रुपये से बढ़ा कर तीन लाख रुपये करने की सिफारिश की थी। अभी यह सीमा ढाई लाख रुपये है। वित्त मंत्री अरुण जेटली भी आयकर में ज्यादा छूट देने के पक्षधर रहे हैं।
कर छूट की सीमा पांच लाख हो : सीआईआई
उद्योग जगत से जुड़े संगठन सीआईआई ने आयकर छूट की सीमा बढ़ा कर पांच लाख रुपये करने की मांग की है। संगठन ने आयकर की अधिकतम दर 30 फीसदी को भी घटा कर 25 फीसदी करने की मांग की है। उसका कहना है कि यदि छूट की सीमा बढ़ेगी, तो उपभोक्ताओं के हाथ में ज्यादा पैसे आएंगे और बाजार में खरीददारी बढ़ेगी।