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300 मीटर दूर दुश्मन ढेर: इंसास राइफल की जगह लेगी AK-203, अमेठी में पांच लाख से ज्यादा राइफल उत्पादन को मंजूरी

Sat, 04 Dec 2021 11:30 AM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव Updated Sat, 04 Dec 2021 11:30 AM IST
सार

एके-203 असॉल्ट राइफल इंसास राइफल की जगह लेगी। यह इस तरह से डिजाइन की गई है, जिससे यह हल्की तो हो ही साथ ही चलाने में भी आसान हो। इसके इस्तेमाल से सैनिकों की युद्ध क्षमता और बढ़ जाएगी। 

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Government approved the the production of AK-203 assault rifles at Korwa, Amethi, it replace INSAS Rifle 
AK-203

विस्तार

उत्तर प्रदेश स्थित अमेठी के कोरवा में रूस के सहयोग से 300 मीटर तक लक्ष्य भेदने में सक्षम 5 लाख एके-203 असॉल्ट राइफलों का निर्माण किया जाएगा। केंद्र सरकार ने शनिवार को इसके निर्माण की योजना को मंजूरी दे दी। अन्य राइफलों के मुकाबले वजन में हल्की होने के साथ-साथ एके-203 चलाने में भी आसान है। ये तीन दशक से ज्यादा समय से पुरानी इंसास राइफल्स की जगह लेंगी। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा में 7.5 लाख एके-203 राइफलों के सौदे पर हस्ताक्षर होने हैं। इसी सौदे के तहत 5 लाख राइफलों का निर्माण भारत में होगा। 

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भारत-रूस का संयुक्त उद्यम
यह परियोजना भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम का हिस्सा है। शुरू में रूस टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए तैयार नहीं था लेकिन अब राजी हो गया है। हालांकि इसकी प्रक्रिया धीमी होने के कारण पहले 70 हजार रूस में निर्मित राइफलों की आपूर्ति भारत को होगी। इसके साथ-साथ अमेठी में राइफल निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी। प्रक्रिया शुरू होने 32 माह में सेना को इसकी आपूर्ति शुरू होगी।
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रोजगार के नए अवसर
यह परियोजना विभिन्न सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और अन्य रक्षा उद्योगों को कच्चे माल तथा घटकों की आपूर्ति के लिए व्यावसायिक अवसर प्रदान करेगी और इससे बड़े स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। 
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राइफल की खूबियां

  • 300 मीटर दूर सटीक निशाना साधा जा सकता है
  • एके-203 में 7.62×39एमएम की गोली का इस्तेमाल
  • बिना मैगजीन लगाए करीब 3.8 किलो है भार
  • हल्के वजन, मजबूत और बेहतरीन टेक्नोलॉजी से लैस 

 कैलिबर की तुलना में मारक क्षमता अधिक
कैलिबर की तुलना में इसकी मारक क्षमता अधिक है। एके-203 राइफल का इस्तेमाल ऑटोमैटिक और सेमी-ऑटोमैटिक दोनों तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी रेंज करीब 800 मीटर और मैगजीन 30 राउंड तक है। 



तीन दशक से शामिल इंसास की लेगी जगह 
7.62 X 39एमएम कैलिबर वाली एके-203 असॉल्ट राइफल तीन दशक से अधिक समय से शामिल इंसास राइफल की जगह लेने वाली है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, पहली 70 हजार राइफल की खेप में रूसी कलपुर्जे लगे होंगे। इसके बाद पूरी तरह से यह राइफल स्वदेशी हो जाएगी।

एके-203 असॉल्ट राइफल इंसास राइफल की जगह लेगी। यह इस तरह से डिजाइन की गई है, जिससे यह हल्की तो हो ही साथ ही चलाने में भी आसान हो। इसके इस्तेमाल से सैनिकों की युद्ध क्षमता और बढ़ जाएगी। 
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