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...तो 'इंस्पेक्टर' की भूमिका में रहेगा ड्रोन, कर्मियों पर नजर रखने के लिए निजी कंपनियां कर रहीं इस्तेमाल

Thu, 13 Aug 2020 06:31 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 13 Aug 2020 06:31 PM IST
सार

ड्रोन के इस्तेमाल, इसकी कार्यप्रणाली, लाइसेंसिंग और क्षेत्र को लेकर नागर विमानन मंत्रालय पहले ही अधिसूचना जारी कर चुका है। इसे मानवरहित यान प्रणाली (यूएएस) नियम 2020 का नाम दिया गया है...

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Government and Private companies are using drones for audit, keeping eyes on their employees
ड्रोन से निगरानी - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

सरकारी विभाग ही नहीं, बल्कि प्राइवेट क्षेत्र भी अब बड़े स्तर पर ड्रोन की सेवाएं लेने की तैयारी कर रहा है। सोशल ऑडिट के लिए ड्रोन का बड़े स्तर पर इस्तेमाल होगा। इसमें भी सरकारी और निजी, दोनों संस्थान शामिल रहेंगे। कोविड-19 के दौरान भी अनेक विभागों व बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने नागर विमानन मंत्रालय से विशेष मंजूरी लेकर शर्तों के साथ ड्रोन का उपयोग किया है।
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ड्रोन के इस्तेमाल, इसकी कार्यप्रणाली, लाइसेंसिंग और क्षेत्र को लेकर नागर विमानन मंत्रालय पहले ही अधिसूचना जारी कर चुका है। इसे मानवरहित यान प्रणाली (यूएएस) नियम 2020 का नाम दिया गया है। फाइनल ड्राफ्ट तैयार करने के लिए लोगों से सुझाव मांगे गए थे। अनेक लोगों ने अपने सुझावों में ड्रोन को सोशल ऑडिट का एक बड़ा जरिया बताया है।

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सरकारी विभाग और निजी कंपनी ड्रोन का विस्तृत क्षेत्र में इस्तेमाल करना चाह रहे हैं। यही वजह है कि नागर विमानन मंत्रालय जल्द से जल्द इसका फाइनल ड्राफ्ट तैयार करने में जुटा है। बहुत से लोगों और संस्थाओं ने इसकी कार्यप्रणाली को लेकर सुझाव दिए हैं।

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प्रारंभिक चरण में ड्रोन का इस्तेमाल कृषि, आपदा, स्वास्थ्य और विधि-प्रवर्तन के क्षेत्र में किया जाएगा। हालांकि इस बीच सामाजिक ऑडिट का एक नया फैक्टर आगे आया है। मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, कोरोना संक्रमण के दौरान यह देखा गया है कि बहुत से विभागों और निजी कंपनियों ने इजाजत लेकर सामाजिक ऑडिट के क्षेत्र में ड्रोन का इस्तेमाल किया है।

वजह सामाजिक ऑडिट में मैनपावर एक सबसे बड़ी कमी है। एक साथ इतने कार्यों और आदमियों पर नजर रखना बहुत मुश्किल है। बड़ी-बड़ी कंपनियों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन जांचने के लिए ड्रोन उड़ाए हैं। आईओसीएल जैसी कंपनी ने पाइपलाइन के कार्य पर नजर रखने के लिए नागर विमानन मंत्रालय से ड्रोन के इस्तेमाल की इजाजत मांगी थी।

करीब आधा दर्जन राज्यों में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए, यातायात पर नजर, कोविड केयर सेंटर, लॉकडाउन के नियमों का पालन व दूसरे कार्यों में भी ड्रोन का प्रयोग किया गया। इन्हीं कार्यों के लिए बहुत बड़ी वर्क फोर्स लगानी पड़ती थी, अब वही काम ड्रोन कर देता है।

शर्तों के साथ मिली ड्रोन उड़ाने की इजाजत...

हरियाणा, उत्तरप्रदेश, पंजाब, राजस्थान और कई दूसरे सीमावर्ती राज्यों में कृषि कार्यों के लिए ड्रोन उड़ाया गया। फसलों में दवा का छिड़काव, ड्रोन ने इस काम को बहुत आसान बना दिया। इन राज्यों को नागर विमानन मंत्रालय ने इजाजत दी है। इनके अलावा सरकारी क्षेत्र के हवाई प्रशिक्षण संस्थान व प्राइवेट सेंटरों को भी शर्तों के साथ ड्रोन उड़ाने की छूट दी गई।

फ्लाइंग एविएशन अकादमी- चेन्नई, एविएशन फ्लाइंग क्लब प्राइवेट लि.- अलीगढ़, एशिया पैसेफिक फ्लाइट ट्रेनिंग अकादमी- हैदराबाद, फाल्कन एविएशन ट्रेनिंग अकादमी हरियाणा सरकार का ट्रेनिंग ऑपरेशन, बांबे फ्लाइंग क्लब और आईओसीएल आदि को ड्रोन के इस्तेमाल की विशेष अनुमति दी गई है।

रिफाइनरी में सामाजिक व्यवस्था में होने वाली गड़बड़ी की निगरानी करने, कहीं से धुंए के रूप में कोई तकनीकी खराबी और गैस एवं कोयला उद्योग क्षेत्र में सोशल ऑडिट आदि के लिए ड्रोन का प्रयोग किया जा रहा है। पाइपलाइन के लंबे क्षेत्र की निगरानी किसी चुनौती से कम नहीं है। इसके लिए अब ड्रोन ने राह आसान बना दी है।

देश की ऊर्जा कंपनियों ने अपने कर्मियों को कोरोना वायरस से दूर रखने और कार्य संचालन को सुचारू तौर पर चलाने के लिए ड्रोन उड़ाए हैं। भारत पेट्रोलियम में श्रमिकों के व्यवहार पर नजर रखने के लिए लंबे क्षेत्र में ड्रोन ने उड़ान भरी हैं।



सामाजिक-सुरक्षा नियमों की धज्जियां न उड़ सकें, यह कदम इसलिए उठाया गया है। कंपनी ने अपने सभी संयंत्रों में ड्रोन को एक स्वच्छता निरीक्षक बनाकर तैनात करने की योजना बनाई है।

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