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एआई जोखिमों पर सरकार सख्त: जल्द आएगा रेगुलेशन पर कंसल्टेशन पेपर, अश्विनी वैष्णव बोले- टेक्नो-लीगल समाधान जरूरी
Thu, 08 Oct 2026 02:42 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Thu, 08 Oct 2026 02:42 PM IST
सार
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत एक महीने के भीतर एआई रेगुलेशन पर कंसल्टेशन पेपर जारी करेगा। इसका मकसद डीपफेक, साइबर सुरक्षा, यूजर सेफ्टी और मनोवैज्ञानिक नुकसान जैसे जोखिमों से निपटना है। उन्होंने कहा कि एआई को सिर्फ कानून से नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी और कानूनी उपायों के मेल से रेगुलेट करना होगा।
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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को नई दिल्ली में 'वर्ल्ड डेवलपमेंट रिपोर्ट 2026' जारी की। इस बीच उन्होंने कह कि भारत से कुछ ऐसे उदाहरण है जो असल में दिखाते हैं कि टेक्नोलॉजी कैसे आम लोगों की जिंदगी में बदलाव ला सकती है। इसके साथ ही कहा कि सरकार एक महीने के अंदर एआई रेगुलेशन पर एक कंसल्टेशन पेपर जारी करेगी।
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एआई को लेकर क्या बोले?
एआई पर वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट से जुड़े एक कार्यक्रम में कहा, 'यह कंसल्टेशन पेपर एआई रेगुलेशन का आधार बनेगा और अब भारत के लिए ऐसा फ्रेमवर्क बनाने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि मैं विभाग से रेगुलेशन पर केंद्रित कंसल्टेशन पेपर लाने के लिए कहूंगा, जिसमें सुरक्षा पर ध्यान दिया जाए। सबसे अहम बात एआई के इस्तेमाल से जुड़ी सुरक्षा है।'
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अन्य जिन क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा, उनमें एआई से होने वाले नुकसान (जैसे डीपफेक), इंसान को प्राथमिकता देने का नजरिया और स्किलिंग शामिल हैं। वैष्णव ने डीपफेक को 'एक ऐसी समस्या बताया जिससे समाज में बड़ी दिक्कतें पैदा हो सकती हैं'। कहा कि इनकी क्वालिटी हर दिन बेहतर होती जा रही है। उन्होंने कहा, 'लोग इन पर यकीन कर लेते हैं और इससे एक बहुत गलत मिसाल कायम होती है। इससे एक पूरी तरह गलत नैरेटिव बनता है और लोग गलत काम करने और गलत बातों पर यकीन करने के लिए बहकावे में आ जाते हैं।'
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'इंसानियत सबसे अहम हिस्सा होनी चाहिए'
कंसल्टेशन पेपर में स्किलिंग और किसी को भी पीछे न छोड़ने की प्रतिबद्धता भी शामिल होगी। उन्होंने कहा, 'जो बदलाव हुए हैं, उनमें इंसानियत सबसे अहम हिस्सा होनी चाहिए।' वैष्णव ने कहा कि सरकार का हमेशा से यह मानना रहा है कि एआई और दूसरी टेक्नोलॉजी को सिर्फ कानून से रेगुलेट नहीं किया जा सकता। मंत्री ने कहा, 'हमें एक टेक्नो-लीगल समाधान लाना होगा' और इसमें सभी स्टेकहोल्डर्स को शामिल करना होगा।
मंत्री ने साफ किया कि इंडस्ट्री को ही ज्यादातर जिम्मेदारी उठानी होगी। उन्होंने साइबर सिक्योरिटी, सुरक्षा, यूजर को नुकसान, मानसिक विकार और डीपफेक जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा, 'इंडस्ट्री को ही मुख्य जिम्मेदारी लेनी होगी।' वैष्णव ने कहा, 'इसलिए हम अब से एक महीने के अंदर वह पेपर जारी करेंगे और उसी के आधार पर रेगुलेशन की दिशा में आगे बढ़ेंगे।'
टेक्नोलॉजी से क्या बदलाव हुए?
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आगे कहा, 'मैं भारत से कुछ ऐसे उदाहरण देना चाहूंगा जो दिखाते हैं कि टेक्नोलॉजी कैसे आम लोगों की जिंदगी में बदलाव ला सकती है। मैं यहां बड़ी हस्तियों की नहीं, बल्कि सच में आम लोगों की जिंदगी की बात कर रहा हूं।
पहला उदाहरण खेती के क्षेत्र से है, बारामती का। आप में से कितनों ने इसके बारे में सुना है? तो बारामती में, सैटेलाइट डेटा, IoT सेंसर, मौसम के डेटा और खेत-स्तर के डेटा का इस्तेमाल करके गन्ने की पैदावार 40% तक बढ़ाई जा सकी। साथ ही मजदूरी का खर्च 20 से 40% कम हुआ और सबसे जरूरी बात, पानी और खाद का इस्तेमाल 30% कम हुआ।'