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सचिन वाजे की मुश्किले बढ़ीं: हाईकोर्ट ने जमानत पर लगाई रोक, पूछा- 90 हजार वेतन में मर्सिडीज-बीएमडब्ल्यू कैसे

Thu, 08 Oct 2026 09:52 PM IST
सुनील मेहरोत्रा अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: सुनील मेहरोत्रा Updated Thu, 08 Oct 2026 09:52 PM IST
सार

सचिन वाजे की जमानत पर सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने उनकी महंगी जीवनशैली को लेकर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने पूछा कि करीब 90 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाला एपीआई मर्सिडीज और बीएमडब्ल्यू जैसी गाड़ियां और ओबेरॉय होटल में 100 दिनों से ज्यादा ठहरने का खर्च कैसे उठा सकता था। एनआईए ने जमानत का विरोध किया। अदालत ने वाजे की जमानत पर 14 अक्तूबर तक रोक क्यों लगाई? 

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Antilia Case: Bombay High Court Questions Sachin Waze’s Mercedes, BMW and 100-Day Oberoi Hotel Stay
मुंबई के पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाजे के खर्च पर क्या सवाल उठे? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

मुंबई के पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाजे की जमानत के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने उनके रहन-सहन और खर्च को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने खास तौर पर इस बात पर सवाल किया कि करीब 90 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाला एक असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर मर्सिडीज और बीएमडब्ल्यू जैसी महंगी गाड़ियों का इस्तेमाल कैसे कर सकता था। अदालत ने ओबेरॉय होटल में 100 दिनों से ज्यादा समय तक ठहरने के खर्च पर भी सवाल किया। इसी मामले में हाईकोर्ट ने वाजे की जमानत पर लगी अंतरिम रोक 14 अक्तूबर तक बढ़ा दी है।

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अदालत ने मर्सिडीज और बीएमडब्ल्यू को लेकर क्या पूछा?
जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की पीठ एनआईए की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें वाजे को जमानत देने के विशेष अदालत के 29 सितंबर के आदेश को चुनौती दी गई है। सुनवाई के दौरान एनआईए की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने वाजे की महंगी गाड़ियों के इस्तेमाल से जुड़े गवाहों के बयान का हवाला दिया। इस पर अदालत ने पूछा कि एपीआई पद पर तैनात अधिकारी इतनी महंगी गाड़ियों का खर्च कैसे उठा सकता था। अदालत के सामने यह भी बताया गया कि वाजे मर्सिडीज से अपने कार्यालय जाते थे। उनका कार्यालय उसी इमारत में था, जहां पुलिस आयुक्त का कार्यालय था। इसी कार से मुख्यमंत्री के सरकारी आवास वर्षा बंगले जाने का भी जिक्र हुआ।
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ओबेरॉय होटल में 100 दिन रहने पर अदालत ने क्या कहा?
पीठ ने मुंबई के ओबेरॉय होटल में वाजे के 100 दिनों से ज्यादा समय तक ठहरने पर भी सवाल उठाया। जस्टिस गिरीश कुलकर्णी ने पूछा कि कोई व्यक्ति इतने महंगे होटल में तीन महीने से ज्यादा समय तक कैसे रह सकता है और इतने लंबे समय के लिए कमरा बुक कराने का खर्च कैसे उठा सकता है। इसके बाद अदालत ने एनआईए से पूछा कि एक एपीआई को कितना वेतन मिलता है। एनआईए के वकील अनिल सिंह ने बताया कि एपीआई का मासिक वेतन अधिकतम करीब 90 हजार रुपये हो सकता है। अदालत ने कहा कि वाजे की जीवनशैली, महंगी गाड़ियों और होटल में लंबे समय तक रहने जैसी परिस्थितियों को उनके खिलाफ लगाए गए अवैध वसूली के आरोपों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
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अदालत ने वाजे के आचरण को लेकर क्या टिप्पणी की?
पीठ ने कहा कि जब खाकी वर्दी पहनने वाले पुलिस अधिकारी पर ही अपराध में शामिल होने का आरोप हो, तो उसके आचरण, रवैये और ईमानदारी से जुड़े पहलुओं पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है। एनआईए का आरोप है कि वाजे 25 फरवरी 2021 को उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित आवास एंटीलिया के बाहर विस्फोटक सामग्री से भरी एसयूवी खड़ी करने की साजिश में शामिल थे। इस गाड़ी में जिलेटिन की छड़ें रखी गई थीं। एसयूवी चोरी होने की शिकायत करने वाले कारोबारी मनसुख हिरेन का शव 5 मार्च 2021 को ठाणे की एक खाड़ी में मिला था। जांच के दौरान वाजे की भूमिका सामने आने के बाद एनआईए ने उन्हें गिरफ्तार किया।

जिलेटिन की छड़ों के स्रोत पर भी क्यों पूछा सवाल?
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने एनआईए से यह भी पूछा कि एसयूवी में रखी गई जिलेटिन की छड़ों का स्रोत क्या था और क्या एजेंसी इसका पता लगा पाई है। एनआईए की ओर से बताया गया कि एजेंसी को अब तक इनके स्रोत के बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिली है। एनआईए ने यह आरोप भी लगाया कि वाजे ने जांच और पूछताछ में सहयोग नहीं किया। अदालत ने मामले की जांच और वाजे के खिलाफ लगाए गए आरोपों से जुड़े इन पहलुओं पर भी जानकारी मांगी। इस बीच जमानत का विरोध करते हुए एनआईए ने वाजे की रिहाई से जुड़े संभावित खतरों को अदालत के सामने रखा।

एनआईए जमानत का विरोध क्यों कर रही है?
एनआईए ने कहा कि अगर वाजे को जमानत पर रिहा किया जाता है तो गवाहों को प्रभावित करने, उन्हें डराने-धमकाने और सबूतों से छेड़छाड़ करने का खतरा हो सकता है। एजेंसी का कहना है कि जमानत की शर्तें भी इन आशंकाओं को पूरी तरह खत्म करने के लिए पर्याप्त नहीं होंगी। दूसरी ओर, हाईकोर्ट ने एनआईए से यह भी पूछा कि वाजे पांच साल से ज्यादा समय से जेल में हैं और अगर उन्हें कड़ी शर्तों के साथ जमानत दी जाती है तो इसमें क्या परेशानी हो सकती है। एनआईए ने हालांकि उनकी रिहाई का विरोध जारी रखा।

मामले की सुनवाई जल्द शुरू कराने को लेकर क्या कहा गया?
एनआईए ने अदालत को बताया कि वह मामले की सुनवाई जल्द शुरू कराने के लिए तैयार है। एजेंसी के मुताबिक, इस मामले में करीब 300 गवाह हैं। हालांकि मुकदमे को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए एनआईए लगभग 150 महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज कराने पर जोर देगी। एजेंसी का कहना है कि इससे मुकदमे की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हाईकोर्ट के सामने जमानत और मुकदमे की प्रगति दोनों से जुड़े पहलुओं पर सुनवाई हुई।

सचिन वाजे को जमानत कब मिली थी और एनआईए क्यों पहुंची हाईकोर्ट?
एनआईए ने सचिन वाजे को 13 मार्च 2021 को गिरफ्तार किया था। बाद में विशेष अदालत ने उन्हें जमानत दे दी। विशेष अदालत ने जमानत देते समय कहा था कि एनआईए यूएपीए के तहत प्रथम दृष्टया आतंकवाद का मामला साबित करने में नाकाम रही है। एनआईए ने विशेष अदालत के इस आदेश को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट ने फिलहाल वाजे की जमानत पर लगी अंतरिम रोक को 14 अक्तूबर तक बढ़ा दिया है। मामले में अगली सुनवाई भी 14 अक्तूबर को होगी। यानी फिलहाल वाजे को मिली जमानत का रास्ता रुका हुआ है।


अब 14 अक्तूबर को क्या होगा?
14 अक्तूबर को मामले की अगली सुनवाई होगी। तब हाईकोर्ट के सामने वाजे की जमानत और एनआईए की आपत्तियों से जुड़े तर्क आगे रखे जाएंगे। इस मामले में अदालत के सवालों का एक बड़ा हिस्सा वाजे की कथित जीवनशैली, महंगी गाड़ियों के इस्तेमाल और ओबेरॉय होटल में लंबे समय तक ठहरने से जुड़ा रहा। वहीं एनआईए ने गवाहों को प्रभावित करने और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका जताई है। फिलहाल हाईकोर्ट ने जमानत पर अंतरिम रोक बढ़ा दी है और 14 अक्तूबर को मामले की आगे सुनवाई होगी।

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