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शहरों में पानी बचाने की मुहिम: बारिश का पानी सहेजें, बचाएं जल निकाय; विशेषज्ञों ने बताया समाधान का रास्ता

Thu, 08 Oct 2026 09:30 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: राहुल कुमार Updated Thu, 08 Oct 2026 09:30 PM IST
सार

अर्बन अड्डा-2026 में विशेषज्ञों ने शहरी जल सुरक्षा के लिए वर्षाजल संचयन, जल निकायों के पुनर्जीवन, भूजल रिचार्ज और उपचारित पानी के पुन: उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने जल संकट और जलभराव को एक ही जल चक्र का हिस्सा बताते हुए नागरिक भागीदारी, जल ऑडिट और बेहतर नियोजन की जरूरत बताई।

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Water Security in Cities: Experts Push for Rainwater Harvesting and Reuse of Every Drop
अर्बन अड्डा-2026 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कमजोर मानसून और लगातार घटते भूजल के बीच शहरों में जल सुरक्षा को लेकर विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। इंडिया हैबिटेट सेंटर में 5 से 7 अक्तूबर तक आयोजित अर्बन अड्डा-2026 में गुरुजल की ओर से आयोजित विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों ने कहा कि शहरों को पानी के संकट और जलभराव को अलग-अलग समस्या मानने के बजाय एक ही जल चक्र के हिस्से के रूप में देखना होगा। वर्षाजल संचयन, जल निकायों के पुनर्जीवन, पानी के पुन: उपयोग और भूजल रिचार्ज पर विशेष जोर दिया गया।

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‘टुवर्ड्स वाटर-सिक्योर इंडिया : वॉकिंग द टॉक’ सत्र में गुरुजल की सह-संस्थापक डॉ. फौजिया तरन्नुम ने कहा कि देश में पानी को लेकर चर्चा और क्षमता निर्माण की कमी नहीं है, जरूरत इन चर्चाओं को जमीन पर उतारने की है। उन्होंने जल प्रबंधन को अलग-अलग विभागों तक सीमित रखने के बजाय एकीकृत तरीके से आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
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इंटैक के मनु भटनागर ने कहा कि शहरों का विकास स्थानीय भूगोल और प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था को ध्यान में रखकर होना चाहिए। एकांक्षा खंडूजा ने समुदायों को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि जल संरक्षण का भागीदार और संरक्षक बनाने की जरूरत बताई। अपराजिता वैभव ने कहा कि नागरिकों की भागीदारी योजना बनने के बाद नहीं, बल्कि योजना निर्माण के स्तर से होनी चाहिए।
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दूसरे दिन ‘सर्कुलैरिटी फॉर वाटर सिक्योरिटी : क्लोजिंग द लूप’ सत्र में विशेषज्ञों ने कहा कि शहरी जल संकट और जलभराव एक ही समस्या के दो पहलू हैं। बारिश के पानी को रोकने के लिए तालाब, झील, वेटलैंड और ब्लू-ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की जरूरत है। उपचारित पानी के पुन: उपयोग और भूजल दोहन को नियंत्रित करने पर भी जोर दिया गया।

विशेषज्ञों ने कहा कि शहरों और स्थानीय निकायों को यह पता होना चाहिए कि कितना पानी उपलब्ध है, कितना इस्तेमाल और बर्बाद हो रहा है तथा कितना अपशिष्ट जल पैदा हो रहा है। इसके आधार पर पूरे जलग्रहण क्षेत्र को ध्यान में रखकर योजना तैयार की जानी चाहिए।

इसी दौरान गुरुजल की कॉफी-टेबल बुक ‘रीकनेक्टिंग नेचर, रीकनेक्टिंग लाइव्स’ का विमोचन किया गया। गुरुजल के अनुसार वर्ष 2019 से अब तक 100 से अधिक तालाब, झील और अन्य जल निकायों के पुनर्जीवन पर काम किया गया है।

डेटा सेंटरों के लिए जल ऑडिट पर जोर
‘डेटा सेंटर्स एंड वाटर : पीपल, पॉलिसी एंड प्लानिंग’ सत्र में विशेषज्ञों ने डेटा सेंटरों में पानी के बढ़ते उपयोग पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि नए डेटा सेंटर की मंजूरी से पहले क्षेत्र की जल क्षमता, पानी की उपलब्धता और पुन: उपयोग की संभावनाओं का आकलन होना चाहिए। जल ऑडिट, मीटरिंग, पारदर्शी रिपोर्टिंग और उपचारित जल के पुन: उपयोग को प्राथमिकता देने की जरूरत बताई गई।


तीसरे दिन गुरुजल और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स की ओर से वाटर सिटीजंस काउंसिल, दिल्ली-एनसीआर चैप्टर की शुरुआती बैठक हुई। इसमें नागरिकों की भागीदारी, जल निगरानी, सरकार के साथ संवाद और सामूहिक कार्रवाई को मजबूत करने पर चर्चा हुई। प्रस्तावित काउंसिल के लिए 90 दिन की कार्ययोजना पर भी विचार किया गया। गुरुजल, अभिप्सा फाउंडेशन की पहल है, जिसकी स्थापना 2019 में गुरुग्राम जिला प्रशासन के साथ हुई थी। संस्था जल निकायों के पुनर्जीवन, भूजल रिचार्ज, वर्षाजल संचयन, अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग और जल-सुरक्षित संस्थानों के निर्माण पर काम करती है। 

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