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जीपीएफ: सरकार ने सामान्य भविष्य निधि पर मिलने वाले ब्याज की दरों में नहीं किया इजाफा, 6 वर्ष से 7.1 पर अटकी
Thu, 08 Oct 2026 07:33 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Thu, 08 Oct 2026 07:33 PM IST
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भविष्य निधि जीपीएफ
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
केंद्र सरकार ने 'एक अक्तूबर 2026' से '31 दिसंबर 2026' तक की तिमाही के लिए सामान्य भविष्य निधि 'जीपीएफ' पर मिलने वाले ब्याज की दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। कर्मचारियों को इस बार जीपीएफ की ब्याज दरों में वृद्धि होने की उम्मीद थी। वजह, 'जीपीएफ' की ब्याज दरों को छह साल से एक ही प्वाइंट '7.1' प्रतिशत पर बनाए रखा गया है। सरकार ने अब इस तिमाही के लिए भी जीपीएफ की ब्याज दर 7.1 फीसदी रखने की घोषणा की गई है।
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वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग ने इस वर्ष 'एक जनवरी से 31 मार्च' के लिए जनरल प्रोविडेंट फंड और उससे मिलते जुलते अन्य प्रोविडेंट फंड के लिए ब्याज की दरें घोषित की थीं। उस वक्त ब्याज दर 7.1 प्रतिशत रखी गई। साल के शुरू में सरकारी कर्मियों को केंद्र सरकार से जनरल प्रोविडेंट फंड की दरों में बदलाव किए जाने की उम्मीद थी, लेकिन वित्त मंत्रालय द्वारा ब्याज की दरों में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया। लंबे समय से ब्याज दरों को स्थिर रखा गया है। उसके बाद अप्रैल से जून तक और जुलाई से सितंबर तक की अवधि में भी ब्याज दरें उसी प्वाइंट पर अटकी रही।
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2021 में हुआ था अंतिम बार बदलाव
वर्ष 2021-22 के दौरान सामान्य भविष्य निधि तथा उसी प्रकार की अन्य निधियों के अभिदाताओं की कुल जमा रकमों पर दी जाने वाली ब्याज दर एक जुलाई 2021 से लेकर सितंबर 2021 तक 7.1 फीसदी रखी गई थी। आर्थिक कार्य विभाग के 19 अप्रैल 2021 को जारी संकल्प में भी सामान्य भविष्य निधि की राशि पर ब्याज दर 7.1 फीसदी तय की गई थी। उस वक्त देश में कोरोना की दूसरी लहर ने अपना कहर बरपा रखा था। तब केंद्रीय कर्मियों का महंगाई भत्ता भी 18 माह से रोका गया था। इसी वजह से कर्मियों को यह उम्मीद थी कि सरकार 'जीपीएफ' की राशि पर मिलने वाले ब्याज की दरों में बढ़ोतरी करेगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो सका। एक जुलाई 2020 से लेकर 30 सितंबर 2020 तक जीपीएफ की ब्याज दर 7.1 फीसदी रखी गई थी।
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ये दरें, सामान्य भविष्य निधि (केंद्रीय सेवाएं), अंशदायी भविष्य निधि (भारत), अखिल भारतीय सेवा भविष्य निधि, राज्य रेलवे भविष्य निधि (रक्षा सेवाएं), भारतीय आयुद्ध विभाग भविष्य निधि, भारतीय आयुद्ध कारखाना कामगार भविष्य निधि, भारतीय नौसेना गोदी कामगार भविष्य निधि, रक्षा सेवा अधिकारी भविष्य निधि और सशस्त्र सेना कार्मिक भविष्य निधि पर लागू होती हैं। जीपीएफ में जमा कर्मियों की राशि पर बैंकों के मुकाबले ब्याज अधिक मिलता है, इसलिए बहुत से कर्मचारी अपना शेयर बढ़ा देते हैं। जीपीएफ में ज्यादा वेतन इसलिए जमा कराया जाता था, ताकि सरकारी कर्मचारी अपनी बड़ी जरूरत के समय इसका इस्तेमाल कर सकें।
कर्मचारी अपने जीपीएफ में से 90 फीसदी राशि निकाल सकते हैं। हालांकि इस लेकर नियम-शर्तें बदलती रहती हैं। बच्चों की शिक्षा, शादी, घर बनाना या उसके लिए प्लाट खरीदना, फ्लैट लेना है, पुश्तैनी मकान की रिपेयर करानी है और घर का लोन चुकाना है, जैसे कामों में जीपीएफ राशि काम आ जाती है। चार साल पहले केंद्र सरकार ने एक वित्त वर्ष में जनरल प्रोविडेंट फंड में वार्षिक योगदान की सीमा 5 लाख रुपये तय कर दी थी। नए प्रावधान के अनुसार, एक वित्त वर्ष में जीपीएफ खाते में जमा की गई कुल राशि पांच लाख रुपये से ज्यादा नहीं हो सकती है।