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Hindi News ›   India News ›   Gopashtami 2023: Indian breed of Gir cow is in huge demand abroad, Nandi bull will go to Pashupatinath temple

Gopashtami 2023: भारतीय नस्ल की गीर गाय की विदेश में जबरदस्त डिमांड, भारत के नंदी बैल जाएंगे पशुपतिनाथ मंदिर

Sat, 18 Nov 2023 09:31 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 18 Nov 2023 09:31 PM IST
सार

Gopashtami 2023: पशुपतिनाथ मंदिर ट्रस्ट ने दिल्ली के कृष्ण-सुदामा गोरक्ष धाम गौशाला से गीर नस्ल के नंदी बैल की मांग की है ताकि वहां की स्थानीय गायों के साथ मेटिंग हो सके और भारत के गीर नस्ल की गायों का नेपाल में भी विस्तार हो सके।

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Gopashtami 2023: Indian breed of Gir cow is in huge demand abroad, Nandi bull will go to Pashupatinath temple
भारतीय नस्ल की गीर गायें। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोपाष्टमी से पहले भारतीय नस्ल की गीर गायों को लेकर एक सुखद खबर सामने आई है। दरअसल, इन गायों की डिमांड अब कई देशों में बढ़ रही है। पड़ोसी नेपाल भी अपने देश में जर्सी के बजाए भारतीय मूल की गायों को बढ़ावा दे रहा है। 

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पशुपतिनाथ मंदिर ट्रस्ट ने दिल्ली के कृष्ण-सुदामा गोरक्ष धाम गौशाला से गीर नस्ल के नंदी बैल की मांग की है ताकि वहां की स्थानीय गायों के साथ मेटिंग हो सके और भारत के गीर नस्ल की गायों का नेपाल में भी विस्तार हो सके। ट्रस्ट बदले में गोदावरी नदी के सवा लाख शालिग्राम स्वरूप विष्णु भगवान के पत्थर कृष्ण-सुदामा गौशाला को भेंट स्वरूप देगा। 
 

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कृष्ण-सुदामा गोरक्ष धाम की अगर बात करें तो ये गौशाला 135 साल पुरानी है जो नोएडा के सेक्टर-144 में कई एकड़ जमीन पर फैली हुई है। इस गौशाला की शुरुआत संत हरिदास ने 10 गायों की सेवा के साथ शुरू की थी। आज इस गौशाला में भारतीय नस्ल में विलक्षण प्रजाति की करीब 3000 गायें हैं। संत हरिदस की एक छोटी गौशाला दिल्ली में भी हैं जिसे राधा-कृष्ण मंदिर गौशाला के नाम से जाना जाता है। यहां करीब 80-90 गायें हैं। नेपाल जाने जाने वाले गीर नस्ल की नंदी को भी फिलहाल इसी गौशाला में रखा गया है। 
 

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20 नवंबर को गोपाष्टमी के मौके पर सभी गायों के साथ नेपाल जाने वाले नंदी की विशेष पूजा होगी। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और सांसद महेश शर्मा समेत कई गणमान्य लोग अतिथि के रूप पर मौजूद रहेंगे। गोपाष्टमी के बाद भारतीय नस्ल की गायों के विस्तार के लिए राधा-कृष्ण गौशाला से नंदी बैल विधिवत पूजन की बाद नेपाल के लिए रवाना हो जाएंगे। 
 

कृष्ण-सुदामा गोरक्ष धाम के संरक्षक महंत राम मंगल महाराज ने बताया कि 135 साल पहले गौ सेवा के लिए शुरू हुई यात्रा निरंतर जारी है। इस गौशाला में महाभारत काल की विलक्षण गाय दृष्टा भी मौजूद है जिसकी छह महीने आंखे खुली रहती हैं और छह महीने बंद रहती हैं। इसके अलावा 56-56 लाख की काली कपिला और स्वर्ण कपिला भी इस गौशाला में है। गौशाला में मृगनयनी जैसी अद्भुत गाय भी है जिसकी सेवा के लिए देशभर के संत यहा आंते हैं।

कपिला और मृगनयनी के बारे में विस्तार से बताते हुए महंत राम मंगल महाराज ने बताया कि कपिला गाय सीता की स्वरूप मानी जाती हैं। मृगनयनी विलक्षण गाय होती है जिसकी त्वचा मृग के समान है और जिसके माथे पर त्रिपुण्ड बना हुआ है। जिसकी सेवा से यश और कीर्ति की प्राप्ति होती है। राम मंगल महाराज ने बताया कि यहां के गोबर और मूत्र डाबर, बैद्यनाथ सहित कई  दावा कंपनियां ले जाती है। उन्होंने बताया कि हम सरकार से कोई सहायता नहीं लेते हैं उल्टा हम सरकार की मदद करते है जैसे यहां की A1, A2 दूध और गौमूत्र दवा के लिए सरकार के जरिए विदेश में भेजे जाते हैं।

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