Corona: ग्लेनमार्क के नेजल स्प्रे पर विशेषज्ञ समिति ने उठाए थे सवाल, कंपनी ने कहा- सभी जरूरी जानकारी दे रहे
सरकार की विशेषज्ञ समिति के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ग्लेनमार्क की ओर से यह दावा किया गया था कि नाइट्रिक ऑक्साइड युक्त नेजल स्प्रे वायरस को शरीर पर हावी होने से रोकने में मददगार है। हालांकि, जब उत्पाद से जुड़े वैज्ञानिक तथ्य और अन्य साक्ष्य की समीक्षा की गई तो वे संतुष्ट करने के लायक नहीं थे।
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फार्मा कंपनी ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स ने नाइट्रिक ऑक्साइड युक्त नैजल स्प्रे का बचाव किया है। कंपनी के अनुसार उसने NONS (नाइट्रिक ऑक्साइड नोजल स्प्रे) को 9 फरवरी 2022 को ही वृद्ध मरीजों के इलाज के लिए लॉन्च कर दिया था। बता दें कि पिछले वर्ष नवंबर माह की बैठक में विशेषज्ञ समिति ने उत्पाद पर सवाल खड़े करते हुए कंपनी से कुछ साक्ष्य मांगे थे।
समिति के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ग्लेनमार्क की ओर से यह दावा किया गया था कि नाइट्रिक ऑक्साइड युक्त नेजल स्प्रे वायरस को शरीर पर हावी होने से रोकने में मददगार है। हालांकि जब उत्पाद से जुड़े वैज्ञानिक तथ्य और अन्य साक्ष्य की समीक्षा की गई तो वे संतुष्ट करने के लायक नहीं थे।
अब कंपनी ने दावा किया है कि NONS के निर्माण और मार्केटिंग के लिए उसे फरवरी 2022 में ही ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DGCI) से त्वरित अनुमोदन प्रक्रिया के तहत अप्रूवल मिल गया था। ब्रिटेन, कनाडा और अमेरिका के यूटा विश्वविद्यालय में हुए अध्ययनों में भी इसे असरकारी पाया गया था।
कंपनी ने कहा है कि अनुमोदन और लॉन्चिंग के बाद ग्लेनमार्क ने ओवर द काउंटर या ओटीसी के रूप में अनुमोदन के लिए आवेदन किया है। इसके लिए कंपनी सभी आवश्यक विवरण प्रस्तुत करने के लिए समिति के साथ काम कर रही है। कंपनी अनुमोदन प्रक्रिया के तहत सभी नियामकीय आवश्यकताओं का पालन करेगी।
पिछले महीने हुई थी बैठक
दरअसल, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के अधीन विशेषज्ञ कार्य समिति (एसईसी) की हर माह कोरोना संक्रमण को लेकर बैठक हो रही है। बीते 20 जनवरी को हुई बैठक में समिति के सदस्यों ने कई अहम प्रस्तावों पर चर्चा की जिसमें से दो प्रस्ताव नाइट्रिक ऑक्साइड युक्त नेजल स्प्रे से जुड़े थे।
अभी भी संक्रमित मिल रहे लोग
बृहस्पतिवार को स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि कोरोना संक्रमण के मामले अभी भी आ रहे हैं। हालांकि पहले की तुलना में यह संख्या बेहद कम है। अभी 1797 मरीज देश में उपचाराधीन हैं।