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राज्यसभा: आजाद की वापसी कठिन, खरगे हो सकते हैं विकल्प
Wed, 10 Feb 2021 04:26 AM IST
Jeet Kumar
अनूप वाजपेयी, नई दिल्ली।
अनूप वाजपेयी, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Wed, 10 Feb 2021 04:26 AM IST
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गुलाम नबी आजाद
- फोटो : पीटीआई
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राज्यसभा में वरिष्ठ सदस्यों ने जिस तरह गुलाम नबी आजाद की वापसी की पैरवी और विकल्प को लेकर सवाल उठाए हैं,उसका उत्तर कांग्रेस नेतृत्व को जल्द देना होगा।15 फरवरी को रिटायर हो रहे गुलाम नबी आजाद की वापसी का फिलहाल कोई रास्ता नहीं दिख रहा है। राज्यसभा की एक मात्र सीट केरल में अप्रैल में खाली होगी।
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21 अप्रैल को केरल की तीन राज्यसभा सीटें खाली होगीं, जिसमें एक कांग्रेस की है। ऐसे में आजाद की वापसी एक उम्मीद जरूर दिखती है लेकिन फिलहाल तो विपक्ष के नेता के रूप में उनका विकल्प देना होगा। 13 फरवरी को बजट सत्र का पहला चरण समाप्त हो रहा है। 8 अप्रैल को बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले विपक्ष का नेता चुना जाना है।
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आजाद की वापसी का रास्ता पिछले साल जून में पहले ही बंद हो गया था। जब कर्नाटक और राजस्थान से मल्लिकार्जुन खरगे, केसी.वेणुगोपाल, राजीव साटव को नेतृत्व ने राज्यसभा के लिए चुना था।
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आजाद को तभी उम्मीद थी कि नेतृत्व उनके शेष रह गए कार्यकाल को देखते हुए तभी मौका देगी। उसके बाद ही कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ आजाद समेत 23 नेताओं के बगावती तेवर और नाराजगी सामने आई थी।
दूसरी ओर कांग्रेस नेतृत्व ने जून में ही गुलाम नबी आजाद का विकल्प तय कर लिया था। मल्लिकार्जुन खरगे जो लोकसभा में दल के नेता थे और लोकसभा चुनाव हार गए थे उन्हें राज्यसभा में वापसी कराई। उनके पास संसदीय कार्य का अनुभव भी है और वरिष्ठ भी हैं। अगर सब कुछ ठीक रहा तो नेतृत्व उन्हें विपक्ष के नेता की जिम्मेदारी सौंप देगी।