{"_id":"5c62dd9bbdec224bff242165","slug":"ghulam-nabi-azad-speech-in-the-presence-of-the-pm-modi","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"प्रधानमंत्री की मौजूदगी में गुलाम नबी आजाद छोड़ रहे थे जहर बुझे तीर","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
प्रधानमंत्री की मौजूदगी में गुलाम नबी आजाद छोड़ रहे थे जहर बुझे तीर
Tue, 12 Feb 2019 08:22 PM IST
शशिधर पाठक
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
Published by: शशिधर पाठक
Updated Tue, 12 Feb 2019 08:22 PM IST
विज्ञापन
गुलाम नबी आजाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संसद है। राजनीतिक दलों की महापंचायत। राजनीति का अड्डा है। नीति, देश की दशा दिशा तय होती है। राजनीति भी होती है। संसद का बजट सत्र बस दो दिन का बचा है। इसमें भी खूब राजनीति हो रही है। संसद के केंद्रीय कक्ष में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की तस्वीर लगी है। आज इसका राष्ट्रपति ने उद्घाटन किया। इस अवसर पर अटल बिहारी वाजपेयी के बारे में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री समेत अन्य गणमान्य ने अपने विचार रखे। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद भी दो शब्द कहने आए। अपने संक्षिप्त भाषण में अटल जी का चित्रण करते हुए गुलाम नबी आजाद ने जमकर जहर बुझे तीर छोड़े।
समय कम था। भाषण भी छोटा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी केंद्रीय कक्ष में थे। राष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष, उपराष्ट्रपति और दोनों सदनों के सांसद भी थे। गुलाम नबी आजाद ने सबकी मौजूदगी में पूर्व प्रधानमंत्री के कामकाज, व्यवहार, राजनीति, दर्शन सब पर कुछ शब्द ही कहे। लेकिन वह अपने छोटे से भाषण में वह सबकुछ कह गए, जो कहना चाहते थे। कहा जा सकता है कि जो प्रधानमंत्री और सत्ता पक्ष को सुनाना चाहते थे।
गुलाम नबी ने अटल जी को बताया महायोद्धा
संसद के केंद्रीय कक्ष में राजनीति और समाजिक जगत के महायोद्धाओं के चित्र लगे हैं, जिन्होंने भारत की आजादी में अपना योगदान दिया है। यहां पर चार पूर्व प्रधानमंत्रियों, पं. जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी के चित्र लगे हैं, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता और कुछ ने देश की एकता, अखंडता के लिए अपना योगदान दिया। इन महायोद्धाओं के बीच में एक और बड़े महायोद्धा जो हमेशा ज्यादातर विपक्ष में रहे और प्रधानमंत्री रहे उनका भी चित्र माननीय राष्ट्रपति के हाथों लगा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
समय कम था। भाषण भी छोटा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी केंद्रीय कक्ष में थे। राष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष, उपराष्ट्रपति और दोनों सदनों के सांसद भी थे। गुलाम नबी आजाद ने सबकी मौजूदगी में पूर्व प्रधानमंत्री के कामकाज, व्यवहार, राजनीति, दर्शन सब पर कुछ शब्द ही कहे। लेकिन वह अपने छोटे से भाषण में वह सबकुछ कह गए, जो कहना चाहते थे। कहा जा सकता है कि जो प्रधानमंत्री और सत्ता पक्ष को सुनाना चाहते थे।
विज्ञापन
गुलाम नबी ने अटल जी को बताया महायोद्धा
संसद के केंद्रीय कक्ष में राजनीति और समाजिक जगत के महायोद्धाओं के चित्र लगे हैं, जिन्होंने भारत की आजादी में अपना योगदान दिया है। यहां पर चार पूर्व प्रधानमंत्रियों, पं. जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी के चित्र लगे हैं, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता और कुछ ने देश की एकता, अखंडता के लिए अपना योगदान दिया। इन महायोद्धाओं के बीच में एक और बड़े महायोद्धा जो हमेशा ज्यादातर विपक्ष में रहे और प्रधानमंत्री रहे उनका भी चित्र माननीय राष्ट्रपति के हाथों लगा है।
विज्ञापन
छोड़े जहर बुझे तीर
-गुलाम नबी आजाद ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी हमेशा अपने भाषणों के लिए याद किए जाएंगे। अटल जी इसलिए भी याद किए जाएंगे कि उनके (अटल) होठों पर विपक्ष के लिए हमेशा विरोध रहता था, लेकिन क्रोध नहीं रहता था।
-आजाद ने कहा समय कम है, इसलिए वह दो-तीन संदर्भ में अपनी बात कहना चाह रहे हैं। उन्होंने इसमें एक हवाला 1997 में स्वतंत्रता दिवस की 50 वीं वर्षगांठ पर अटल जी के भाषण का दिया।
-आजाद ने कहा कि अटल जी ने अपने भाषण में कहा कि 50 साल में हमने प्रगति की, इससे कोई इनकार नहीं कर सकता। चुनाव के दौरान वोट मांगते हुए सरकार के खिलाफ कठोर से कठोर प्रहार करते हुए पुरानी सरकार की आलोचनाओं के लिए हमारे पास बहुत सामग्री थी, लेकिन मैंने (अटल) हर जगह कहा कि मैं उन लोगों में से नहीं हूं जो 50 साल की उपलब्धियों पर पानी फेर दें। ऐसा करना देश के प्रशासन पर पानी फेरना, किसानों के साथ अन्याय, मजदूरों के साथ ज्यादती और आम आदमी के साथ अच्छा व्यवहार नहीं कहा जाएगा।
-गुलाम नबी ने 1999 के चुनाव का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि अटल जी ने कहा था कि धर्म और जाति के नाम देश में ध्रुवीकरण नहीं होना चाहिए। राजनीति दो खेमें में नहीं बंटनी चाहिए कि जहां आपस में बातचीत न हो सके।
-अंत में दो लाइन सुनाई। कहा मेरे प्रभु इतनी ऊंचाई कभी मत देना कि एक दूसरे के गले न लग सकें।
-आजाद ने कहा समय कम है, इसलिए वह दो-तीन संदर्भ में अपनी बात कहना चाह रहे हैं। उन्होंने इसमें एक हवाला 1997 में स्वतंत्रता दिवस की 50 वीं वर्षगांठ पर अटल जी के भाषण का दिया।
-आजाद ने कहा कि अटल जी ने अपने भाषण में कहा कि 50 साल में हमने प्रगति की, इससे कोई इनकार नहीं कर सकता। चुनाव के दौरान वोट मांगते हुए सरकार के खिलाफ कठोर से कठोर प्रहार करते हुए पुरानी सरकार की आलोचनाओं के लिए हमारे पास बहुत सामग्री थी, लेकिन मैंने (अटल) हर जगह कहा कि मैं उन लोगों में से नहीं हूं जो 50 साल की उपलब्धियों पर पानी फेर दें। ऐसा करना देश के प्रशासन पर पानी फेरना, किसानों के साथ अन्याय, मजदूरों के साथ ज्यादती और आम आदमी के साथ अच्छा व्यवहार नहीं कहा जाएगा।
-गुलाम नबी ने 1999 के चुनाव का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि अटल जी ने कहा था कि धर्म और जाति के नाम देश में ध्रुवीकरण नहीं होना चाहिए। राजनीति दो खेमें में नहीं बंटनी चाहिए कि जहां आपस में बातचीत न हो सके।
-अंत में दो लाइन सुनाई। कहा मेरे प्रभु इतनी ऊंचाई कभी मत देना कि एक दूसरे के गले न लग सकें।
क्यों कहा गुलाम नबी ने?
गुलाम नबी के इस भाषण पर विपक्षी दलों के सांसद मुस्कराकर कह रहे हैं कि भाषण था, दे दिया। अब ज्यादा जानना हो तो उनसे पूछिए। भाजपा के सांसद भी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देना चाहते, लेकिन चेहरे पर एक बदला हुआ भाव जरूर उमड़ता दिखाई दिया। इस संक्षिप्त भाषण के निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि चतुर गुलाम नबी आजाद ने राजनीति की भाषा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीति को आईना दिखाया है।
समझा जा रहा है कि जिस तरह से प्रधानमंत्री ने लोकसभा में राष्ट्रपति अभिभाषण पर चर्चा पर जवाब देने के दौरान विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खडगे के साथ व्यवहार किया वह भी इसमें शामिल है। एक राज्यसभा सांसद का कहना है कि पक्ष और विपक्ष की राजनीति, सत्ता संघर्ष चलता रहता है, लेकिन कमर के नीचे वार करने, व्यवहार करने की एक मर्यादा होती है। सूत्र का कहना है कि मौजूदा समय में यह सब व्यवहार में नहीं है। मुझे लग रहा है कि गुलाम नबी आजाद अटल जी के बहाने यह बताना चाह रहे थे।
समझा जा रहा है कि जिस तरह से प्रधानमंत्री ने लोकसभा में राष्ट्रपति अभिभाषण पर चर्चा पर जवाब देने के दौरान विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खडगे के साथ व्यवहार किया वह भी इसमें शामिल है। एक राज्यसभा सांसद का कहना है कि पक्ष और विपक्ष की राजनीति, सत्ता संघर्ष चलता रहता है, लेकिन कमर के नीचे वार करने, व्यवहार करने की एक मर्यादा होती है। सूत्र का कहना है कि मौजूदा समय में यह सब व्यवहार में नहीं है। मुझे लग रहा है कि गुलाम नबी आजाद अटल जी के बहाने यह बताना चाह रहे थे।