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Ghulam Nabi Azad: गुलाम नबी आजाद का कांग्रेस पर वार, कहा- राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से मिलने से DNA नहीं बदलता
Sat, 03 Sep 2022 10:36 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Sat, 03 Sep 2022 10:36 PM IST
सार
पूर्व राज्यसभा सांसद गुलाम नबी आजाद ने पिछले महीने कांग्रेस के साथ अपने पांच दशक लंबे रिश्ते को समाप्त कर दिया था। उन्होंने पांच पन्नों के पत्र में अपना इस्तीफा सोनिया गांधी को भेजा था। जिसमें उन्होंने कांग्रेस पर कई आरोप भी लगाए थे। जिसके बाद कांग्रेस ने गुलाम नबी आजाद द्वारा पार्टी नेतृत्व की आलोचना करने पर पलटवार किया था।
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गुलाम नबी आजाद, राहुल गांधी और सोनिया गांधी।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कांग्रेस के पूर्व वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने शनिवार को अपनी पूर्व पार्टी पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से मिलने और बात करने से उनका डीएनए नहीं बदलता है। उन्होंने निशाना साधते हुए आगे कहा कि बीते साल राज्यसभा से उनकी विदाई के मौके पर 22 पार्टियों के सांसदों ने मेरे बारे में बात की, लेकिन पीएम मोदी ने जो कहा केवल उसे ही उजागर किया गया। गुलाम नबी आजाद ने प्रतिक्रिया राजधानी दिल्ली में एक पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में कही।
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नहीं बदलता डीएनए
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि आप अन्य राजनीतिक दलों के लोगों से मिलते हैं और उनसे बात करते हैं, तो यह आपके डीएनए को नहीं बदलता है। इस दौरान अफसोस जताते हुए उन्होंने कहा कि आजकल राजनीतिक दल युद्ध में लग गए हैं।
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राज्यसभा से विदाई के मौके पर पीएम मोदी द्वारा दिए गए भावात्मक भाषण को याद करते हुए पूर्व कांग्रेसी नेता ने कहा कि यह एक परंपरा है कि हर दो साल में एक तिहाई सदस्य राज्यसभा से सेवानिवृत्त होते हैं और उस मौके पर विभिन्न दलों के सांसद भाषण देते हैं, लेकिन लगता है कि भारत की मिश्रित संस्कृति पिछले कुछ वर्षों में बदल गई है।
साझी संस्कृति को किया याद
उन्होंने कहा कि अभी तक हिंदू और मुसलमान को एक साथ रहे। हिंदुओं के लिए अरबी और मुसलमानों के लिए गीता का अध्ययन करना असामान्य नहीं था। यह हमारे देश की मिश्रित संस्कृति थी। उन्होंने आगे कहा कि इससे पहले, दिल्ली के राजनीतिक हलकों में दो त्यौहार मनाए जाते थे -ईद मिलन और दिवाली मिलन। दोनों मौकों पर दोनों पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी और इंदिरा गांधी आते थे, लेकिन अब राजनीतिक दल ऐसा व्यवहार करते हैं जैसे वे युद्ध में हैं। उन्होंने निराशा जताते हुए कहा कि दुर्भाग्य से हम सभी विभाजित हैं और यह दुखद है।
पिछले महीने दे दिया था इस्तीफा
गौरतलब है कि पूर्व राज्यसभा सांसद गुलाम नबी आजाद ने पिछले महीने कांग्रेस के साथ अपने पांच दशक लंबे रिश्ते को समाप्त कर दिया था। उन्होंने पांच पन्नों के पत्र में अपना इस्तीफा सोनिया गांधी को भेजा था। जिसमें उन्होंने कांग्रेस पर कई आरोप भी लगाए थे। जिसके बाद कांग्रेस ने गुलाम नबी आजाद द्वारा पार्टी नेतृत्व की आलोचना करने पर पलटवार किया था। पार्टी ने उनके इस्तीफे को उनके राज्यसभा कार्यकाल के अंत से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि उनके विश्वासघात से उनके असली चरित्र का पता चलता है और उनका डीएनए 'मोडी-फाइड' है।
कांग्रेस ने लगाए थे ये आरोप
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ट्वीट में लिखा था कि एक व्यक्ति जिसके साथ कांग्रेस नेतृत्व द्वारा सबसे अधिक सम्मान के साथ व्यवहार किया गया है, उसने अपने शातिर व्यक्तिगत हमलों से धोखा दिया है जो उसके असली चरित्र को उजागर करता है। जीएनए (गुलाम नबी आजाद) का डीएनए 'मोडी-फाइड' है।
कल करेंगे नई पार्टी की शुरुआत
आजाद ने 26 अगस्त को संगठनात्मक चुनावों से पहली अपनी प्राथमिक सदस्यता सहित पार्टी के के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने नेतृत्व पर पार्टी के आंतरिक चुनावों के नाम पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया। उन्होंने अपने इस्तीफे में राहुल गांधी की भी कड़ी आलोचना की थी। अब वह रविवार को जम्मू से अपनी नई राजनीतिक यात्रा शुरू करेंगे, जहां वह अपनी पार्टी की पहली इकाई स्थापित करेंगे।