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Kochi Water Metro: कोच्चि वाटर मेट्रो से प्रभावित हुए जर्मन राजदूत, परियोजना में जर्मनी के योगदान पर जताई खुशी
Fri, 09 Jun 2023 12:36 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Fri, 09 Jun 2023 12:36 AM IST
सार
हाई कोर्ट वाटर मेट्रो टर्मिनल से दोपहर में वाईपिन तक यात्रा करने वाले एकरमैन ने वॉटर मेट्रो और इसकी स्वदेशी मेड इन इंडिया तकनीक की प्रशंसा की।
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German Ambassador Philip Ackermann
- फोटो : PTI
विस्तार
कोच्चि वॉटर मेट्रो से प्रभावित जर्मन राजदूत फिलिप एकरमैन ने गुरुवार को कहा कि यह बंदरगाह शहर के बुनियादी ढांचे में एक बड़ा सुधार था और उन्हें खुशी है कि उनके देश ने इस परियोजना में योगदान दिया।
हाई कोर्ट वाटर मेट्रो टर्मिनल से दोपहर में वाईपिन तक यात्रा करने वाले एकरमैन ने वॉटर मेट्रो और इसकी स्वदेशी मेड इन इंडिया तकनीक की प्रशंसा की। वॉटर मेट्रो में सवार होने के बाद जर्मन राजूदत ने संवाददाताओं से कहा मैं पूरी तरह से प्रभावित हूं। यह एक अद्भुत अनुभव था। यह एक अत्याधुनिक वॉटर मेट्रो है। मुझे लगता है कि यह कोच्चि के बुनियादी ढांचे में एक बड़ा सुधार है और मैं इसकी तकनीक से बहुत प्रभावित हूं जो भारत में बनाई गई है।
एकरमैन ने कहा कि यह अच्छा है कि वॉटर मेट्रो बिजली से चलती है क्योंकि यह जलीय वनस्पतियों और जीवों को परेशान नहीं करेगी। जर्मन राजदूत ने परियोजना में अपने देश के योगदान पर प्रसन्नता व्यक्त की क्योंकि 75 प्रतिशत से 80 प्रतिशत वित्त पोषण जर्मनी स्थित केएफडब्ल्यू विकास बैंक से आया था। उन्होंने कहा कि शहरों को स्मार्ट बनाना होगा और उनमें रहने को अधिक टिकाऊ बनाना होगा और कोच्चि वाटर मेट्रो उस दिशा में सबसे ठोस परियोजनाओं में से एक थी।
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हाई कोर्ट वाटर मेट्रो टर्मिनल से दोपहर में वाईपिन तक यात्रा करने वाले एकरमैन ने वॉटर मेट्रो और इसकी स्वदेशी मेड इन इंडिया तकनीक की प्रशंसा की। वॉटर मेट्रो में सवार होने के बाद जर्मन राजूदत ने संवाददाताओं से कहा मैं पूरी तरह से प्रभावित हूं। यह एक अद्भुत अनुभव था। यह एक अत्याधुनिक वॉटर मेट्रो है। मुझे लगता है कि यह कोच्चि के बुनियादी ढांचे में एक बड़ा सुधार है और मैं इसकी तकनीक से बहुत प्रभावित हूं जो भारत में बनाई गई है।
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एकरमैन ने कहा कि यह अच्छा है कि वॉटर मेट्रो बिजली से चलती है क्योंकि यह जलीय वनस्पतियों और जीवों को परेशान नहीं करेगी। जर्मन राजदूत ने परियोजना में अपने देश के योगदान पर प्रसन्नता व्यक्त की क्योंकि 75 प्रतिशत से 80 प्रतिशत वित्त पोषण जर्मनी स्थित केएफडब्ल्यू विकास बैंक से आया था। उन्होंने कहा कि शहरों को स्मार्ट बनाना होगा और उनमें रहने को अधिक टिकाऊ बनाना होगा और कोच्चि वाटर मेट्रो उस दिशा में सबसे ठोस परियोजनाओं में से एक थी।
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