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Genome Sequencing: भारत में जीनोम सीक्वेंसिंग दो लाख पार, US और UK के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बना

Wed, 28 Dec 2022 05:35 AM IST
देव कश्यप परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली।
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Wed, 28 Dec 2022 05:35 AM IST
सार

जीआईएसएआईडी रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बीते 60 दिन में करीब 150 से ज्यादा जीनोम सीक्वेंसिंग की गई हैं और उनमें किसी में भी बीएफ.7 उप वैरिएंट की मौजूदगी नहीं मिली है।

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Genome sequencing in India crosses 2 lakh, becomes the third largest country in the world after US and UK
जीनोम सिक्वेंसिंग (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : एएनआई (फाइल फोटो)

विस्तार

कोरोना वायरस की वंशावली पर नजर रखने के लिए भारत ने एक और उपलब्धि हासिल की है। भारतीय वैज्ञानिकों ने कोरोना मरीजों के सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग करते हुए दो लाख का आंकड़ा पार कर लिया है। इसी के साथ ही अमेरिका और यूके के बाद भारत दो लाख से अधिक जीनोम सीक्वेंसिंग करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है।

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ग्लोबल इनीशिएटिव ऑन शेयरिंग ऑल इन्फलुएंजा डाटा (जीआईएसएआईडी) रिपोर्ट के अनुसार भारत में बीते 60 दिन में करीब 150 से ज्यादा जीनोम सीक्वेंसिंग की गई हैं और उनमें किसी में भी बीएफ.7 उप वैरिएंट की मौजूदगी नहीं मिली है। सर्वाधिक 19 फीसदी मरीजों के सैंपल में ओमिक्रॉन से निकले एक्सबीबी.3 नामक उप वैरिएंट का पता चला है, जिसके प्रभावों के बारे में फिलहाल जानकारी बेहद कम है।
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जीआईएसएआईडी की रिपोर्ट के अनुसार भारत में जनवरी 2021 से कोरोना सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग शुरू हुई थी और अब तक 2,23,588 सीक्वेंस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत ने साझा किए हैं। इससे अधिक अमेरिका 43 और यूके 2.88 लाख सीक्वेंस साझा कर चुका है। दुनियाभर के देशों ने अब तक इस मंच पर 1,43,68,302 जीनोम सीक्वेंस साझा किए हैं।  दरअसल, जीआईएसएआईडी एक अंतरराष्ट्रीय मंच है, जहां अलग-अलग देश कोरोना के सीक्वेंस साझा करते हैं। इसी मंच की सहायता से विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और अन्य महामारी विशेषज्ञ वायरस के नए-नए स्वरूपों के बारे में जानकारी एकत्रित कर पा रहे हैं। ये मंच 10 जनवरी 2020 में शुरू किया गया था।
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75 फीसदी सीक्वेंस में मिले एस जीन म्यूटेशन भारत में मौजूद
रिपोर्ट के अनुसार, बीते 30 दिन के दौरान दुनिया में किए गए 75 फीदी जीनोम सीक्वेंस में जितने भी एस जीन म्यूटेशन मिले हैं, वह सभी भारत में मौजूद हैं। एस जीन म्यूटेशन ही किसी वायरस की आनुवांशिक स्थिति में बदलाव का कारण होते हैं और जन स्वास्थ्य के लिहाज से यह आपात स्थिति भी पैदा कर सकते हैं।

इसलिए जरूरी है जीनोम सीक्वेंसिंग
भारत के जीनोम एक्सपर्ट डॉ. विनोद कुमार का कहना है कि किसी भी वायरस का तोड़ निकालने के लिए उसकी आनुवांशिक संरचना का पता होना बहुत जरूरी है। इससे हम पता लगा सकते हैं कि आखिर उसका कैसा व्यवहार है? जब तक इन बातों का पता नहीं चलता है तब तक जांच, इलाज, टीका किसी की खोज नहीं हो सकती है। इसलिए जीनोम सीक्वेंस पर इतना जोर दिया जा रहा है क्योंकि अब तक हम जितने भी वैरिएंट के बारे में जानते हैं वह सभी इनके जरिए मुमकिन हो पाया है।

नए मामलों में आई कमी, 24 घंटे में मिले 157 मरीज, कोई मौत नहीं
कोरोना के दैनिक मामलों में कमी दर्ज की गई है। बीते दिन देश में 157 नए मामले सामने आए हैं। इस दौरान किसी भी रोगी की मौत नहीं हुई है। इसी के साथ कोरोना के सक्रिय मरीजों की संख्या अब 3421 रह गई है। देश में संक्रमण के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 4,46,77,459 पर पहुंच गई है। मंगलवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि देश में अब तक संक्रमण से मरने वालों की संख्या बढ़कर 5,30,696 हो गई है। इनके अलावा, ठीक होने की राष्ट्रीय दर 98.80 प्रतिशत है। संक्रमण की दैनिक दर 0.32 प्रतिशत, जबकि साप्ताहिक संक्रमण दर 0.18 प्रतिशत है। मंत्रालय के अनुसार, बीते दिन 49,464 सैंपल की कोविड-19 संबंधी जांच की गई थी। देश में अभी तक कुल 4,41,43,342 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं, जबकि कोविड-19 से मृत्यु दर 1.19 प्रतिशत है। वहीं, राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अभी तक कोविड-19 रोधी टीकों की 220.06 करोड़ खुराक दी जा चुकी हैं।


तीनों खुराक लेने वालों को बीमा नवीनीकरण प्रीमियम में मिले छूट
कोरोना मामले बढ़ने के साथ ही भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) ने बीमा कंपनियों से कोविड-19 टीके की तीनों खुराक ले चुके लोगों को साधारण और स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के प्रीमियम नवीनीकरण पर छूट देने का विचार करने को कहा है। सूत्रों ने कहा कि इसके साथ ही इरडाई ने जीवन और साधारण बीमा प्रदान करने वाली कंपनियों से कोविड संबंधित दावों को कागजी कार्रवाई कम कर जल्दी भुगतान करने का आदेश दिया है। पिछले सप्ताह कोविड-19 को लेकर आयोजित बैठक में नियामक ने कहा कि बीमा कंपनियों को उन पॉलिसीधारकों को प्रोत्साहन देना चाहिए जो स्वास्थ्य केंद्रों के जरिये आरटी-पीसीआर जांच कराते हैं।

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