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कोयला संकट: कई राज्यों की उत्पादक कंपनियों पर अरबों रुपये का बकाया, महाराष्ट्र, बंगाल और झारखंड सबसे आगे

Sat, 30 Apr 2022 10:46 PM IST
Amit Mandal एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Sat, 30 Apr 2022 10:46 PM IST
सार

सीआईएल ने कहा कि महाराष्ट्र, राजस्थान और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य के जेनको से संबंधित बकाया बहुत अधिक है।

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Generating Companies (gencos) from various states have pending dues to Coal India Limited and SCCL
राज्यों के जेनको पर अरबों बकाया - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश में जारी बिजली और कोयला संकट के बीच विभिन्न राज्यों की उत्पादक कंपनियों (जेनको) पर कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) और सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल) का बकाए का खुलासा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक महाराष्ट्र पर 2,608.07 करोड़ रुपये, पश्चिम बंगाल पर 1066.40 करोड़ रुपये, झारखंड पर 1018.22 करोड़ रुपये, तमिलनाडु पर 823.92 करोड़ रुपये, मध्य प्रदेश पर 531.42 करोड़ रुपये और राजस्थान पर 429.47 करोड़ रुपये बकाया हैं।  

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सीआईएल ने कहा कि महाराष्ट्र, राजस्थान और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य के जेनको से संबंधित बकाया बहुत अधिक है, सीआईएल ने इन जेनको को आपूर्ति को विनियमित नहीं किया और उप-समूह योजना और रेक की उपलब्धता के अनुसार पर्याप्त आपूर्ति की है। 
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सूत्रों के मुताबिक, एससीसीएल और राज्य और केंद्रीय जेनको के बीच संपन्न हुए समझौते के अनुसार, एससीसीएल विभिन्न ताप विद्युत संयंत्रों को कोयले की आपूर्ति कर रहा है। उसका आंध्र प्रदेश पर 764.70 करोड़ रुपये, कर्नाटक पर 514.14 करोड़ रुपये, तमिलनाडु पर 59.19 करोड़ रुपये + 32.79 करोड़ रुपये बकाया है। 
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इस बकाये के कारण राज्य ज्यादा मात्रा में कोयला नहीं खरीद सकते। इसी के चलते सरकार कह रही है कि, समस्या कोयले की नहीं है। बिजली संयंत्रों को रोजाना 22.5 लाख टन कोयला चाहिए, जबकि कोल इंडिया उन्हें रोजाना औसतन 17 लाख टन कोयला पहुंचा रहा है। बिजली संयंत्रों के पास औसतन नौ दिनों का कोयला है। स्थिति पिछले साल सितंबर-अक्टूबर से बेहतर है।


ऊर्जा जानकारों के अनुसार, देश में कोयला संकट से बड़ा भुगतान का संकट है। डिस्कॉमों पर 1.1 लाख करोड़ बकाया हाेने से उत्पादक कंपनियों की कोयला भुगतान क्षमता गिरी है। वहीं, कोल इंडिया का बकाया 21,600 करोड़ से घटकर 12,300 करोड़ हो गया है।

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